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रग्बी से बेघर बच्चों की बदलती तकदीर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बेघर बच्चे और रग्बी? यह कुछ अजीब सा लगता है. पश्चिमी देशों में खेला जाने वाला रग्बी का खेल अब भारत में फुटबॉल का मक्का कहे जाने वाले कोलकाता के बेघर बच्चों के बीच काफ़ी लोकप्रिय हो रहा है. अब तक तो ये बच्चे कबड्डी और गिल्ली-डंडा जैसे खेल ही खेलते थे लेकिन रग्बी में इनके कौशल को देखते हुए कई नामी-गिरामी विदेशी स्कूल भी अब उनके लिए अपने दरवाज़े खोल रहे हैं. कोलकाता महानगर में बेघर बच्चों के लिए एक दशक पुरानी संस्था 'फ्युचर होप’ की रग्बी टीम के पाँच लड़के अपनी खेल प्रतिभा के कारण फ़िलहाल इंग्लैंड में पढ़ रहे हैं. कई अन्य बच्चों को भी कुछ विदेशी शिक्षण संस्थाओं की ओर से 'रग्बी स्कालरशिप' के प्रस्ताव मिले हैं. पूर्व बैंक अधिकारी व फ्युचर होप के संस्थापक टिम ग्रैंडेज कहते हैं, "इनमें से ज्यादातर बच्चे अनाथ हैं. रग्बी ने इनमें एक नया आत्मविश्वास पैदा किया है." उनका कहना है, "इन बच्चों के लिए भविष्य के दरवाज़े भी खुल रहे हैं. अब इन बच्चों ने अपने अतीत को पीछे छेड़ दिया है." इंग्लैंड की एक रग्बी प्रतियोगिता में भाग लेने वाले जिन पाँच बच्चों को स्कालरशिप के प्रस्ताव मिले थे, वे फ़िलहाल इंग्लैंड के स्कूलों में पढ़ रहे हैं. इनके नाम हैं- सुखरा एक्का, तापस चक्रवर्ती, धीरज कुमार विश्वकर्मा, कबीर मल्लिक और जीवन बोस. इन लड़कों की स्कूली पढ़ाई अब लगभग खत्म होने वाली है. इनमें से कोई होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई करना चाहता है तो कोई आर्किटेक्ट बनना चाहता है. ग्रैंडेज बताते हैं कि हाल में इंग्लैंड के मशहूर रग्बी स्कूल ने भी हमारे कई बच्चों को स्कालरशिप देने का प्रस्ताव रखा है. इस संगठन की रग्बी टीम के खिलाड़ी अपनी खेल प्रतिभा के कारण दुनिया के कई देशों में घूम चुके हैं. टीम के एक सदस्य संजय पात्र बताते हैं, "मैं इस खेल के कारण चीन, हॉंगकॉंग, श्रीलंका व युगांडा जैसो देशों में घूम चुका हूँ." फिलहाल वह बंगाल रग्बी एंड फुटबाल यूनियन की टीम को प्रशिक्षण देते हैं. संजय और समीर जैसे रग्बी टीम के कई खिलाड़ी कहते हैं, "रग्बी ने हमें वह सब कुछ दिया है, जिसकी हम कल्पना तक नहीं कर सकते थे." कोलकाता के मैदान में इन खिलाड़ियों को खेलते देखने के लिए भारी भीड़ जुटती है. फिलहाल इस टीम के कम से कम पांच और खिलाड़ी स्कालरशिप पर विदेशी स्कूलों में जाने की तैयारी में जुटे हैं. |
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