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पार्थिव पटेल के हौसले बुलंद
सचिन तेंदुलकर, पार्थिव पटेल
मुल्तान में पार्थिव पटेल
महज 19 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में विकेटकीपिंग की ज़िम्मेदारी संभालने वाले भारतीय खिलाड़ी पार्थिव पटेल भारत-पाकिस्तान सिरीज़ में एक नये जोश के साथ मैदान में उतरे हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया में ख़राब प्रदर्शन के बाद हुई आलोचना ने उनमें उम्दा खेल दिखाने के इरादे को बुलंद कर दिया था. उस श्रृंखला के बाद उन्होंने क़सम खा ली थी कि किसी भी हालत में वो भारतीय क्रिकेट टीम में स्थायी जगह पाकर दिखायेंगे.

पार्थिव ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान अपनी विकेटकीपिंग में ख़ामियाँ पहचान कर उन्हें सुधारने के लिए जी-तोड़ मेहनत की.

उन्होंने बताया, " इस सिरीज़ के बाद मैंने बहुत मेहनत की. मुझे पता चल गया था कि मुझ में क्या कमी है और मैं ने उन कमियों को दूर करने का फैसला कर लिया. अभी तो मुझे बहुत आगे जाना है."

हालाँकि ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ सिरीज़ में स्टम्पस के पीछे कमज़ोर रहे पार्थिव पटेल के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया था, लेकिन राष्ट्रीय चयन समिति के सदस्य और पूर्व भारतीय विकेटकीपर सैयद किरमानी और किरण मोरे ने उनकी प्रतिभा पर अपना विश्वास जताया.

 ऑस्ट्रेलिया की सिरीज़ के बाद मैंने बहुत मेहनत की. मुझे पता चल गया था कि मुझ में क्या कमी है और मैं ने उन कमियों को दूर करने का फैसला कर लिया. अभी तो मुझे बहुत आगे जाना है
पार्थिव पटेल

फिर उन्हें पाकिस्तान में चल रही भारत-पाकिस्तान सिरीज़ में अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला. इस बार उन्होंने किसी को निराश नहीं किया. मुल्तान और लाहौर में उन्होंने बेहतरीन विकेटकीपिंग की.

हालाँकि दूसरा टेस्ट मैच भारत 9 विकेट से हार गया लेकिन इसमें 62 रन बनाकर पार्थिव ने टीम के लिए अहम योगदान दिया.

खेल में सुधार लाने के लिए पार्थिव ने वीडियो तकनीक की मदद ली. "मुझे लगा कि शायद मैं गेंद पर ठीक तरह से ध्यान नहीं दे रहा, या शायद मैं ज़्यादा जल्दी उठ जाता हूँ. इसके लिए इयान हीली ने मुझे कुछ सुझाव दिए और फिर मैं किरण मोरे और किरी भाई की मदद तो लेता ही रहता हूँ. उनसे बात करने के बाद मैंने अपने कुछ वीडियो देखे और अपनी ग़लतियों को समझा. "

अपनी ग़लतियाँ पहचानने के बाद उन्होंने घरेलू क्रिकेट में अपना हाथ आज़माया. " मैंने अहमदाबाद में कुछ वन-डे और दिलीप ट्राफी के लिए मैच खेले. तब मुझे अपनी विकेटकीपिंग में अंतर दिखने लगा."

"अब मुझ में पहले से ज़्यादा आत्मविश्वास है. पाकिस्तान जाने से पहले मैंने कोलकाता में प्रैक्टिस मैच में पूरे दिन विकेटकीपिंग की. "

हालाँकि एकदिवसीय मैचों में उपकप्तान राहुल द्रविड को ही विकेटकीपिंग की ज़िम्मेदारी सौंपी गई. लेकिन इतनी अहम टेस्ट सिरीज़ में जगह पाकर अपना हुनर दिखाने का मौका मिलने से पार्थिव पटेल के हौसले काफी बुलंद हैं.

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