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सोशल: 'ये लड़ाई सादगी और बेतुकों के बीच की है'
पूर्वोत्तर के तीन राज्यों त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे आ गए हैं.
भारतीय जनता पार्टी ने अप्रत्याशित जीत हासिल करते हुए त्रिपुरा से वामदलों का सफाया कर दिया है. पार्टी के समर्थक और सहयोगी इसे बड़ी जीत मान रहे हैं.
वहीं सोशल मीडिया पर इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.
भाजपा की हर राजनीतिक जीत की तरह इस जीत का सेहरा भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सिर ही बांधा जा रहा है.
संभाजी भिडे अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखते हैं, त्रिपुरा में बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन किया है. 5 सालों में जीरो से 40 प्रतिशत तक वोट मिलना सच में ख़ास है.
भारतीय जनता पार्टी की इस जीत पर प्रशंसक राहुल गांधी से भी चुटकी ले रहे हैं.
ट्विटर पर शहजाद जय हिंद लिखते हैं, राहुल गांधी मुक्त त्रिपुरा, राहुल गांधी मुक्त नगालैंड और मेघालय में जहां कांग्रेस की थोड़ी-सी भी जीतने की उम्मीद होती है वहां राहुल गांधी कैंपेनिंग के लिए इटली चले जाते हैं. इटली ज़्यादा ज़रूरी है या पूर्वोत्तर?
कैलाश वाघ लिखते हैं, दोस्तों क्या राहुल गांधी इटली से वापस आ गए हैं? वे अपनी नानी को सरप्राइज देने गए थे.
त्रिपुरा में पिछले 25 सालों से लेफ्ट की सरकार थी. लेकिन अब बीजेपी ने सत्ता हासिल की है.
25 सालों से त्रिपुरा के मुख्यमंत्री रहे माणिक सरकार अपनी सादगी और ईमानदार छवि के लिए जाने जाते हैं.
सुनिल अनंतपुरी लिखते है, ''ये लड़ाई सादगी और बेतुकी बात करने वाले के बीच की है.''
वहीं दूसरी ओर ऋषि बागड़ी लिखते है, त्रिपुरा के परिणाम उत्तर प्रदेश से भी ज्यादा ऐतिहासिक हैं. जहां वोट 1.5 प्रतिशत से 50 प्रतिशत हो गया. वाम के खिलाफ जीत और उनसे छुटकारा मिला है.
वहीं कुछ लोग भाजपा की जीत के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम पर भी शक़ ज़ाहिर कर रहे हैं.
ऐश्वर्य वर्मा लिखते हैं, बैलट पेपर पर बीजेपी पीछे रहती है लेकिन ईवीएम आते ही वो आगे बढ़ जाती है.
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