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ओलंपिक अभियान पर निकली हॉकी टीम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एथेंस ओलंपिक में पदक पाने की उम्मीद लिए पिछले दो साल से तैयारी में जुटी भारतीय हॉकी टीम जर्मनी के लिए रवाना हो गई है. एथेंस जाने से पहले टीम जर्मनी में अपनी तैयारी को और मज़बूत करने के लिए चार देशों के टूर्नामेंट में हिस्सा लेगी. ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी के साथ इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के बाद 19 जुलाई से तीन अगस्त तक टीम की ज़बरदस्त फ़िटनेस ट्रेनिंग होगी. कुछ-कुछ वैसी ही जैसी पिछले महीने अमरीका में हुई थी. लेकिन अमरीका की कमरतोड़ ट्रेनिंग के बाद जब भारतीय टीम चार देशों की एक अन्य प्रतियोगिता में भाग लेने हॉलैंड पहुँची तब ऐसा लगा मानो सचमुच टीम की कमर ही टूट गई हो. चौथा और आख़िरी स्थान हासिल करने के लिए टीम को कोई ख़ास मेहनत नहीं करनी पड़ी थी. बहरहाल जर्मनी के दो विशेषज्ञों की देखरेख में तैयारी के बाद हॉलैंड में हुई हार का जब विश्लेषण हुआ जो गाज गिरी दो भारतीय प्रशिक्षकों पर. हटाए गए सहायक कोच हरेंद्र सिंह को निकाल बाहर किया गया और उनकी जगह ओलंपियन जगबीर सिंह को सहायक कोच बनाया गया. साथ ही गोलकीपिंग कोच एमआर नेगी की भी छुट्टी कर दी गई और उनकी जगह बुलाए गए हॉलैंड के कोच फ़्रैंक लेख़्त्रे. हॉलैंड से हारकर लौटी टीम के हौसले के बारे में जब टीम के नए सहायक कोच जगबीर सिंह से पूछा गया तो उन्होंने कहा, "टीम के हौसले बुलंद हैं. हॉलैंड में हुई हार बहुत मायने नहीं रखती क्योंकि अमरीका में बहुत कड़े और थकाने वाले कैंप के बाद टीम हॉलैंड पहुँची थी और वह भी अभ्यास के लिए." जगबीर सिंह का कहना था कि अबकी बार पूरी तैयारी है और टूर्नामेंट के अलावा बेल्जियम की टीम के साथ और क्लब टीमों के साथ भी खेले जाने वाले मैचों में टीम को अभ्यास का पूरा मौक़ा मिलेगा और प्रदर्शन भी अच्छा रहेगा. पाँच अगस्त को भारतीय टीम एथेंस के लिए रवाना होगी. हॉलैंड में टूर्नामेंट हारने के बाद जगबीर सिंह के अनुसार टीम के हौसले बुलंद हैं और अगर जर्मनी में भी हार का मुँह देखना पड़ा तो कितने बुलंद हौसलों के साथ भारतीय टीम एथेंस पहुँचेगी यह तो ओलंपिक के दौरान ही पता चलेगा. |
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