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पाकिस्तान एशिया कप के फ़ाइनल में श्रीलंका से क्यों पिट गया, जानिए सात वजहें
- Author, विधांशु कुमार
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
एशिया कप के रोमांचक फ़ाइनल में अंडरडॉग श्रीलंका ने पाकिस्तान को 23 रनों से हराकार छठी बार एशिया कप की ट्रॉफ़ी पर क़ब्ज़ा जमाया.
क्या वजह रही की जीत का दंभ भरने वाली पाकिस्तान की टीम आख़िरी पड़ाव पर फिसल गई? जानते हैं पाकिस्तान के हार की सात मुख्य वजहें-
1- डिफ़ेंसिव कप्तानी
पाकिस्तान ने श्रीलंका की बैटिंग को वापसी का आसान मौक़ा थमा दिया. एक वक़्त श्रीलंका की टीम 58 रनों पर पाँच विकेट गँवा चुकी थी. ऐसे समय में अगर कप्तान बाबर आज़म श्रीलंका पर और दबाव बनाते, तो शायद उनकी टीम कम रनों पर सिमट सकती थी.
पाकिस्तान के तेज़ गेंदबाज़, खासकर हारिस रॉफ़ ख़तरनाक़ गेंदबाज़ी कर रहे थे और ऐसे में उन्हें हटाकर स्पिनर्स को लाना पाकिस्तान के लिए ग़लत फ़ैसला साबित हुआ.
क्रीज़ पर दोनों नए बल्लेबाज़-हसरंगा और राजपक्षे को तीन ओवर की स्पिन बोलिंग में आंखों को जमाने का मौक़ा मिला और उसके बाद उन्होंने ताबततोड़ आक्रमण भी किया.
नौवें ओर में 58 पर 5 से जब कोई टीम 20 ओवरों में छह विकेट पर 170 रन बना लेती है तो निश्चय ही उस टीम ने मोमेंटम भी अपनी और खींच लिया होता है. रविवार को श्रीलंका के साथ भी ऐसा ही हुआ और उसकी ज़िम्मेदार थी पाकिस्तान की रक्षात्मक कप्तानी.
2- बाबर आज़म का लगातार छठी बार फ़ेल होना
इस पूरी सिरीज़ में पाकिस्तान के कप्तान बाबर आज़म का बल्ला रनों को तरसता रहा. पाकिस्तान टीम के सबसे सफ़ल बल्लेबाज़ बाबर आज़म ने छह पारियों में सिर्फ़ 68 रन बनाए और उनका उच्चतम स्कोर रहा 30.
फ़ाइनल में भी वो प्रमोद लियनागमागे की गेंद पर महज़ पाँच रन बनाकर आउट हो गए और पूरा दबाव एक बार फिर रिज़वान और मिडिल ऑर्डर पर डाल दिया.
जिस तरह ढीला शॉट खेलकर वो आउट हुए उसने भी पाकिस्तान के बल्लेबाज़ों पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया. लेग साइड की गेंद पर उन्होंने बड़े आराम से फ़्लिक करना चाहा और फ़ाइन लेग पर आसान कैच थमा बैठे. बाबर आज़म के लिए ये टूर्नामेंट किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा.
एशिया कप का फ़ाइनल श्रीलंका और पाकिस्तान के बीच दुबई में खेला गया.
टॉस जीतकर पाकिस्तान ने पहले फ़ील्डिंग चुनी.
श्रीलंका ने पाकिस्तान को 23 रनों से हराकार ट्रॉफी पर क़ब्ज़ा जमाया.
भानुका राजपक्षे बने प्लेयर ऑफ़ द मैच.
वानिन्दु हसरंगा प्लेयर ऑफ़ द सिरीज़ चुने गए.
2014 के बाद पहली बार किसी महत्वपूर्ण टूर्नामेंट में श्रीलंका को जीत मिली है.
3- धीमी शुरुआत
श्रीलंका के 170 रनों के जवाब में पाकिस्तान को तेज़ शुरुआत की ज़रूरत थी, लेकिन पावरप्ले में श्रीलंका के गेंदबाज़ छाए रहे.
पहले छह ओवरों में पाकिस्तान ने दो विकेट खोकर 37 रन बनाए जबकि श्रीलंका ने इस दौरान तीन विकेट खो दिए थे और उनका स्कोर था तीन विकेट पर 47 रन.
दरअसल पाकिस्तान के अनुभवी टॉप ऑर्डर- बाबर आज़म, रिज़वान और फख़र ज़मान को श्रीलंका के युवा गेंदबाजों पर तेज़ी से रन बनाकर दबाव डालना चाहिए था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और बाद में बड़े रन रेट के दबाव में विकेट खोते रहे.
इस पूरी सिरीज़ में भले ही रिज़वान ने छह पारियों में सर्वाधिक 281 रन बनाए, लेकिन उनकी रन गति बेहद धीमी रही. उन्होंने ये रन 117 के औसत से बनाए जबकि विराट कोहली ने 276 रन सिर्फ़ 5 पारियों में बनाए जिसमें उनका रन रेट 147 का रहा.
रविवार को रिज़वान ने 49 गेंदों में 55 रन बनाए, लेकिन उनसे तेज़ रनों की दरकार थी. 10वें ओवर में पाकिस्तान 68 पर दो के स्कोर पर था जिसकी वजह से आख़िर के 10 ओवरों में उन्हें 100 से भी अधिक रन बनाने की ज़रूरत पड़ गई और यही दबाव उन्हें ले डूबा.
4- खस्ताहाल मिडिल ऑर्डर
पाकिस्तान की बैटिंग पहले तीन बल्लेबाज़ों पर ज़्यादा निर्भर है और उनके आउट होने का बाद मिडिल ऑर्डर कभी-कभी ही बड़ा स्कोर कर पाता है.
फ़ाइनल में एक बार फिर पाकिस्तान की मिडिल ऑर्डर बैटिंग बिखर गई और टीम ने आख़िरी आठ विकेट सिर्फ़ 54 रनों पर खो दिए.
इफ़्तिख़ार या आसिफ़ जैसे बल्लेबाज़ तेज़ रन तो बना सकते हैं, लेकिन लंबी पारियाँ ना खेल पाना इनका कमज़ोर पक्ष है.
5- हसरंगा, राजपक्षे की पार्टनरशिप
फ़ाइनल के पहले दस ओवरों में लग रहा था कि श्रीलंका शायद पूरे 20 ओवर भी बैटिंग न कर पाए. लेकिन हसरंगा और राजपक्षे की पार्टनरशिप ने पासा पलट दिया.
दोनों ने ज़बर्दस्त काउंटर अटैक किया और छठे विकेट के लिए 36 गेंदों में 58 रनों की साझेदारी निभाई. हसरंगा खासतौर पर पेस और स्पिन दोनों के ख़िलाफ़ आक्रामक थे और रॉफ़ की बोलिंग पर भी दो लगातार चौके लगाए.
उनके आउट होने के बाद राजपक्षे ने पारी संभाली और छह चौकों और तीन छक्कों की मदद से 45 गेंदों पर नाबाद 71 रन बनाए. उन्होंने आख़िरी पाँच ओवरों में अपने पार्टनर के साथ 53 रन जोड़े जिसकी मदद से श्रीलंका ने बड़ा लक्ष्य रखा.
6- हसरंगा का चौथा ओवर
हसरंगा ने शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन दिखाया और अपनी गेंदबाज़ी से पाकिस्तान की कमर तोड़ दी. हालांकि पाकिस्तानी बल्लेबाज़ों ने हसरंगा को अच्छी तरह से खेला और पहले तीन ओवरों में उन्हें बिना कोई विकेट दिए 25 रन बना लिए.
लेकिन हसरंगा ने अपने स्पेल के लास्ट ओवर में अच्छी तरह से सेट रिज़वान, ख़तरनाक आसिफ़ अली और ख़ुशदिल शाह को पवेलियन भेज दिया और श्रीलंका को ट्रॉफ़ी जीतने का बड़ा दावेदार बना दिया
7- मज़बूत टीम होने का मिथक
हालांकि मैच हारने का बाद प्रेस कॉन्फ़्रेंस में पाकिस्तान के कोच सक़लैन मुश्ताक ने अपनी टीम की प्रशंसा की, लेकिन गहरी नज़र डाले तो पाकिस्तान की ये टीम एक मज़बूत टीम होने का मिथक भर रह गई है.
उन्हें सिर्फ़ हॉन्ग कॉन्ग के विरुद्ध बड़ी जीत मिली जबकि भारत के साथ वो एक मैच हार गए और दूसरा मैच मुश्किल से जीता. वहीं श्रीलंका के ख़िलाफ़ वो अपने दोनों ही मैच हार गए और स्कोर का पीछा करते हुए भी जीत हासिल नहीं कर पाए.
उनकी बैटिंग और फ़ील्डिंग में कमज़ोरियां दिखीं जबकि श्रीलंका और भारत ने (दूसरे मैच में) काउंटर अटैक कर पाकिस्तान की पेस बोलिंग को भी दबाव में ला दिया था.
दरअसल किसी भी टीम के बारे में जीत एक अलग कहानी कहती है और हार दूसरी. शायद पाकिस्तान का अति आत्मविश्वास उन्हें श्रीलंका के विरुद्ध फ़ाइनल में ले डूबा.
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