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'सचिन तेंदुलकर लोगों के लिए क्रिकेट के भगवान होंगे, लेकिन वो मेरे लिए बेटे जैसा है'
- Author, गगन सबरवाल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लंदन
आज से छह साल पहले 16 नवंबर, 2013 को वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ टेस्ट मुक़ाबले से अपने इंटरनेशनल क्रिकेट करियर का समापन करने वाले सचिन तेंदुलकर की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है.
क्रिकेट को लेकर उनकी हर बात आज भी ध्यान से सुनी जाती है. उनके जीवन से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी.
मूल रूप से भारत के रहने वाले सोली एडम यॉर्कशायर के पूर्व क्रिकेटर हैं, जिन्होंने कई भारतीय और पाकिस्तानी क्रिकेटरों को इंग्लैंड में लीग क्रिकेट खेलने में मदद की.
लेकिन उन्हें विशेषकर तब याद किया जात है जब सचिन तेंदुलकर का जिक्र होता है. सचिन यॉर्कशायर काउंटी क्रिकेट क्लब के लिए खेलने वाले पहले गैर-यॉर्कशायर खिलाड़ी थे.
यह बात 1992 की है, तब क्रिकेट क्लब के लिए वही खेल पाता था, जो वहां का निवासी होता था, लेकिन सोली एडम के प्रयासों की वजह से सचिन पहले गैर-यॉर्कशायर खिलाड़ी बने, जिन्होंने इस क्लब के लिए खेला.
एडम सोली ने बीबीसी के साथ विशेष बातचीत में ये बताया कि यॉर्कशायर में उनका समय कैसा बीता था.
एडम और सचिन के बीच गाढ़ी दोस्ती है. एडम बताते हैं कि सचिन लोगों के लिए क्रिकेट के भगवान होंगे, लेकिन वो मेरे लिए बेटे जैसा है.
वो बताते हैं कि अच्छे और महान क्रिकेटर बहुत हुए हैं लेकिन सचिन उनमें से कहीं अलग हैं.
सोली एडम कहते हैं, "दो किस्म के क्रिकेटर होते हैं, एक गॉड गिफ्टेड होते हैं जो महेनत नहीं करते और दूसरा मेहनती. सचिन के पास गॉड गिफ्टेड टैलेंड तो था ही, वो मेहनत भी काफी किया करते थे. इसलिए भारत के क्रिकेट प्रेमी उन्हें क्रिकेट का भगवान कहते हैं."
आपने कब फ़ैसला किया कि आप सचिन को यॉर्कशायर लेकर आएंगे?
यॉर्कशायर में खेलने का मौक़ा मिलना इतना आसान तो नहीं था. बहुत पापड़ बेलने पड़ें. मैंने क्लब वालों से कई मुलाक़ात की और उनसे बहुत झगड़ा करना पड़ा. अंत में वो माने. फिर मैंने सचिन तेंदुलकर का नाम प्रस्तावित किया.
जब पहली बार सचिन यहां आए तो कहां रह रहे थे?
सचिन ने अनुरोध किया था कि सोली भाई मुझे अलग घर देना, लेकिन ड्यूजबरी में ही रहना है. खाने-पीने की तकलीफ नहीं हुई उसे, कपड़े धोने की तकलीफ नहीं हुई क्योंकि उसे तो कुछ आता नहीं था.
कपड़े या तो मेरी भाभी धो देती थी या फिर मेरी पत्नी. खाना खा लेता था. उसकी खाने की कोई फरमाइश नहीं होती थी. जो दे देते थे, वो खा लेता था.
लेकिन वो पिज्जा का शौकीन था. हम दो पिज्जा रात में मंगाते थे. एक हम उसे दे दिया करते थे और एक में हम छह लोग खाते थे.
आपने एक बार कहा था कि आप सचिन को ब्लैकपुल लेकर गए थे.
यह बहुत ही खूबसूरत जगह है, वहां हमलोगों ने खूब मज़े किए. हर राइड की, उसने कोई भी राइड छोड़ी नहीं.
हमलोग बिलियर्ड्स खेलने गए. वो पहले कभी खेला नहीं था. उसने शुरू किया, दस मिनट के अंदर वो दूसरों से अच्छा खेलने लगा.
विनोद कांबली सचिन के सबसे अच्छे दोस्त थे, उनका क्रिकेट करियर इतना अच्छा क्यों नहीं रहा?
विनोद दो साल मेरे कैप्टनशिप में खेला था. वो बहुत प्रतिभाशाली क्रिकेटर था, लेकिन मेहनती नहीं था. सचिन प्रतिभाशाली तो था ही साथ में मेहनती भी था. क्रिकेट मेहनत मांगता है.
क्या आपने सचिन का पहला मैच देखा जो उन्होंने यॉर्कशायर में खेला था?
हमलोग साथ में ही गए थे. काफी प्रैक्टिस की थी. सचिन ने कहा था कि सोली भाई एक काम करना है मुझे, शतक बनाना है. मैंने कहा ठीक है. पहले उसने 50 रन बनाए, फिर 60, फिर 70, फिर 80 और अंत में 86 रन पर आउट हो गया.
इससे वो बहुत निराश हुआ कि वो 100 नहीं बना सका. 86 रन बनाने की जितनी खुशी नहीं थी, उससे कहीं ज्यादा आउट होने का गम था.
सचिन की अंतिम रात ड्यूसबरी में कैसी थी, उसके बारे में बताइए.
रात के करीब 11, साढ़े 11 बजे किसी ने खटखटाया. मैंने दरवाजा खोला. सचिन खड़ा था. मैं पूछा कि तुम यहां क्या कर रहे हो?
उसने कहा कि सोली भाई मैं जा रहा हूं, आपके और भाभी के पैर छूने आया हूं. मैंने तो तीन-चार सौ क्रिकेटर बुलाए होंगे, ये एकलौता खिलाड़ी था जो जाने से पहले मेरे और मेरी पत्नी के पैर छू कर गया.
(बीबीसी हिंदी की वेबसाइट पर यह स्टोरी पहली बार 26 जून, 2019 को प्रकाशित हो चुकी है.)
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