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तीन ख़ूबियों से गूगल क्रोम को टक्कर दे सकता है फ़ायरफ़ॉक्स क्वॉन्टम ब्राउज़र
पिछले कुछ सालों से एक ब्राउज़र इंटरनेट पर राज कर रहा है- गूगल क्रोम. मगर अब एक ऐसा ब्राउज़र आया है जो इसे टक्कर देने की तैयारी में है- फ़ायरफ़ॉक्स.
फ़ायरफ़ॉक्स कोई नया नाम नहीं है. इसे साल 2002 में पहली बार फ़्री और ओपन सोर्स ब्राउज़र के तौर पर लॉन्च किया गया था. इसे मोज़िला फ़ाउडेशन ने डिवेलप किया है, जिसकी वेबसाइट कहती है कि वह 'इंटरनेट तक सभी की पहुंच बनाने की गारंटी देने वाले' फ़्री सॉफ़्टवेयर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है.
जब साल 2008 में क्रोम लॉन्च हुआ थो तो धीरे-धीरे उसने बाक़ी ब्राउज़र्स की जगह ले ली.
आंकड़े मुहैया करवाने वाले पोर्टल www.statista.com के अनुसार इस साल के मई तक 67 प्रतिशत इंटरनेट ट्रैफ़िक गूगल क्रोम से आता है. बाकी ब्राउज़र्स बहुत पीछे हैं. 11 प्रतिशत फ़ायरफॉक्स, 7 प्रतिशत एक्सप्लोरर और 5 प्रतिशत सफ़ारी से आता है.
लेकिन मोज़िला ने पिछले साल के अंत में फ़ायरफ़ॉक्स क्वॉन्टम जारी किया और महीने दर महीने इसके फ़ॉलोअर बढ़ते जा रहे हैं.
विशेषज्ञों के मुताबिक तीन ऐसे कारण हैं, जिनके आधार पर कहा जा सकता है कि फ़ायरफ़ॉक्स क्वॉन्टम गूगल क्रोम को टक्कर देने के लिए तैयार है. ये कारण नीचे दिए गए हैं-
1. प्राइवेसी
फ़ायरफ़ॉक्स में इंस्टॉल होने वाले एक्सटेंशन क्रोम के मुक़ाबले कम हैं मगर वे आपको ज़्यादा सुरक्षा देते हैं.
फ्री ब्राउज़र में आप ऐसा फ़ीचर एक्टिवेट कर सकते हैं जो इंटरनेट क्रॉलर्स को आपका निजी डेटा एकत्रित करने से रोक सकता है. लेकिन क्रोम में ऐसा करने के लिए आपको थर्ड पार्टी एक्सटेंशन इंस्टॉल करने का झंझट उठना होगा.
इसके अलावा फ़ायरफ़ॉक्स क्वॉन्टम में फ़ेसबुक को सीमित कर देने की भी सुविधा है. इससे आपकी सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल अलग रहेगी और वह ब्राउज़र में आपकी अन्य गतिविधियों को ट्रैक नहीं कर पाएगी.
चूंकि फ़ायरफ़ॉक्स एक फ़्री ब्राउज़र है, वह इसके ज़रिये व्यावसायिक उद्देश्यों की पूर्ति नहीं करता. डेटा एकत्रित करके उसे विज्ञापन देने वालों को बेचने में उसकी कोई रुचि नहीं है.
2. स्पीड
कुछ वेबसाइटों का कहना है कि फ़ायरफ़ॉक्स की स्पीड क्रोम से ज़्यादा है तो कुछ वेबसाइटें मानती हैं कि क्रोम ज़्यादा फ़ास्ट है.
द न्यू यॉर्क टाइम्स के टेक्नॉलजी एक्सपर्ट ब्रायन एक्स. शेन एक लेख में लिखते हैं कि कई महीनों तक दोनों को इस्तेमाल करने के बाद वह कह सकते हैं कि दोनों काफ़ी फ़ास्ट हैं.
दोनों में ये अंतर है कि फ़ायरफ़ॉक्स संसाधनों को सही ढंग से ढालता है और सही तरीके से उन्हें इस्तेमाल करता है.
क्रोम में जब भी आप नया टैब खोलते हैं, यह एक नया प्रोसेस शुरू कर देता है और इससे मशीन स्लो हो जाती है. जबकि फ़ायरफ़ॉक्स में नए टैब की लोडिंग स्पीड तेज़ रहती है.
3. डेटा की कम खपत
ब्राउज़र को फ़ास्ट और हल्का बनाने के लिए मेमरी की भी ज़रूरत होती है.
मोज़िला का दावा है कि फ़ायरफ़ॉक्स क्वॉन्टम 30 फ़ीसदी कम रैम इस्तेमाल करता है और इसका बैटरी लाइफ़ पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है.
स्तंभकार शेन ने पाया कि नेटफ्लिक्स के वीडियो लगातार लूप पर चलाने पर क्रोम के मुक़ाबले फ़ायरफ़ॉक्स पर बैटरी 20 प्रतिशत ज़्यादा चली.
वह मानते हैं कि यह बहुत ज़्यादा फ़र्क नहीं है और भले ही अभी फ़ायरफ़ॉक्स क्वॉन्टम को लंबा सफ़र तय करना होगा, मगर ये छोटी-छोटी बातें आशाजनक हैं.
प्राइवेसी के मामलों को लेकर सिक्योरिटी एक्सपर्ट मोज़िला के काम की प्रशंसा करते हैं.
एक गैर-लाभकारी डिजिटल अधिकार संगठन इलेक्ट्रॉनिक फ्रंटियर फाउंडेशन के सिक्योरिटी रिसर्चर कूपर क्विंटिन ने न्यू यॉर्क टाइम्स से कहा, "ऐसा लगता है कि फ़ायरफ़ॉक्स ने ख़ुद को प्राइवेसी-फ्रेंड्ली ब्राउज़र के रूप में स्थापित किया है और वे सुरक्षा बढ़ाने के मामले में शानदार काम भी कर रहे हैं."
तो क्या इन बातों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि मोज़िला फ़ायरफ़ॉक्स क्रोम को टक्कर देने के लिए तैयार है?
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