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क्या कोरोना वायरस वैक्सीन के कुछ दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं?
दुनिया भर में अब तक क़रीब 20 संभावित कोरोना वैक्सीन विकसित किये जा चुके हैं जिन्होंने शुरुआती परीक्षणों में बढ़िया नतीजे दिये और अब वैज्ञानिक इनके अगले चरण के 'क्लीनिकल ट्रायल' कर रहे हैं.
अलग-अलग दवा निर्माता कंपनियों और शोध संस्थानों द्वारा क़रीब 140 और टीकों पर भी काम चल रहा है जिनसे उम्मीद है कि वो कोरोना वायरस को रोक पायेंगे.
बीते दो सप्ताह इस लिहाज़ से अच्छे गुज़रे हैं कि पहले अमरीका, फिर ब्रिटेन और फिर चीन, रूस और भारत से ख़बर मिली कि उनके यहाँ तैयार किये जा रहे संभावित कोरोना वैक्सीन को शुरुआती चरणों में सफलता मिली है.
बहुत से पाठकों ने इन संभावित टीकों के बारे में हमें अपने सवाल भेजे हैं जिनका जवाब देने की कोशिश कर रही हैं बीबीसी की हेल्थ एडिटर मिशेल रॉबर्ट्स:
पहला सवाल: क्या कोरोना वैक्सीन 100 प्रतिशत सुरक्षित होगी? क्या इस वैक्सीन के कुछ अवांछित दुष्प्रभाव हो सकते हैं?
जवाब: कठोर सुरक्षा जाँच से गुज़रने के बाद ही किसी टीके को व्यापक इस्तेमाल की मंज़ूरी मिलती है. इसके लिए कई चरणों में टेस्ट किये जाते हैं. लेकिन कोविड-19 की वैक्सीन विकसित करने के लिए रिसर्च का काम बहुत ही तेज़ी से किया गया है.
अनुसंधान का काम भी सामान्य स्थिति की तुलना में काफ़ी तेज़ गति में चल रहा है. फिर भी क्लीनिकल ट्रायल के दौरान वो सारे परीक्षण किये जा रहे हैं जो एक टीके को मंज़ूरी देने से पहले ज़रूरी होते हैं.
मेडिकल साइंस मानती है कि किसी भी उपचार के कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं, और इस मामले में टीके अलग नहीं होते. मगर टीकों का सबसे आम दुष्प्रभाव भी काफ़ी मामूली होता है, जैसे- शरीर के किसी हिस्से पर सूजन आना या त्वचा पर लाल धब्बे पड़ना, वो भी सिर्फ़ उस जगह पर, जहाँ टीका लगाया गया हो.
दूसरा सवाल: क्या पुराने फ़्लू वैक्सीन को ही कोविड-19 के लिए विकसित किया गया है?
जवाब: मौसमी फ़्लू से बचाव के लिए लगने वाला टीका कोरोना वायरस संक्रमण से रक्षा नहीं कर पायेगा. फ़्लू (इन्फ़्लूएंज़ा) और कोरोना वायरस संक्रमण, दो पूरी तरह से अलग बीमारियाँ हैं जो अलग-अलग वायरस से होती हैं.
मगर फ़्लू का टीका लगवाना एक अच्छा विचार हो सकता है, ख़ासकर कोरोना महामारी के दौर में, क्योंकि ये भी आपकी सेहत की रक्षा तो करता ही है.
फ़्लू के कारण कुछ लोग वाक़ई गंभीर रूप से बीमार हो जाते हैं. ऐसे में वो लोग जिन्हें कोरोना से ख़तरा है, यानी 65 से अधिक उम्र वाले लोग, या लंबे वक़्त के किसी बीमारी से जूझ रहे लोग, वो सावधानी के तौर पर फ़्लू का टीका लगवा सकते हैं.
तीसरा सवाल: क्या ट्रांसप्लांट (प्रत्यारोपण) करवा चुके लोग भी टीका लगवा सकेंगे?
जवाब: वैज्ञानिक कई तरह के संभावित टीकों पर काम कर रहे हैं. इन्हें कई तरह से टेस्ट किया जा रहा है. हालांकि, यह अब तक स्पष्ट नहीं है कि इनमें कौनसा टीका सबसे ज़्यादा प्रभावी साबित हो सकता है.
टीके के विभिन्न संस्करण कुछ लोगों के लिए दूसरों की तुलना में अधिक उपयुक्त हो सकते हैं.
इन्हीं सब सवालों के जवाब खोजने के लिए टेस्ट किये जा रहे हैं ताकि ये पता लग सके कि टीकाकरण से किसे-कितना लाभ हो सकता है.
अब बात विशेष रूप से ट्रांसप्लांट की, तो अगर आपने ट्रांसप्लाट करवाया है और इस वजह से आप इम्युनिटी को दबाने के लिए कुछ दवाएं ले रहे हैं ताकि आपका शरीर उस ट्रांसप्लांट को स्वीकार कर ले, तो कुछ वैक्सीन जैसे कि 'जैव' टीके जिसमें कमज़ोर स्तर के बैक्टीरिया या वायरस हों, आपको नहीं लेने चाहिए.
चौथा सवाल: अगर ये वायरस अपना रूप बदल लेता है, तो क्या ये संभावित टीका तब भी प्रभावी होगा?
जवाब: वर्तमान में विकसित होने वाले कोरोनो वायरस के टीके अभी फैल रहे वायरल संक्रमण के नमूनों पर आधारित हैं.
ये सच है कि वायरस ख़ुद को बदल सकते हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि इससे टीके का प्रभाव कम हो जायेगा. ऐसे मामले में बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि वायरस में उत्परिवर्तन (बदलाव) कितना बड़ा और महत्वपूर्ण है. तब विज्ञानियों को यह देखना होगा कि क्या वायरस ने उन हिस्सों को ही बदल लिया है जिन हिस्सों पर किसी भी टिके को सबसे पहले अपना असर दिखाना था.
वर्तमान में परखे जा रहे प्रायोगिक कोरोना वायरस टीकों में से कई में वायरस के आनुवांशिक निर्देश शामिल किये गए हैं. मसलन, विज्ञानियों ने वायरस के काँटेदार 'प्रोटीन स्पाइक' जिनकी मदद से वायरस इंसानी शरीर में मौजूद सेल्स पर हमला करता है, उसके आनुवांशिक निर्देशों को टीके में शामिल किया है.
विज्ञानियों ने अब तक वायरस के इस हिस्से में कोई बदलाव नहीं देखा है जो इन टीकों को बेकार साबित कर दे.
इस बारे में विस्तार से पढ़ें:कोरोना वायरस ने अब तक कितना रूप बदला, वैक्सीन का होगा कितना असर?
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