इंसानी दिमाग़ को टक्कर देने वाला रोबोट

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अमरीकी शोधकर्ताओं ने ऐसा रोबोट ब्रेन बनाया है जो इंटरनेट पर लाखों वेब पेजों को ब्राउज़ कर ख़ुद ही नए-नए हुनर सीख सकता है.
<link type="page"><caption> 'रोबो ब्रेन'</caption><url href="http://robobrain.me/#/" platform="highweb"/></link> इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि वो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचना स्रोतों से कई प्रकार के हुनर और ज्ञान को हासिल कर ले.
दुनिया के बाक़ी हिस्सों में मौजूद अन्य रोबोट अपने रोज़मर्रा के कामों के लिए रोबो ब्रेन की सूचनाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं.
इसी तरह के एक प्रोजेक्ट <link type="page"><caption> रोबोअर्थ</caption><url href="http://roboearth.org/" platform="highweb"/></link> को यूरोप में पहले ही विकसित किया जा रहा है. बीती जनवरी में नीदरलैंड में इसका प्रदर्शन किया गया था.
रोबोअर्थ की जानकारियों का स्रोत प्रोग्रामिंग है जबकि रोबो ब्रेन इंटरनेट से मिली सूचनाओं के प्रति ख़ुद अपनी समझ बनाता है.
माइक्रोवेव और छाता

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रोबो ब्रेन प्रोजेक्ट पर अमरीका के चार विश्वविद्यालयों-कॉर्नेल, ब्राउन, स्टैनफ़ोर्ड और कैलिफ़ोर्निया मिलकर काम कर रहे हैं. इसमें गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां भी सहयोग कर रही हैं.
शोधकर्ताओं ने कहा कि पिछले महीने क़रीब एक अरब तस्वीरें, एक लाख 20 हज़ार यूट्यूब वीडियो और लगभग 10 करोड़ उपकरणों के मैनुअल को इसने खंगालना शुरू कर दिया है.
इस प्रोजेक्ट की एक वेबसाइट में बताया गया है कि इसमें कुर्सी को पहचानने, माइक्रोवेव और छाता के इस्तेमाल की समझ है.
शोधकर्ताओं का कहना है कि रोबो ब्रेन केवल वस्तुओं को पहचानता ही नहीं है बल्कि उसमें मनुष्यों की भाषा और व्यवहार जैसी जटिल चीज़ों को समझने की भी क्षमता है.

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यह मग को पहचान सकता है और जान सकता है कि इसका इस्तेमाल क्यों और कैसे किया जाता है.
यह जानता है कि जब कोई टीवी देख रहा हो तो उसके रास्ते में नहीं आना चाहिए.
कॉर्नेल विश्वविद्यालय के एक शोधकर्ता आशुतोष सक्सेना कहते हैं, ''यदि कोई रोबोट ऐसी स्थिति में फंसता है, जिससे उसका पहले साबका नहीं पड़ा था तो वह रोबो ब्रेन से सलाह-मश्विरा कर सकता है.''
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