You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
इंग्लैंड पर भारत की जीत के 'असली' हीरो
- Author, भरत शर्मा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
टीम इंडिया की इंग्लैंड पर 4-0 की एकतरफ़ा और शानदार जीत में या तो विराट कोहली के बल्ले की चर्चा है या फिर अश्विन-जडेजा की फिरकी की.
लेकिन अगर ये कहा जाए कि सिरीज़ जीतने के असली और छिपे हुए 'हीरो' कोई और थे, तो आप भी सोच में पड़ जाएंगे.
माना कि विराट कोहली ने 109.16 की औसत से पांच टेस्ट मैच में 655 रन बनाए और रविचंद्रन अश्विन (28 विकेट) और रवींद्र जडेजा (26 विकेट) ने अंग्रेज़ बल्लबाज़ी की कमर तोड़ दी.
लेकिन जब कभी टीम इंडिया का शीर्ष क्रम और मध्य क्रम लड़खड़ाया, पुछल्ले बल्लेबाज़ों ने ना केवल टीम को संभाला बल्कि उसे जीतने वाली स्थिति में ला दिया.
फिरकी गेंदबाज़ों की बैटिंग का कहर
अश्विन, जडेजा और जयंत यादव भले अपनी फिरकी के लिए सराहे जा रहे हैं, लेकिन हक़ीक़त ये है कि उनके बल्ले ने इस सिरीज़ में भारत को हार से बचाया भी और जीत तक पहुंचाया भी.
आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि सिरीज़ में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ों की सूची में ये तीन 'गेंदबाज़' काफ़ी ऊपर हैं.
इस फ़ेहरिस्त में दसवें पायदान पर मौजूद अश्विन ने सिरीज़ में 43.71 की औसत और चार अर्धशतकों की मदद से 306 रन बनाए हैं.
अश्विन से दो सीढ़ी नीचे मौजूद जडेजा 37.33 की औसत से 224 रन बनाने में कामयाब रहे. सिरीज़ में 26 विकेट चटकाने वाले जडेजा ने दो अहम अर्धशतक लगाए.
जयंत यादव का सैकड़ा काम आया
उनके एक कदम नीचे और सूची में 13वें स्तर पर जयंत यादव खड़े हैं, जिन्होंने अपनी फिरकी के साथ-साथ बल्ले से भी ध्यान खींचा.
तीन मैचों में 73.66 की औसत से जयंत यादव ने 221 रन बनाए, जिसमें एक शानदार शतक भी शामिल है.
आंकड़े भी इस बात की तस्दीक़ करते हैं कि भारत के पुछल्ले बल्लेबाज़़ों ने ना केवल भारत को मैच में मज़बूत स्थिति में पहुंचाया बल्कि टीम को जीत तक ले गए.
मैच दर मैच पुछल्ले बल्लेबाज़ों के प्रदर्शन में निखार आता रहा और टीम इंडिया मज़बूत होती गई.
राजकोट में खेले गए पहले टेस्ट की पहली पारी में इंग्लैंड 537 रनों के साथ डटी दिख रही थी और टीम इंडिया के बल्लेबाज़ मुश्किल में थे.
अश्विन सिर्फ़ गेंदबाज़ नहीं रहे
इस अहम मौके पर अश्विन ने 70 रनों की बेशक़ीमती पारी खेली और दूसरे पुछल्लों ने उनका पूरा साथ दिया. भारत के पांच विकेट 349 रन पर गिर गए थे, लेकिन टैलेंडर्स ने टीम को 488 रनों तक पहुंचाया.
इसका असर ये हुआ कि इंग्लैंड दूसरी पारी में 260 रनों पर पहुंचने के बाद ही पारी घोषित कर पाया और वक़्त गुज़़रने से टीम इंडिया को मैच बचाने का मौक़ा मिल गया.
विशाखापट्टनम के दूसरे टेस्ट में भी बल्लेबाज़ों के अलावा गेंदबाज़ों की बैटिंग ने प्रभावित किया. जयंत यादव ने पहली पारी में 35 रनों की पारी खेली, लेकिन दूसरी पारी में उनके 27 रन मूल्यवान साबित हुए और इंग्लैंड 405 रनों का पीछा करते हुए 158 पर सिमट गई.
मोहाली का तीसरे टेस्ट भी गेंदबाज़ों की धमाकेदार बल्लेबाज़ी के लिए याद किया जाना चाहिए. इंग्लैंड के 283 रनों के जवाब में भारत 204 रनों पर छह विकेट गंवाकर जूझ रहा था.
जब इंग्लैंड को मैच और सिरीज़ में लौटने की उम्मीद नज़र आ रही थी, अश्विन (72 रन), जडेजा (90) और जयंत यादव (55 रन) ने उनके सपने तोड़ दिए. टीम इंडिया इन तीन पारियों की बदौलत 417 रनों तक पहुंच गया और मैच जीत लिया गया.
हर मैच में किया प्रभावित
मुंबई में खेले गए चौथे टेस्ट में इंग्लैंड के 400 रनों के जवाब में भारतीय टीम 364 रनों पर सात विकेट खोकर जूझ रही थी, लेकिन जयंत यादव ने शानदार शतक लगाया. विराट कोहली के साथ मिलकर यादव ने आठवें विकेट के लिए 241 रन जोड़े और मैच, अंग्रेज़ टीम की जद से बाहर हो गया.
चेन्नई टेस्ट में कोहली बल्ले से नहीं चले और अश्विन की गेंद भी नहीं चमकी. लेकिन करुण नायर के तिहरे शतक के साथ अश्विन और जडेजा के पचासे बड़े काम आए और स्कोर इंग्लैंड के 477 रनों से कहीं आगे 759 पर पहुंच गया.
गेंदबाज़ों की बल्लेबाज़ी कैसे जीत तक पहुंचाती है, ये इस सिरीज़ ने दिखाया.