कश्मीर में जीएसटी का क्या होगा?

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- Author, माजिद जहांगीर
- पदनाम, बीबीसी हिंदीडॉटकॉम के लिए
भारत प्रशासित कश्मीर में जीएसटी लागू करने के मुद्दे पर सरकार अभी तक सहमति नहीं बना पाई है.
इस मुद्दे पर सहमति बनाने के लिए सरकार अभी तक दो बार सर्वदलीय बैठक बुला चुकी है. विपक्ष, कश्मीर व्यापार मंडल के अलावा अलगाववादी भी राज्य में जीएसटी लागू करने के ख़िलाफ़ हैं.
जम्मू-कश्मीर में बीजेपी और पीडीपी की गठबंधन सरकार है. विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार ने जीएसटी के मुद्दे पर आम लोगों को गुमराह किया है.
राज्य सरकार का कहना है कि जीएसटी व्यापारियों के हित में है और इससे राज्य के विशेष दर्जे यानि अनुच्छेद 370 पर इसका कोई असर नहीं होगा.
17 जून को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में जीएसटी पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाया गया था.

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अलगाववादी नेताओं का कहना है कि कश्मीर में जीएसटी लागू करना प्रदेश के विशेष दर्जे को ख़त्म करने की साज़िश है.
इसी बीच केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती से कहा है कि वो राज्य में एक जुलाई से जीएसटी लागू करवाएं.
विपक्षी पार्टी नेशनल कांफ्रेंस जीएसटी को मौजूदा रूप में लागू करने का विरोध कर रही है.
पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नासिर असलम वानी कहते हैं, "हम जीएसटी को मौजूदा रूप में स्वीकार नहीं कर सकते हैं. कश्मीर के स्वराज्य पर कोई आंच नहीं आनी चाहिए."
नेशनल कांफ्रेंस ने जीएसटी पर चर्चा के लिए 24 जून को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का भी बहिष्कार किया था. वहीं कांग्रेस ने कहा है कि सरकार जीएसटी का वौ मसौदा दिखाए जो जम्मू-कश्मीर में लागू किया जा रहा है.
राज्य का नुकसान नहीं हो
राज्य के कांग्रेस अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर कहते हैं, "हम राज्य में लागू किए जा रहे जीएसटी बिल का मसौदा देखना चाहते हैं उसके बाद हम अपने सुझाव रखेंगे. इस बिल से राज्य के विशेष दर्जे और आर्थिक स्थिति को कोई नुकसान नहीं होना चाहिए."
सरकार पर लोगों को गमुराह करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि यदि पीडीपी और बीजेपी में कोई सहमति बिल को लेकर बनी है तो उसे जनता के सामने रखना चाहिए.

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वहीं सीपीआई (एम) के महासचिव और विधायक मोहम्मद युसुफ़ तारिगामी कहते हैं कि संविधान कश्मीर को अपने क़ानून ख़ुद बनाने की आज़ादी देता है और ये अधिकार अन्य राज्य को नहीं है. हमने सरकार को इसी तरह के सुझाव भी दिए हैं.
कश्मीर का व्यापार मंडल भी राज्य में जीएसटी लागू किए जाने के ख़िलाफ़ है. कश्मीर इकॉनामिक एलायंस के मुखिया मोहम्मद यासीन ख़ान कहते हैं कि हमें जो आज़ादी टैक्स देने के मामले में मिली है हम उसका आत्मसमर्पण नहीं करेंगे.
वहीं सरकार में शामिल बीजेपी का कहना है कि राज्य में जीएसटी को लागू करना ही होगा. बीजेपी के वरिष्ठ नेता और राज्य में वित्त व क़ानून मंत्री अजन नंदा कहते हैं, "जीएसटी लागू नहीं किया तो बहुत मुश्किल होगी. हो सकता है कि केंद्र सरकार की दी गई डेडलाइन एक जुलाई को ये लागू न हो पाए. अगले एक दो दिनों में इस मुद्दे पर बैठक होगी फिर देखते हैं आगे क्या होता है."
वहीं क़ानून के विशेषज्ञों का भी मानना है कि जीएसटी लागू करने से राज्य के विशेष दर्जे को नुक़सान पहुंच सकता है.
विशेष दर्जा पर असर
क़ानून विशेषज्ञ रियाज़ ख़ावर कहते हैं, "जम्मू-कश्मीर की विधानसभा के पास राज्य के टैक्स से जुड़े क़ानून बनाने का अधिकार है. लेकिन जिस तरह केंद्र सरकार जीएसटी लागू कर रही है उससे राज्य का विशेष दर्जा प्रभावित हो सकता है."

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ख़ावर कहते हैं, "कश्मीर में सिर्फ़ तीन मामलों में भारत का क़ानून चलता है- रक्षा, संचार और विदेश मामले."
वहीं राज्य में जीएसटी लागू होने या न होने से पीडीपी और बीजेपी को होने वाले राजनीतिक नुकसान या फ़ायदे का भी आकलन लगाया जा रहा है.
राजनीतिक विश्लेषक ताहिर मोहिदीन कहते हैं, "यदि पीडीपी और बीजेपी की बीच सहमति के बिना इसे लागू किया जाता है तो इससे राजनीतिक विवाद खड़ा हो सकात है. बीजेपी का जो है सो है लेकिन इससे पीडीपी के लिए मुश्किलें पैदा होंगी."












