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नेहरा: 18 साल, 12 चोटें, 164 मैच.. 235 विकेट
18 साल का लंबा सफर...164 मैच और 235 विकेट. इंटरनेशनल क्रिकेट की गलाकाट प्रतिस्पर्धा में जहां क्रिकेटर चार-पाँच साल के सफर में ही हांफने लगते हैं, ये आंकड़े किसी भी क्रिकेटर के लिए हैरान कर देने से कम नहीं हैं.
बात किसी और की नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे सीनियर ख़िलाड़ी आशीष नेहरा की हो रही है, जिन्होंने उसी जगह अपना आख़िरी इंटरनेशनल मुक़ाबला खेला जहाँ उन्होंने अपने खेल को निखारा था और टीम इंडिया में जगह बनाई थी.
दिल्ली के फ़िरोज़शाह कोटला मैदान में नेहरा ने हज़ारों दर्शकों की ज़ोरदार तालियों के बीच अपने करियर को विराम दे दिया.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शायद वो पहले तेज़ गेंदबाज़ होंगे जिसका करियर इतना लंबा रहा हो.
हाल ही में जब ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ टी20 सिरीज़ के लिए चुनी गई टीम में आशीष नेहरा का नाम शामिल किया गया तो कई क्रिकेट विशेषज्ञों और क्रिकेट प्रेमियों ने इस पर हैरानी जताई थी.
हालांकि ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ खेले गए शुरुआती दो टी20 मैचों में नेहरा को अंतिम 11 में शामिल नहीं किया गया.
दुबले-पतले शरीर वाले 38 वर्षीय नेहरा ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत साल 1999 में श्रीलंका के ख़िलाफ़ टेस्ट सिरीज से की थी.
वहीं उन्होंने अपना पहला वनडे मुकाबला 2001 में जिम्बाब्वे के ख़िलाफ़ खेला था. इस मैच में उन्होंने 2 विकेट झटके थे.
नेहरा ने कुल 120 अंतरराष्ट्रीय वनडे मैचों में 157 विकेट लिए हैं, वहीं 26 अंतरराष्ट्रीय टी20 मैचों में उनके नाम 34 विकेट हैं.
जब उल्टियां करके भारत को जितवाया
दक्षिण अफ्रीका में खेले गए 2003 क्रिकेट विश्वकप में भारत का सामना था इंग्लैंड से. पहले खेलते हुए भारतीय टीम 250 रन ही बना सकी थी. टीम इंडिया को यह मैच हर हाल में जीतना था.
लेकिन डरबन की तेज़ पिच पर भारतीय कप्तान सौरव गांगुली को तलाश थी उस गेंदबाज की जो 250 रनों के मामूली लक्ष्य का बचाव कर पाता.
यह जिम्मेदारी संभाली आशीष नेहरा ने. उन्होंने 10 ओवर की गेंदबाजी में महज 23 रन दिए और 6 अंग्रेज़ बल्लेबाजों को पवैलियन की राह दिखाई.
यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नेहरा का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन रहा. गेंदबाजी करते हुए नेहरा एक वक्त इतना ज्यादा थक गए कि उन्हें मैदान में ही उल्टी आ गई. ऐसा लगने लगा कि भारतीय टीम का सबसे शानदार गेंदबाज शायद अपना स्पैल पूरा नहीं कर पाएगा.
लेकिन नेहरा हार मानने वाले नहीं थे, उन्होंने कुछ केले खाए मैदान में वापस लौटे और टीम इंडिया को जीत दिलवाकर ही दम लिया.
डेथ ओवर में मारक गेंदबाजी
आशीष नेहरा को उनकी डेथ ओवर में किफायती गेंदबाजी के लिए जाना जाता है. मैच के अंतिम ओवरों में नेहरा रन रोकने और विकेट निकालने में माहिर रहे.
नेहरा ने खुद भी कई मौकों पर कहा था कि उन्हें मैच की सबसे मुश्किल परिस्थिति यानि डेथ ओवर में गेदबाजी करना सबसे ज्यादा अच्छा लगता है.
युवाओं का खेल कहे जाने वाले टी20 फॉर्मेट में नेहरा एक बेहतरीन गेंदबाज के रूप में उभरे. उन्होंने आईपीएल में भी खुद को साबित किया. आईपीएल में उन्होंने कुल 88 मैचों में 106 विकेट लिए हैं.
पहले आईपीएल (2008) में वे मुंबई इंडियंस की तरफ से खेले, उसके बाद 2009 में वे डेल्ही डेयरडेविल्स में शामिल हो गए. फिर 2012 तक वे पुणे वॉरियर्स टीम का हिस्सा रहे. इसके बाद 2013 में वे दोबारा डेल्ही डेयरडेविल्स में आए.
इसके बाद वे 2014 और 2015 में चेन्नई सुपरकिंग्स की तरफ से खेले. साल 2015 के आईपीएल में नेहरा ने 22 विकेट अपने नाम किए थे. फिलहाल वे सनराइजर्स हैदराबाद टीम का हिस्सा हैं.
सोशल मीडिया से दूर 'नेहराजी'
आज के वक्त में लगभग सभी क्रिकेटर सोशल मीडिया पर बहुत एक्टिव रहते हैं. फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर पर खिलाड़ी लगातार अपडेट करते रहते हैं लेकिन नेहरा इस मामले में थोड़ा जुदा हैं.
नेहरा फेसबुक पर एक्टिव नहीं हैं. ट्विटर पर उनके नाम से अकाउंट तो है लेकिन उससे आखिरी ट्वीट 15 जुलाई को किया गया था.
हालांकि उनके साथी खिलाड़ी समय-समय पर उनके साथ तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालते रहते हैं, यहां तक कि ट्विटर पर कई खिलाड़ी और प्रशंसक उन्हें प्यार से नेहराजी कहकर बुलाते हैं.
एक बार नेहरा ने खुद इस बारे में कहा था कि वे सोशल मीडिया से हमेशा दूर रहते हैं, क्योंकि इसमें बहुत ज्यादा वक्त ज़ाया हो जाता है. नेहरा को पुराना नोकिया फोन इस्तेमाल करते कई बार देखा गया है.
टेस्ट में फेल रहे नेहरा
वनडे और टी20 में शानदार प्रदर्शन करने वाले नेहरा टेस्ट मैचों में सफल नहीं हो पाए. नेहरा ने कुल 17 टेस्ट मैच खेले जिसमें उन्हें 44 विकेट मिले.
नेहरा ने अपना अंतिम टेस्ट साल 2004 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ रावलपिंडी में खेला था. इस मैच में उन्होंने दोनों पारियों में मिलाकर 3 विकेट लिए थे.
टेस्ट मैचों में नेहरा एक बार भी पांच विकेट नहीं ले पाए. टेस्ट में फेल होने के पीछे नेहरा की फिटनेस एक बड़ा कारण रही. कई बार ख़राब फिटनेस के चलते वे टीम से अंदर-बाहर होते रहे.
यही वजह थी कि वे टेस्ट मैचों में लंबे स्पैल नहीं फेंक पाते थे. उन्होंने 10 साल पहले टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया था.
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