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विराट कोहली को गावस्कर ने क्यों दी तेंदुलकर से बात करने की सलाह?
- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
लीड्स टेस्ट में विराट कोहली का टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी का फ़ैसला टीम इंडिया के लिए मुश्किलों का पहाड़ लेकर आया.
जो रूट के गेंदबाज़ों ने 17 डिग्री तापमान, बादलों से भरे आसमान और विकेट में मौजूद नमी के चलते भारत को सस्ते में समेट दिया.
भारतीय टीम पहली पारी में पूरे पचास ओवर भी नहीं खेल सकी और महज़ 78 रनों पर सिमट गई. नौ बल्लेबाज़ तो दहाई तक भी नहीं पहुँचे. रोहित शर्मा ने 19 और अजिंक्य रहाणे ने 18 रन बनाए. कप्तान विराट कोहली केवल सात रन बनाकर टेस्ट क्रिकेट में सातवीं बार इंग्लैंड के तेज़ गेंदबाज़ जेम्स एंडरसन का शिकार बने. लगातार एक ही तरह से विकेट गँवाते देखकर मैच की कमेंट्री कर रहे पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर भी कह उठे कि विराट कोहली को सचिन तेंदुलकर को फ़ोन करना चाहिए.
विराट कोहली के फ़ॉर्म का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनका पिछला शतक साल 2019 में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ कोलकाता में आया था जब उन्होंने 136 रन बनाए थे.
अब तो क्रिकेट के तीनों प्रारूपों टी-20, एकदिवसीय और टेस्ट क्रिकेट में खेले गए मैचों को मिलाकर लगभग 50 पारियां हो गई हैं जब उनका शतक नहीं लगा.
अपनी ग़लती का पता नहीं चलता
सुनील गावस्कर की विराट कोहली को सचिन तेंदुलकर से सलाह लेने को लेकर भारत के पूर्व आलराउंडर, चयनकर्ता और कोच रहे मदन लाल कहते हैं, "कई बार किसी बल्लेबाज़ को अपनी कमज़ोरी या ग़लती का एहसास नहीं होता, लेकिन दूसरों को हो जाता है. वह सचिन तेंदुलकर से सलाह ले सकते हैं, लेकिन यह समस्या तो उन्हें ख़ुद ही दूर करनी होगी क्योंकि मैदान में तो उन्हें ही खेलने जाना है."
मदन लाल इस बात से भी हैरान हैं कि क्या सोचकर विराट कोहली ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का फ़ैसला किया. या तो उनसे विकेट को पढ़ने में चूक हो गई या फिर उन्हें अपनी बल्लेबाज़ी पर भरोसा था कि पहले खेलकर 250-300 रन बना लेंगे और इंग्लैंड पर दबाव बना देंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. लीड्स में देखा गया है कि टीमें टॉस जीतकर पहले फ़ील्डिंग करना पसंद करती हैं.
वैसे यह विराट कोहली पर निर्भर करता है कि वह मौजूदा परिस्थितियों से कैसे तालमेल बिठाते हैं. एक बेहद अहम बात यह भी है कि उन्हें गेंद भी बहुत बेहतरीन की जा रही है, उस पर कोई भी बल्लेबाज़ आउट हो सकता है. एंडरसन दुनिया के शानदार गेंदबाज़ हैं, उनके और विराट कोहली के बीच जो लड़ाई चल रही है उसमें तो अभी तक एंडरसन ही जीते हैं.
मानसिकता में असर
इसी मुद्दे को लेकर भारत के पूर्व बल्लेबाज़ और चयनकर्ता रहे अशोक मल्होत्रा कहते हैं, "विराट कोहली को लेकर की जा रही चिंता से बड़ी बात यह है कि उनकी मानसिकता में फ़र्क़ आ गया है. उनके बल्ले से अधिक रन नहीं निकल रहे जबकि उन्हें जल्दी से शतक लगाने की आदत है. उन्होंने अपनी जैसी छवि बनाई है वैसा ही उन पर दबाव आ रहा है. दबाव में वह तेज़ खेलने की कोशिश करते हैं और इंग्लैंड में ऐसा संभव नहीं है."
अशोक मल्होत्रा की मानें तो अंततः खेलना तो विराट को ही है चाहे वह सचिन के पास जाएं या रवि शास्त्री के, लेकिन उन्हें अपनी मानसिकता पर क़ाबू पाना होगा. बहुत ज़्यादा ग़ुस्से से या जोश में खेलने से नुक़सान ही होता है.
विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप का फ़ाइनल हारने के अलावा विराट कोहली की कप्तानी में भारत जब जीत ही रहा है तो उन पर किस बात का दबाव है? इसके जवाब में अशोक मल्होत्रा कहते हैं, "दो साल से उनसे शतक नहीं बना. उनका रन औसत गिरता जा रहा है. उन्हें हर तीसरे चौथे मैच में शतक लगाते सबने देखा है, रन ना बनने से उन पर दबाव बन रहा है."
विराट कोहली में तकनीकी कमी को लेकर अशोक मल्होत्रा कहते हैं, "उन्हें विकेट पर टिकना होगा. वह जिस तरह से बार-बार स्लिप में कैच देकर आउट हो रहे हैं तो लगता है कि वह गेंद को अपने शरीर से दूर खेल रहे हैं. वह अपने आप पर क़ाबू रख सकते हैं. जल्दी खेलने की कोशिश में ही उनका बल्ला शरीर से दूर जा रहा है. उन्हें ज़रा सा इंतज़ार करके खेलना होगा."
कोहली की कमज़ोरी
तो क्या सारी दुनिया ने उनकी कमज़ोरी पकड़ ली है जो विराट से शतक नहीं लग रहे ? इसे लेकर अशोक मल्होत्रा कहते हैं, "सारी दुनिया ने उनकी कमज़ोरी नहीं पकड़ी है. उनसे बस इंग्लैंड में रन नहीं बन रहे हैं. इंग्लैंड के भारी मौसम में गेंद स्विंग होती है जिसे आँखें नीचे रखकर खेलना होता है. वहां बल्ला फेंककर नहीं खेल सकते."
मदन लाल और अशोक मल्होत्रा के अलावा क्रिकेट समीक्षक अयाज़ मेमन भी इस मसले को लेकर मानते हैं कि विराट कोहली को सुनील गावस्कर ने सही सलाह दी है कि वह सचिन तेंदुलकर से फ़ोन पर बात करें.
उन्होंने बताया, "विराट कोहली एकाध बार नहीं, लगातार एक ही ग़लती करते हुए आउट हो रहे हैं. ऐसा लगता है कि उनकी एकाग्रता या तकनीक में कहीं कमी आ गई है. बड़े से बड़े खिलाड़ी के साथ ऐसा हो सकता है. सचिन तेंदुलकर का उदाहरण है कि जब वह ऑस्ट्रेलिया में ऑफ़ स्टंप के बाहर आउट हो रहे थे तो उन्होंने सोच लिया कि आख़िरी टेस्ट मैच में कवर में ना तो ड्राइव लगाना है और ना ही उधर खेलना है. इसके बाद उन्होंने दोहरा शतक लगाया."
जब एक बड़ा बल्लेबाज़ और वह भी विराट कोहली जैसा बल्लेबाज़ अगर एक ही अंदाज़ में बार-बार आउट हो रहा हो तो ज़रूर उन्हें उससे बात करनी चाहिए जिसे वह अपना शुभचिंतक समझते हों, फ़िर अपनी बल्लेबाज़ी में सुधार करें जिससे टीम का मध्यम क्रम संभले. लेकिन क्या इंग्लैंड में बिना कवर ड्राइव के खेला जा सकता है?
इसे लेकर अयाज़ मेमन मानते हैं, ''कवर ड्राइव लगाने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन वह किस गेंद पर लगाया जाए वह महत्वपूर्ण है. अगर पैर ना चले, फ़ॉर्म हल्का हो जो कि बड़े से बड़े खिलाड़ी का हो सकता है, लीन पैच आ जाता है तो अच्छे से अच्छा खिलाड़ी जल्दी आउट हो जाता है.''
अयाज़ मेमन कहते हैं, "जैसे कोहली आउट हो रहे हैं ठीक वैसे ही चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे भी आउट हो रहे हैं. रोहित शर्मा हुक या पुल करते हुए विकेट गँवा रहे हैं. ऋषभ पंत स्लिप या गली में कैच हो रहे हैं. तो बैटिंग कोच विक्रम राठौर और चीफ़ कोच रवि शास्त्री की भी ज़िम्मेदारी है कि वह टीम पर काम करें."
नंबर एक पर भी होता है दबाव
सुनील गावस्कर की विराट कोहली को लेकर चिंता क्या इसलिए है कि वह कप्तान हैं और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में से एक हैं?
इस सवाल के जवाब में अयाज़ मेमन कहते हैं, "बेशक. अगर एक कप्तान के रूप में विराट कोहली ग़लतियों से सबक़ लेकर आगे नहीं बढ़ते तो टीम का मनोबल भी गिरने लगता है, इसलिए सुनील गावस्कर ने विराट कोहली को सही सलाह दी है."
कोहली पर बने दबाव की कोई ख़ास वजह अयाज़ नहीं मानते, लेकिन वह कहते हैं, ''अच्छे प्रदर्शन की एन्ज़ाइटी या तनाव सबको महसूस होता है. नोवाक जोकोविच रियो ओलंपिक में गए, लेकिन गोल्डन स्लैम नहीं बना पाए, टेनिस में हार गए हालांकि नंबर एक थे. तो जो सर्वश्रेष्ठ होते हैं उन पर दबाव तो होता ही है, लेकिन इस दबाव को विराट साकारात्मक रूप में लें और उसे अच्छे प्रदर्शन में बदलें. ऐसा वह साल 2018 में कर चुके हैं.''
अयाज़ कहते हैं, "यह ठीक है कि पिछले दो साल से उनका एक भी शतक किसी भी प्रारूप में नहीं लगा है. लेकिन उनका फ़ॉर्म 2014 जैसा नहीं है जब वह संघर्ष कर रहे थे, यहां तो वह पिछले मैच की पहली पारी में 42 रन बना चुके है. ऐसा नहीं है कि कोहली की फ़ॉर्म बिल्कुल ख़राब हो गई है, लेकिन कहीं ना कहीं उनकी एकाग्रता भंग हो रही है. कई बार तकनीक को लेकर मामूली से सुधार से बहुत फ़र्क़ पड़ जाता है इसलिए गावस्कर ने विराट को सचिन से सलाह लेने की बात कही है."
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