वो लड़की, जिसने अपनी शादी ख़ुद रुकवा दी

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    आख़िरी फ़ोन कॉल

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    किसी भी शादी वाले दिन की सुबह काफ़ी व्यस्त होती है. पिछले साल 4 नवंबर को मोनिका की शादी होने वाली थी. सुबह से ही भागम-बाग मची थी. दुल्हन मोनिका को तैयार करने के लिए उस के बाल संवारे जाने थे. मेक-अप होना था. दुल्हन को परंपरा के मुताबिक़, मरून रंग की साड़ी पहननी थी.

    इस ख़ास दिन के लिए जो गहने रखे गए थे, वो उसे कान, नाक और गले में डालने थे. इस भारतीय शादी के लिए उसके हाथों में मेहंदी भी लगनी थी.

    बहुत सारा काम बाक़ी था. मगर शादी से कुछ घंटे पहले ही, दुल्हन अपने घर से चुपके से निकली, ताकि एक आख़िरी फ़ोन कॉल कर सके. किसी ने भी उसे घर से निकलते हुए नहीं देखा.

    ये फ़ोन कॉल किसी दोस्त या शादी के बंदोबस्त से जुड़े शख़्स के लिए नहीं थी, जिससे ये पूछना था कि सब-कुछ ठीक से हो रहा है या नहीं.

    बल्कि नर्वस दुल्हन यानी मोनिका ने फ़ोन से चार डिजिट का नंबर 1098 डायल किया. ये नंबर एक हेल्पलाइन का था. शादी के लिए मोनिका की उम्र बहुत कम थी. इसलिए वो अपनी शादी ख़ुद रोकना चाहती थी.

    मोनिका

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    मोनिका उस वक़्त 13 बरस की थी, जब उसकी शादी होने वाली थी. ये उस स्वयंसेवी संस्था का कहना है, जिसने मोनिका की मदद की. स्कूल के रिकॉर्ड में भी मोनिका की यही उम्र दर्ज है.

    पिछले साल सितंबर की बात है. पूरा परिवार राजस्थान के बीकानेर शहर में रह रहा था. मोनिका के पिता गणेश एक दिन अपने घर से बेहद ज़रूरी काम के लिए निकले.
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    भीड़ भरे बाज़ारों, ऊंट के गोबर से पटी सड़कों और हॉर्न बजाते तिपहिया वाहनों की भीड़ और शोर से होते हुए, गणेश अपने इस ख़ास मिशन पर निकले थे.

    उस दिन शाम को जब गणेश घर लौटे, तो गणेश और उनकी पत्नी सीता ने बेटी मोनिका को बुलाया. दोनों ने उसे बताया कि उन्होंने उसकी शादी के लिए लड़का ढूंढ लिया है. मोनिका उस दिन को याद करते हुए बताती हैं, "मम्मी-पापा ने बताया कि उन्होंने मेरे लिए 115 मील दूर स्थित चुरू में लड़का ढूंढा है. वो बहुत अच्छा है पढ़ा लिखा है और मेहनत-मज़दूरी करता है."

    "मैंने महसूस किया कि शादी के लिए मैं अभी बहुत छोटी हूं. मैं पढ़ना चाहती थी. पढ़ाई पूरी करके मैं एक टीचर बनना चाहती थी."

    मोनिका

    जब हमने मोनिका से उसके होने वाले पति के बारे में पूछा, तो उसने बिना जज़्बाती हुए बताया कि वो कभी भी अपने भावी पति से नहीं मिली. मां-बाप ने उसकी एक तस्वीर दिखाई थी. उसकी उम्र 22 बरस थी.

    एक आज्ञाकारी बेटी की तरह, मोनिका ने भी पहले यही सोचा कि वो अपने मां-बाप की बात सिर झुकाकर मान ले. लेकिन उसके भीतर जज़्बातों का तूफ़ान सा आया हुआ था. मोनिका कहती हैं, 'मैं महसूस कर रही थी कि मैं तो अभी बहुत छोटी हूं. मुझे शादी नहीं करनी चाहिए. मैं पढ़-लिखकर टीचर बनना चाहती थी'.

    मोनिका ने अपने मां-बाप से गुज़ारिश की. उसने कहा कि वो अभी शादी नहीं करना चाहती. जब उन्होंने पूछा कि आख़िर वो ऐसा क्यों चाहती है, तो मोनिका ने उन्हें बताया कि किसी भी लड़की की शादी के वक़्त उम्र 18 साल होनी चाहिए.

    शादी का मतलब था, दुनिया से कट जाना.

    मोनिका के भावी पति का घर उसके घर से चार घंटे के ट्रेन के सफ़र की दूरी पर था. मोनिका कहती हैं, 'अगर शादी हो जाती तो पूरी ज़िंदगी नए घर में ही बीत जाती. मुझे कोई खेलने नहीं देता. बात नहीं करने देता. मुझे घर का सारा काम करना पडता. मेरे ससुराल वाले मुझसे सिर्फ़ काम ही कराते. मुझे सारा काम करना पड़ता.'

    फिर आख़िर मोनिका के मां-बाप को क्यों लगा कि उसकी शादी इतनी कम उम्र में कर देनी चाहिए?

    भीड़ भरे बाज़ारों, ऊंट के गोबर से पटी सड़कों और हॉर्न बजाते तिपहिया वाहनों की भीड़ और शोर से होते हुए, गणेश अपने इस ख़ास मिशन पर निकले थे.

    उस दिन शाम को जब गणेश घर लौटे, तो गणेश और उनकी पत्नी सीता ने बेटी मोनिका को बुलाया. दोनों ने उसे बताया कि उन्होंने उसकी शादी के लिए लड़का ढूंढ लिया है. मोनिका उस दिन को याद करते हुए बताती हैं, 'मम्मी-पापा ने बताया कि उन्होंने मेरे लिए 115 मील दूर स्थित चुरू में लड़का ढूंढा है. वो बहुत अच्छा है पढ़ा लिखा है और मेहनत-मज़दूरी करता है.'

    जब हमने मोनिका से उसके होने वाले पति के बारे में पूछा, तो उसने बिना जज़्बाती हुए बताया कि वो कभी भी अपने भावी पति से नहीं मिली. मां-बाप ने उसकी एक तस्वीर दिखाई थी. उसकी उम्र 22 बरस थी.

    एक आज्ञाकारी बेटी की तरह, मोनिका ने भी पहले यही सोचा कि वो अपने मां-बाप की बात सिर झुकाकर मान ले. लेकिन उसके भीतर जज़्बातों का तूफ़ान सा आया हुआ था. मोनिका कहती हैं, 'मैं महसूस कर रही थी कि मैं तो अभी बहुत छोटी हूं. मुझे शादी नहीं करनी चाहिए. मैं पढ़-लिखकर टीचर बनना चाहती थी'.

    मोनिका ने अपने मां-बाप से गुज़ारिश की. उसने कहा कि वो अभी शादी नहीं करना चाहती. जब उन्होंने पूछा कि आख़िर वो ऐसा क्यों चाहती है, तो मोनिका ने उन्हें बताया कि किसी भी लड़की की शादी के वक़्त उम्र 18 साल होनी चाहिए.

    शादी का मतलब था, दुनिया से कट जाना.

    मोनिका के भावी पति का घर उसके घर से चार घंटे के ट्रेन के सफ़र की दूरी पर था. मोनिका कहती हैं, 'अगर शादी हो जाती तो पूरी ज़िंदगी नए घर में ही बीत जाती. मुझे कोई खेलने नहीं देता. बात नहीं करने देता. मुझे घर का सारा काम करना पडता. मेरे ससुराल वाले मुझसे सिर्फ़ काम ही कराते. मुझे सारा काम करना पड़ता.'

    फिर आख़िर मोनिका के मां-बाप को क्यों लगा कि उसकी शादी इतनी कम उम्र में कर देनी चाहिए?

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    मोनिका के घर के आंगन में बैठकर चाय पीते हुए हमें लगा कि मोनिका के मां-बाप गणेश और सीता अपने बच्चों को बहुत प्यार करते हैं. लेकिन उनकी ज़िंदगी में बहुत जद्दोजहद है. गणेश एक दिहाड़ी मज़दूर हैं. वो रोज़ाना पांच सौ रुपए कमाते हैं. रोज़ उन्हें काम भी नहीं मिलता. उनकी साइकिल आंगन में ही खड़ी है. कभी भी अचानक काम का बुलावा आने पर जाना पड़ सकता है.

    गणेश वाल्मिकी समुदाय से ताल्लुक़ रखते हैं. वो समाज के उस तबक़े से आते हैं, जिन्हें अछूत कहा जाता है. आज भी वो समाज में अलग-थलग ही रहते हैं. वो सिर्फ़ अपनी ज़ात-बिरादरी के लोगों से मिलते-जुलते हैं.

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    मोनिका की मां और उसकी दादी, लोगों के घरों की सफ़ाई करती हैं. जैसा कि ऐसे परिवारों के साथ अक्सर होता है. घर की बड़ी लड़कियों की पढ़ाई नहीं ही होती. जब हमने मोनिका से पूछा कि उसके कितने दोस्त हैं, तो उसने बताया कि एक भी नहीं. उसकी पढ़ाई भी बंद हो गई है. आज वो एकदम अकेली लड़की है.

    उसके घर के एक कमरे के कोने में कुछ फ़र्नीचर पड़ा है. एक मज़बूत सी आलमारी रखी है और एक नया फ्रिज रखा है. फ्रिज का उसके घर में होना चौंकाने वाली बात है. क्योंकि मोनिका के घर में फ्रिज तो है नहीं. बाद में पता चला कि ये तो मोनिका के दहेज़ का सामान है.

    गणेश

    गणेश

    उसके घर के एक कमरे के कोने में कुछ फ़र्नीचर पड़ा है. एक मज़बूत सी आलमारी रखी है और एक नया फ्रिज रखा है. फ्रिज का उसके घर में होना चौंकाने वाली बात है. क्योंकि मोनिका के घर में फ्रिज तो है नहीं. बाद में पता चला कि ये तो मोनिका के दहेज़ का सामान है.

    उसकी सबसे बड़ी बेटी रजनी की शादी पिछले साल नवंबर में होने वाली थी. उसके दूल्हे का एक भाई भी था. मोनिका के परिवार ने सोचा कि बड़ी बेटी की शादी के साथ छोटी की भी शादी कर दी जाए, तो ख़र्च कम होगा. एक के ख़र्च में दो शादियां हो जाएंगी.

    गणेश और सीता कहते हैं कि वो ग़रीब हैं और उनके लिए शादी का ख़र्च उठाना मुश्किल है. इसीलिए उन्होंने दोनों बेटियों की शादी एक साथ करने की सोची.

    लेकिन, जिस छोटी बेटी मोनिका की शादी वो करने जा रहे थे, वो ग़ैरक़ानूनी थी. उन्हें पता ही नहीं था कि नाबालिग बेटी का ब्याह जुर्म है.

    सीता

    सीता

    सीता लाचारी से कहती है कि आख़िर वो करते तो क्या करते?

    सीता कहती है कि ये शादी मोनिका की हिफ़ाज़त के लिए भी ज़रूरी थी. वो कहती हैं, 'जब हम काम पर जाते हैं, तो बच्चों को अकेला छोड़कर जाते हैं. पास-पड़ोस सुरक्षित नहीं है. ऐसे में हमेशा डर लगा रहता कि बच्चियां सुरक्षित होंगी या नहीं. इसीलिए हमने बड़ी बहन के साथ ही मोनिका को भी ब्याहने की सोची थी.'

    राजस्थान में ऐसे बहुविवाह आम हैं. शादी के कार्ड में सिर्फ़ बड़ी बेटी का नाम छपा होता है. इससे अधिकारी बाल विवाह को पकड़ नहीं पाते. ग़ैरक़ानूनी शादी को इस तरह से क़ानूनी जामा पहनाया जाता है.

    लेकिन मोनिका के मामले में अधिकारियों को ख़बर लग गई.

    और ये ख़बर ख़ुद मोनिका ने दी.

    शादी कैसे रुकी?

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    मोनिका अपने मां-बाप के साथ बैठकर जब उस दिन का क़िस्सा बता रही थी, तो उसके दिल में मां-बाप के लिए ज़रा भी मैल नहीं था. लेकिन, पिछले साल जब शादी क़रीब आती जा रही थी, तो वो बेहद तनाव में थी.

    मोनिका अपने मां-बाप के साथ बैठकर जब उस दिन का क़िस्सा बता रही थी, तो उसके दिल में मां-बाप के लिए ज़रा भी मैल नहीं था. लेकिन पिछले साल जब शादी क़रीब आती, जा रही थी, तो वो बेहद तनाव में थी.

    मोनिका उस दिन को याद करते हुए कहती हैं, 'जब मैंने अपनी बहन को शादी के जोड़े में देखा, तो मुझे एकदम से लगा कि मेरी उम्र शादी की नहीं है. मैं शादी नहीं कर सकती.'

    इसी के बाद उसने दिल की आवाज़ पर बच्चों की नेशनल हेल्पलाइन 1098 पर कॉल किया. ये नंबर उसने क़िताबों में पढ़ा था. उसने अपनी दादी से फ़ोन मांगा और कॉल किया. उस वक़्त शादी में कुछ ही घंटे बचे थे.

    मोनिका डरी हुई थी. लेकिन उसके पास यही एक रास्ता बचा था. वो कहती हैं, 'मैंने फ़ोन लगाया. मुझे नहीं पता कि किसने फ़ोन उठाया. लेकिन मैंने उन्हें पूरी बात बताई. कहा कि मैं अभी बच्ची हूं. शादी नहीं करना चाहती. अभी आगे पढ़ना चाहती हूं. मैंने उनसे पूछा कि क्या आप मेरी मदद करेंगे. मेरी शादी रोकेंगे'.

    दिल्ली में हेल्पलाइन ऑपरेटर ने उसे शांत करने की कोशिश की. उसने पूरा नाम-पता लिया और कहा कि वो शादी रोकने के लिए जल्द ही उसके घर पहुंचेंगे.

    यहां पर कहानी में एंट्री होती है 31 साल की प्रीति यादव की. उनकी स्वयंसेवी संस्था उर्मुल ट्रस्ट बीकानेर में चाइल्डलाइन की तरफ़ से आए केस संभालती है. प्रीति को ऐसे फ़ोन कॉल का काफ़ी तजुर्बा है. वो ऐसे मामलों से दिन-रात जूझती रही हैं.
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    कई बार प्रीति के पास ऐसे बाल विवाह रोकने के लिए बहुत कम वक़्त होता है. वो अक्सर इलाक़े में अपनी सफ़ेद स्कूटी पर भाग-दौड़ करती दिख जाती हैं..

    फ़ोन पर बात करते हुए उस दिन प्रीति ने पहले मोनिका का भरोसा जीता और उसे समझाया कि आगे क्या होने वाला है.

    प्रीति ने स्थानीय पुलिसवालों को जुटाया और शाम के क़रीब 5 बजे मोनिका के घर जा पहुंची. अधिकारियों ने काग़ज़ात मांगे. वो तो परिवार के पास थे नहीं. फिर उन्होंने मोनिका के परिजनों को आगाह किया कि वो ये शादी नहीं कर सकते क्योंकि बच्ची की उम्र अभी शादी के लायक नहीं हुई.

    लेकिन, परिजनों ने इस चेतावनी को अनसुना कर दिया. चुपके से शादी करने के लिए उन्होंने शादी को गणेश के बजाय उसकी मां के घर में करने का फ़ैसला किया.

    मोनिका ने फिर से प्रीति को फ़ोन किया. तब प्रीति एक महिला सिपाही के साथ मौक़े पर पहुंचीं. उस वक़्त रात के दस बज रहे थे.

    प्रीति उस दिन को याद करते हुए बताती हैं, 'हम बिल्कुल सही वक़्त पर पहुंचे थे. मोनिका अपनी शादी के जोड़े में थी. हमें देखते ही वो मुस्कुराई. उसे पता था कि हम उसकी शादी रोकने के लिए आए हैं. वो ख़ुश हो गई थी.'

    शादी के लिए जुटे बाक़ी लोग हैरान थे. रिश्तेदार दूर-दूर से आए थे. वो ख़ुसर-पुसर करके आपस में पूछ रहे थे कि आख़िर प्रशासन को किसने इस शादी की ख़बर दी.
    किसी को नहीं पता था कि ये काम मोनिका ने ही किया था. आज मोनिका खुलकर ये बात सबको बताती है कि उसी ने वो ख़ुफ़िया फ़ोन कॉल की थी.

    इसके बाद प्रीति और पुलिसवालों ने मिलकर गणेश और सीता को समझाया कि बाल विवाह उनकी बेटी के लिए कितना ख़तरनाक है.

    ख़ुद उन्हें भी जेल जाना पड़ सकता है. क्योंकि वो बेटी को शादी की क़ानूनन उम्र 18 साल के पहले ब्याह रहे थे.

    प्रीति बताती हैं कि दूसरी बार चेतावनी देने पर वो मान गए और मोनिका की शादी कैंसिल कर दी.

    वो बताती हैं कि इस साल जनवरी से अब तक वो 20 से 25 बाल विवाह रोक चुकी हैं.

    स्रोत : यूनिसेफ

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    यूनिसेफ़ के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में भारत में सबसे ज़्यादा बाल विवाह होते हैं. इसके बाद बांग्लादेश और नीज़ेर का नंबर आता है. भारत में 2006 में ही बाल विवाह पर पाबंदी लगा दी गई थी. लेकिन इतनी बड़ी आबादी है कि बाल विवाह को पूरी तरह से रोक पाना अब तक मुमकिन नहीं हो सका है.
    भारत में 2006 में ही बाल विवाह पर पाबंदी लगा दी गई थी. लेकिन इतनी बड़ी आबादी है कि बाल विवाह को पूरी तरह से रोक पाना अब तक मुमकिन नहीं हो सका है.
    प्रीति ख़ुद को ऐसी बच्चियों की बड़ी बहन मानती हैं. वो बाल विवाह रोकने पर बहुत तसल्ली महसूस करती हैं. वो कहती हैं, 'मैंने अपने करियर में कई ऐसी शादियां रोकी हैं. जब मैं इन बच्चियों के संपर्क में आती हूं, तो हमेशा उनसे ताल्लुक़ बनाए रखना चाहती हूं. मुझे असली ख़ुशी तब होती है जब मैं उनकी ज़िंदगियां बर्बाद होने से बचाती हूं. उनका भविष्य संवारती हूं. इससे मुझे बहुत ख़ुशी मिलती है.'

    गांव के लोगो को राज़ी करने की चुनौती

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    थार के रेगिस्तान में स्थित हुसंगसार गांव में दोपहर का वक़्त हो चला है. धूप तेज़ है. बालू के टीलों के बीच रेत में सूरज की किरणें बहुत तेज़ी से चमक रही हैं.

    इस इलाक़े में ज़्यादातर घर झोपड़ियों जैसे हैं. घास-फूस से बने हुए. स्थानीय बच्चे एक स्कूल की इमारत में लगे नल से हाथ लगाकर पानी पी रहे हैं.

    बच्चियों के इस स्कूल के भीतर जब हमने उनसे पूछा कि क्या वो किसी ऐसी लड़की को जानते हैं जिसका बाल विवाह हुआ हो. कई लोग एक साथ एक लड़की का नाम लेते हैं.

    उसका नाम पूजा है. पूजा की शादी 10 साल की उम्र में ही कर दी गई थी.
    उसका नाम पूजा है. पूजा की शादी 10 साल की उम्र में ही कर दी गई थी.

    मोनिका की ही तरह पूजा की उम्र को लेकर भी गफ़लत है. स्कूल में वो उस कक्षा में है, जिसमें 14-15 बरस के बच्चे पढ़ते हैं. लेकिन वो बताती है कि उसकी उम्र इससे ज़्यादा है.

    पहले पहल तो वो अनजान चेहरों को देखकर हैरान होती है. मगर हौसला बढ़ाने पर पूजा अपने बारे में बात करने को राज़ी हो जाती है.

    " मेरा नाम पूजा है. मेरी शादी तीन साल पहले हो गई थी. लेकिन मैं अभी पढ़ाई कर रही हूं. मैं अभी ससुराल नहींं जाना चाहती. आगे पढ़ना चाहती हूं."
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    पूजा के मां-बाप अब उसका गौना टालने के लिए तैयार हो गए हैं

    इस रियायत की वजह से पूजा अपनी पढ़ाई पूरी कर पा रही है. उसे बचपन में ही मां बनने की मुश्किलों से भी नहीं जूझना पड़ा.

    पूजा कहती है कि बचपन में शादी करना ग़लत है. स्कूल के अध्यापक भी बताते हैं कि शादी के वक़्त लड़की की उम्र कम से कम 18 साल और लड़कों की उम्र 21 बरस होनी चाहिए.

    फिर पूजा जो बात आगे कहती है, वो बड़ी किताबी मालूम होती हैं. पूजा कहती हैं, 'लड़कियों को पढ़ाई करनी चाहिए. मैं ये बात गांव के सभी लोगों को समझाना चाहती हूं कि वो लड़कियों की जल्द शादी न करें. उनकी ज़िंदगी बर्बाद न करें. कोई अगर ज़बरदस्ती करता है, तो आप चाइल्डलाइन के नंबर 1098 पर फ़ोन करके इसकी इत्तिला दें. इससे बाल विवाह रोकने में मदद मिलेगी.'

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    स्कूल के बाहर क़रीब 3 सौ लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई है. इसमें ज़्यादातर स्कूली बच्चे हैं. मगर घूंघट ओढ़े कई महिलाएं और पगड़ी-साफ़ा बांधे कई मर्द भी भीड़ का हिस्सा हैं.

    ये सब यहां एक कठपुतली शो देखने के लिए जमा हुए हैं. इस कठपुतली शो की कहानी बाल विवाह की है, जिसमें एक बच्ची की बाल विवाह के बाद जल्द मां बनने की वजह से मौत हो जाती है.
    कठपुतली का ये शो उर्मुल ट्रस्ट की तरफ़ से हुआ था. इस कहानी को देखने के बाद बहुत से गांववाले आंसू पोंछते दिखे. वो भावुक हो गए थे.
    भीड़ को एक कोने से निहारते हुए अरविंद ओझा खड़े हैं. वो उर्मुल ट्रस्ट के संरक्षक हैं. ओझा कहते हैं कि लोगों पर असर हो रहा है. वो बाल विवाह के ख़िलाफ़ जागरूक हो रहे हैं.

    अरविंद ओझा 1986 से राजस्थान में काम कर रहे हैं. बाल विवाह के मामले में राजस्थान, बिहार और पश्चिम बंगाल के बाद तीसरे नंबर पर है.

    नेशनल फ़ैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक़, राजस्थान में 35 फ़ीसदी लड़कियों की 18 साल की उम्र से पहले ही शादी हो जाती है. जबकि राष्ट्रीय औसत 27 प्रतिशत का है. ओझा कहते हैं कि बच्चियों की पढ़ाई की वजह से माहौल बदल रहा है.

    "पहले लड़कियों की शादी की औसत उम्र 10-11 साल थी. अब ये बढ़कर 14-15 बरस हो गई है. मगर बहुत कुछ किया जाना बाक़ी है. कठपुतली शो से पहले पूजा की अगुवाई में सभी गांववालों ने हाथ उठाकर बाल विवाह न करने का प्रण लिया. आस-पास के 178 गांवों के लोग ये क़सम ले चुके हैं."

    अरविंद ओझा, उर्मुल ट्रस्ट

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    हुसंगसार से हम लुंकरणसार पहुंचे. यहां लड़कियों का एक बोर्डिंग स्कूल है. यहां कुछ बच्चियां नाच-गा रही थीं.

    राधिका नाम की एक युवती यहां पर संगीत और नाटक की क्लास चलाती है. राधिका की उम्र 20 से थोड़ी ही ज़्यादा होगी.
    17 साल की उम्र में राधिका का ब्याह तय हो गया था. मगर उसने बग़ावत कर दी. अब वो बाल विवाह के ख़िलाफ़ लोगों को जागरूक करती है.
    राधिका की कहानी भी मोनिका से काफ़ी मिलती-जुलती है.

    "मेरे मां-बाप ने उस वक़्त मेरी शादी तय कर दी, जब मेरी दो बड़ी बहनों की शादी हो रही थी. मैं डरी हुई थी. मैंने तय किया कि मुझे शादी नहीं करनी. मैं पढ़-लिखकर अपनी हसरतें पूरी करना चाहती थी. मुझे आज़ादी चाहिए थी. इसलिए मैंने शादी से इनकार कर दिया".

    राधिका स्वामी

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    राधिका की मां और दादी की शादी बचपन में ही हुई थी. इसलिए उसके लिए शादी को मना करना आसान नहीं था. लेकिन उसने पूरी ताक़त लगाकर अपने पिता और दादा से कह दिया था कि वो शादी नहीं करेगी. पढ़ाई जारी रखेगी. अब वो इस बोर्डिंग स्कूल के कैंपस में लड़कियों को पढ़ाती है. उन्हें पढ़ाई की अहमियत समझाती है.

    राधिका स्वामी ने अपनी किशोरावस्था में शादी करने से इनकार कर दिया था

    राधिका स्वामी ने अपनी किशोरावस्था में शादी करने से इनकार कर दिया था

    संगीत और नाटक के ज़रिए राधिका लोगों को जागरूक करती है. उसने लड़कियों की भ्रूण हत्या पर लिखा है. राजस्थान में बड़े पैमाने पर लड़कियों की भ्रूण हत्या हो जाती है.

    2011 की जनगणना के हिसाब से राजस्थान में हर एक हज़ार लडकों पर सिर्फ़ 888 लड़कियां हैं. इतना बिगड़ा हुआ सेक्स अनुपात होने की वजह से ही राज्य में बाल विवाह के इतने मामले होते हैं.

    राधिका को लगता है कि बाल विवाह रोकने के लिए लड़कों को इस मुहिम से जोड़ना ज़रूरी है. क्योंकि लड़कियों की बात अनसुनी कर दी जाती है. यही बात जब लड़के करेंगे, तो उनकी ज़रूर सुनी जाएगी.

    बाल विवाह पूरी दुनिया की समस्या है

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    दुनिया भर में हर साल क़रीब सवा करोड़ लड़कियों की शादी 18 साल से कम उम्र में कर दी जाती है.

    एक दशक पहले ये आंकड़ा और ज़्यादा था. लेकिन यूनिसेफ़ के मुताबिक़ पिछले कुछ सालों में बाल विवाह के मामलों में काफ़ी कमी आई है. दक्षिण एशिया में बाल विवाह के मामले 20 फीसदी कम हो गए हैं. ख़ास तौर पर भारत सब देशों के लिए मिसाल बना है.

    बाल विवाह के ख़िलाफ़ अभियान चलाने वाले लोग कहते हैं कि दक्षिण एशिया की कामयाबी को अफ्रीका में दोहराए जाने की ज़रूरत है. आज भी अफ्रीकी देश नीज़ेर में सबसे ज़्यादा बाल विवाह होते हैं. यहां 76 फ़ीसदी लड़कियों की शादी 18 साल से कम उम्र में ही हो जाती है.

    स्रोत : यूनिसेफ

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    बाल विवाह के ख़िलाफ़ अभियान चलाने वाले लोग कहते हैं कि दक्षिण एशिया की कामयाबी को अफ्रीका में दोहराए जाने की ज़रूरत है. आज भी अफ्रीकी देश नीज़ेर में सबसे ज़्यादा बाल विवाह होते हैं. यहां 76 फ़ीसदी लड़कियों की शादी 18 साल से कम उम्र में ही हो जाती है.
    ऐसी प्रथाओं की कई वजहें हैं. मोनिका के मामले में तो वजह ग़रीबी थी. लेकिन, बाल विवाह की बड़ी वजह लड़कों और लड़कियों में फ़र्क़ की सोच है.
    गर्ल्स नॉट फॉर ब्राइड नाम की संस्था से जुड़ी हुईं लक्ष्मी सुंदरम कहती हैं कि लड़कियों को लड़कों से कमतर समझा जाता है.

    "लड़कियों को बराबरी के मौक़े नहीं मिलते. अगर कोई परिवार सिर्फ़ एक बच्चे को पढ़ा सकता है, तो वो लड़के को ही स्कूल भेजता है. इसी तरह आमदनी कम होने पर लड़की को ब्याह कर उससे छुटकारा पा लिया जाता है." वो आगे कहती हैं.

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    दुनिया भर के आंकड़े बताते हैं कि बाल विवाह के ज़्यादा मामले गांवों में होते हैं. इसी बड़ी वजह तालीम की कमी है.

    लक्ष्मी सुंदरम कहती हैं कि अगर कोई लड़की स्कूल में है, तो लोग ये सोचते हैं कि एक बच्चा स्कूल में है. इसे पढ़ने दिया जाना चाहिए. लेकिन जैसे ही वो स्कूल से बाहर आती है, लोगों को उसमें भावी पत्नी और मां दिखने लगती है. मां-बाप सोचते हैं कि हम आख़िर किस बात का इंतज़ार कर रहे हैं? इसका जल्दी से जल्दी ब्याह कर देते हैं.
    बहुत से देशों में क़ानून बनाकर 18 साल से कम उम्र में लड़कियों की शादी को ग़ैरक़ानूनी क़रार दे दिया गया है. लेकिन कई जगह मां-बाप की मंज़ूरी से इससे कम उम्र में भी शादी की इजाज़त है.

    बहुत से देशों में क़ानून बनाकर 18 साल से कम उम्र में लड़कियों की शादी को ग़ैरक़ानूनी क़रार दे दिया गया है. लेकिन कई जगह मां-बाप की मंज़ूरी से इससे कम उम्र में भी शादी की इजाज़त है.

    कई देशों में बाल विवाह रोकने के लिए आर्थिक मदद भी दी जाती है. कई बार इसमें तकनीक से भी मदद मिलती है. जैसे कि विकल्प संस्थान नाम का एक एनजीओ, फ़ोन पर मैसेज भेजकर लोगों को आगाह करता है कि वो बाल विवाह में शामिल हुए तो जेल जाना पड़ सकता है.

    कुल मिलाकर बाल विवाह के ख़िलाफ़ एक माहौल तो बन रहा है. इससे घरेलू हिंसा में भी कमी आई है. कम उम्र में मां बनने की मुश्किलें भी कम हुई हैं.

    “लड़कियों को लड़कों से कमतर समझा जाता है”

    “लड़कियों को लड़कों से कमतर समझा जाता है”

    सुंदरम कहती हैं कि दुनिया भर में बाल विवाह के मामले कम हो रहे हैं. लेकिन आबादी बढ़ने की वजह से इनकी संख्या ज़्यादा कम मालूम होती है. इसलिए हमें ज़रा भी ढिलाई बरतने की ज़रूरत नहीं.

    मोनिका का भविष्य

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    जब ये ख़बर फैली कि मोनिका से मिलने लंदन से बीबीसी की टीम आ रही है, तो उसके घर के बाहर अच्छी ख़ासी भीड़ जमा हो गई. किसी ने पूछा कि क्या वो इसीलिए आ रहे हैं क्योंकि शादी टल गई थी? बस इसी सवाल से आपको समझ में आ जाता है कि मोनिका ने कितना बड़ा क़दम उठाया था.

    ये अजीबो-ग़रीब लगा कि मोनिका की मां अपनी बेटी से नाराज़ नहीं. बल्कि सीता को अपनी बेटी पर फ़ख़्र है. सीता कहती हैं कि उन्हें बहुत ख़ुशी है कि उनकी बेटी ने ऐसा किया. ये बदलाव सब के लिए आया है.

    ये अजीबो-ग़रीब लगा कि मोनिका की मां अपनी बेटी से नाराज़ नहीं. बल्कि सीता को अपनी बेटी पर फ़ख़्र है. सीता कहती हैं कि उन्हें बहुत ख़ुशी है कि उनकी बेटी ने ऐसा किया. ये बदलाव सब के लिए आया है.

    अच्छी बात ये है कि राजस्थान में मोनिका जैसी लड़कियां बाल विवाह के ख़िलाफ़ मुहिम को अपने हाथ में ले रही हैं. आज से 10-20 साल पहले ऐसा सोचना भी मुमकिन नहीं था. लगता है कि बदलाव वाक़ई आ रहा है.

    अच्छी बात ये है कि राजस्थान में मोनिका जैसी लड़कियां बाल विवाह के ख़िलाफ़ मुहिम को अपने हाथ में ले रही हैं. आज से 10-20 साल पहले ऐसा सोचना भी मुमकिन नहीं था. लगता है कि बदलाव वाक़ई आ रहा है.

    लेकिन, मोनिका की आगे की ज़िंदगी बड़ी अनिश्चित है. वो उत्साह से ये तो कहती है कि वो पढ़ना चाहती है. लेकिन फ़िलहाल उसकी पढ़ाई रुकी हुई है. अब प्रीति यादव उनकी नई दोस्त बन गई हैं, जो उनकी पढ़ाई का इंतज़ाम करने में लगी हैं.

    एक बचपन जो ख़त्म होने ही वाला था, एक लड़की की बग़ावत से फिर से नई उम्मीद के हौसले से भर गया है.