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राष्ट्रमंडल खेल: मीराबाई को भी हरा चुकी हैं सरकार से टक्कर लेने वाली संजीता चानू
- Author, वंदना
- पदनाम, बीबीसी टीवी एडिटर, दिल्ली
चार साल पहले जब भारत ने ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में अपना सफ़र शुरू किया था तो सबकी नज़रें भारत के पहले मेडल पर लगी थीं और भारत को पहला मेडल दिलाया था 20 साल की संजीता चानू ने. और वो भी एक स्वर्ण पदक.
उस समय स्टेज के पीछे खड़ी थीं कोच कुंजारानी देवी जिन्हें देखकर संजीता ने खेलना शुरू किया था.
कुंजारानी देवी संजीता की आदर्श रही हैं. स्थानीय भाषा में कुंजुरानी संजीता की हौसला अफ़ज़ाई कर रही थीं और संजीता ने भी उन्हें निराश नहीं किया था.
शर्मीली लेकिन दमदार
24 साल की हो चुकीं संजीता चानू गोल्ड मेडल का स्वाद तो पहले ही चख चुकी हैं, और गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में भी संजीता ने गोल्ड ही जीता.
खेलों के लिए पावर-हाउस बनकर उभरे मणिपुर से ही संजीता का भी नाता है.
मीराबाई चानू की ही तरह संजीता भी कुंजारानी देवी से बहुत प्रभावित थीं जिन्होंने वेटलिफ़्टिंग में भारत के लिए ख़ूब नाम कमाया.
भारतीय रेलवे की कर्मचारी संजीता स्वभाव से शर्मीली हैं लेकिन जब वो मैदान पर उतरती हैं तो उनका दूसरा ही रूप देखने को मिलता है.
संजीता के लिए मेडल जीतने का सिलसिला बचपन से ही शुरू हो गया था.
महज़ 20 साल की उम्र में संजीता ने 48 किलोग्राम वर्ग में 173 किलोग्राम वज़न उठाकर ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में गोल्ड मैडल जीता था.
पदक से दिया जवाब
अगर संजीता दो किलो भार और उठातीं तो राष्ट्रमंडल खेलों में रिकॉर्ड बन जाता. हालांकि निजी स्तर पर वो कई उतार चढ़ाव से गुज़री हैं.
कई मेडल जीत चुकी संजीता 2017 में उस समय भी सुर्ख़ियों में आई थीं जब अर्जुन पुरस्कार पाने वालों की सूची में उनका नाम नहीं था.
इसके बाद उन्होंने कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया.
अर्जुन अवॉर्ड तो संजीता को नहीं मिला लेकिन उन्होंने अपना जवाब पिछले साल कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में 53 किलोवर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर दिया.
राष्ट्रमंडल खेलों में पदक की उम्मीद
वैसे मणिपुर की ही वेटलिफ़्टर मीराबाई और संजीता, दोनों के बीच कड़ा मुक़ाबला रहता है.
दोनों अच्छी दोस्त भी हैं. ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में संजीता ने गोल्ड जीता था तो मीरा को रजत पदक मिला था.
पहले 48 किलोवर्ग में खेलने वाली संजीता ने अब 53 किलोग्राम वर्ग में खेलना शुरू कर दिया है.
हालांकि इस साल हुई नेशनल चैंपियनशिप में उन्हें पी संतोषी ने फ़ाइनल में हरा दिया था.
लेकिन भारत को इन राष्ट्रमंडल खेलों में संजीता चानू ने एक और गोल्ड मेडल दिला दिया है.