टोक्यो ओलंपिक : जानिए भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ियों को

भारतीय महिला हॉकी टीम विश्व रैंकिंग में लगातार एशिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों में से एक रही है. टीम ने 1982 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था. इसके बाद 2004 और 2017 में दो बार एशिया कप ख़िताब अपने नाम किए हैं, साथ ही 2016 में एशियाई चैम्पियंस ट्रॉफ़ी भी जीती थी. इस टीम ने 2002 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक हासिल किया था. टोक्यो 2020 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही टीम में कौन-कौन सी खिलाड़ी शामिल हैं और वे किस स्थान पर खेलती हैं?

ओलंपिक खेलों में महिला हॉकी प्रतियोगिता को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) ने पहली बार 1980 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों में शामिल किया था.

भारतीय महिला हॉकी टीम ने 1980 के ओलंपिक के बाद 2016 रियो ओलंपिक खेलों में 36 साल बाद हिस्सा लिया. तब टीम ग्रुप मुक़ाबलों में ही बाहर हो गयी थी. टोक्यो ओलंपिक में टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही है लेकिन ओलंपिक में दमख़म दिखाने वाली ये खिलाड़ी कौन हैं, जानने के लिए स्क्रॉल करें.

गोलकीपर

सविता

गोलकीपर
सविता

30 साल की सविता भारतीय टीम की गोलकीपर हैं. इन्होंने 18 साल की उम्र में अपना डेब्यू किया था और बीते 12 सालों में भारत के लिए 100 से ज़्यादा मैचों में हिस्सा ले चुकी हैं. वह टीम की सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में एक हैं.

टीम के अधिकांश खिलाड़ियों की तरह सविता भी हरियाणा के हिसार की हैं. इन्हें 2018 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. पहले सविता की दिलचस्पी खेलों में नहीं थी लेकिन दादाजी के मार्गदर्शन से उन्हें कामयाबी मिलती रही. सविता को 2017 में एफ़आईएच के वीमेंस वर्ल्ड लीग राउंड 2 में टूर्नामेंट का गोलकीपर आंका गया था.

2018 के एशियाई खेलों में सिल्वर मेडल की जीत उनके जीवन के पसंदीदा क्षणों में शामिल है. सविता कहती हैं, "हमलोगों ने अधिकांश चीज़ें पांच साल पहले रियो ओलंपिक में सीखी थीं. अब उससे आगे बढ़ते हुए भारतीय महिला हॉकी के लिए इतिहास बनाने की कोशिश करेंगे."

डिफ़ेंडर

दीप ग्रेस एक्का

डिफ़ेंडर
दीप ग्रेस एक्का

ओडिशा में जन्मीं 27 साल की दीप ग्रेस एक्का टोक्यो में अपना दूसरा ओलंपिक खेल रही हैं और टीम की उप कप्तान हैं.

दो ओलंपिक में हिस्सा लेने वाली वह ओडिशा की पहली खिलाड़ी हैं. वह 2013 में महिला जूनियर हॉकी विश्वकप जीतने वाली टीम में शामिल थीं और उसके तुरंत बाद उन्हें उसी साल सीनियर टीम के लिए बुलावा मिल गया था. वह उन खिलाड़ियों में शामिल हैं जो भारत के लिए 200 से ज़्यादा मैच खेल चुकी हैं. कोर (एक्सरसाइज) और रनिंग उनका पसंदीदा वर्कआउट है.

"मैं सौभाग्यशाली हूं कि मुझे अपने देश के लिये वहां जाकर खुशी और सम्मान लाने का मौका मिला और वो भी ऐसा करके जिसे मैं सचमुच पसंद करती हूं. मैं स्वर्ण पदक लाने के लिये 100 प्रतिशत दूंगी."

निक्की प्रधान

डिफ़ेंडर
निक्की प्रधान

झारखंड में जन्मीं 27 साल की निक्की प्रधान ने अपना अंतरराष्ट्रीय पदार्पण 2016 में किया था जिसके बाद से ही वह भारतीय टीम का अहम हिस्सा बनी हुई हैं.

झारखंड से हालांकि कई पुरूष हॉकी खिलाडी ओलंपिक में खेले हैं, पर 36 साल बाद जब भारतीय महिला टीम ने 2016 रियो ओलंपिक का टिकट हासिल किया तब वह झारखंड (खुंटी ज़िले) से ओलंपिक में हिस्सा लेने वाली पहली महिला हॉकी खिलाड़ी बनी.

पुलिसकर्मी की बेटी निक्की ने अपने गांव में हॉकी खेलना शुरू किया और अब वह भारत के लिए 100 से भी ज्यादा मैच खेल चुकी हैं. एफ़आईएच ओलंपिक क्वालिफ़ायर में अमेरिका के ख़िलाफ़ भारत के अभियान में उन्होंने काफ़ी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी, इसके बाद भारत ने अंत में क्वालिफ़ाई कर लिया था. वह कहती हैं, "किसी भी खिलाड़ी के लिए ओलंपिक एक रोमांचक टूर्नामेंट है. दोबारा से इसका हिस्सा होने से मैं काफ़ी रोमांचित हूं. मैं जिन भी मैचों में खेलूंगी उनमें अपना शत प्रतिशत देने को लेकर उत्साहित हूं."

गुरजीत कौर

डिफ़ेंडर
गुरजीत कौर

टोक्यो में गुरजीत कौर अपना पहला ओलंपिक खेल रही हैं. टीम में उनकी दोहरी भूमिका है, वे डिफ़ेंडर के साथ साथ ड्रैग फ़्लिकर भी हैं. पंजाब में पाकिस्तान की सीमा पर लगे गांव में जन्मीं गुरजीत कौर ने स्कूल से ही हॉकी खेलना शुरू कर दिया था, जल्दी ही उन्हें इस खेल में आनंद मिलने लगा. शुरुआती दौर में उन्हें ड्रैग फ़्लिक के बारे में ज़्यादा पता नहीं था. मार्गदर्शन मिलने और अभ्यास के दम पर आज उनकी गिनती महिला हॉकी के सर्वश्रेष्ठ ड्रैग फ़्लिकरों में होती है. 2019 में भारत ने जब जापान में आयोजित एफ़आईएच वीमेंस सिरीज़ फ़ाइनल में गोल्ड मेडल जीता था तब गुरजीत सबसे ज़्यादा गोल करने वाली खिलाड़ी थीं.

बीबीसी को दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अगर भारतीय महिला टीम ओलंपिक में कोई मेडल जीतती है तो यह टीम की सभी खिलाड़ियों के लिए शानदार पल होने के साथ साथ ऐतिहासिक मौका भी होगा.

उदिता

डिफ़ेंडर
उदिता

डिफ़ेंडर उदिता भारत के लिये कुल 32 मैच खेल चुकी हैं. हरियाणा में जन्मीं उदिता ने 2017 में सीनियर टीम में डेब्यू किया. उदिता 2018 की एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने वाली टीम में भी शामिल थीं.

उदिता ने अपना खेल करियर बतौर हैंडबॉल खिलाड़ी शुरू किया था लेकिन छह साल पहले ही वह हॉकी में आयीं और इस फ़ैसले ने उनकी ज़िंदगी बदल दी.

टोक्यो ओलंपिक शुरू होने से पहले उन्होंने कहा था, "मैं पिछले कुछ समय से भारतीय टीम के साथ हूं और मैं टोक्यो में भारतीय टीम की जीत में बड़ा योगदान करना चाहती हूं."

निशा

मिडफ़ील्डर
निशा

2019 में अपना डेब्यू करने वाली निशा भारतीय टीम की नयी खिलाड़ी हैं. इसके बाद से उन्होंने ज़्यादा मैच खेलने का मौका नहीं मिला क्योंकि कोरोना महामारी के चलते अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट आयोजित नहीं हो सके. वह 2021 में भारतीय टीम के साथ अर्जेंटीना दौरे पर गयी थीं.

उनका पसंदीदा क्षण करियर शुरू करने वाला पहला 'ऑफ़र' लेटर मिलना है. हरियाणा के सोनीपत में जन्मीं निशा के पिता एक दर्जी हैं जिन्होंने बेटी के भारत की ओर से खेलने का सपना देखा था. निशा और साथी खिलाड़ी नेहा दोनों की मां एक ही फैक्ट्री में काम करती थीं और दोनों एक साथ ही अभ्यास किया करती थीं.

नवजोत कौर

मिडफ़ील्डर
नवजोत कौर

हरियाणा के कुरूक्षेत्र में जन्मीं मिडफ़ील्डर नवजोत कौर ने अंडर-19 जूनियर एशिया कप में शानदार प्रदर्शन के बूते 2012 में अपना डेब्यू किया था.

वह कोरिया में 17वें एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा थीं. नवजोत कहती हैं कि उनके माता-पिता उनके प्रत्येक फ़ैसले में उनके साथ खड़े रहे, विशेषकर उनके पिता, जिन्होंने स्कूल में उन्हें खेलों में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित किया था. यह नवजोत का दूसरा ओलंपिक है.

मोनिका

मिडफ़ील्डर
मोनिका

हरियाणा से निकलीं 27 साल की यह मिडफ़ील्डर बड़े मौकों पर भारतीय टीम का हिस्सा रही हैं. मोनिका 2016 में एशियाई चैम्पियंस ट्राफ़ी में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम की सदस्य थीं. उन्हें ओलंपिक का अनुभव पहले से है, 2016 का रियो ओलंपिक में भी वह टीम का हिस्सा रहीं थीं.

वह कहती हैं, "ओलंपिक किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी प्रतियोगिता है और बड़े मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना बहुत सम्मान की बात है. टीम की सीनियर खिलाड़ी होने के नाते यह सुनिश्चित करना मेरी ज़िम्मेदारी है कि जूनियर खिलाड़ियों को जल्द से जल्द परिस्थितियों से सहज कराया जाये और वे पहले ही मैच से अपना सर्वश्रेष्ठ खेलने लगें." मोनिका कहती हैं कि खेलों में उनकी सबसे पसंदीदा याद भारत के लिए पहली बार खेलने वाला दिन है.

पी सुशीला चानू

मिडफ़ील्डर
पी सुशीला चानू

ओलंपिक खेलों में महिला हॉकी के शुरू होने के 36 साल बाद भारतीय टीम ने 2016 में रियो ओलंपिक खेलों के लिए क्वालिफ़ाई किया तब सुशीला चानू भारतीय टीम की कप्तान थीं.

भारतीय रेलवे में जूनियर टिकट चेकर से लेकर भारतीय टीम की कप्तानी तक का सफ़र उल्लेखनीय रहा है. पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर की चानू 2013 में जूनियर वर्ल्ड कप में कांस्य पदक जीतने वाली टीम की भी कप्तान थीं.

29 साल की सुशीला चानू टीम की सबसे अनुभवी मिडफ़ील्डर हैं और वह पिछले कुछ सालों में आयोजित सभी बड़े टूर्नामेंटों में भारतीय टीम का हिस्सा रही हैं. वह 2014 के एशियाई खेल और 2017 के एशिया कप में गोल्ड मेडल जीतने वाली टीम का भी हिस्सा रही हैं.

सलीमा टेटे

मिडफ़ील्डर
सलीमा टेटे

सलीमा टेटे महज 19 साल की है और अब तक भारत के लिए 29 मैच खेल चुकी हैं. निक्की प्रधान के बाद वह महिला ओलंपिक में हिस्सा लेने वाली झारखंड की दूसरी खिलाड़ी हैं.

सलीमा 2018 के यूथ ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाली भारतीय टीम की कप्तान थीं और इस कामयाबी को वह अब तक की सबसे पसंदीदा याद बताती हैं.

टोक्यो ओलंपिक से पहले सलीमा टेटे ने कहा था, "ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करना अभी भी सपने जैसा लग रहा है. लेकिन मैं चुनौतियों को भी समझ रही हूं क्योंकि यह हॉकी में सबसे उच्च स्तर की प्रतियोगिता है. मेरा पूरा दिमाग़ अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाने पर केंद्रित है."

नेहा

मिडफ़ील्डर
नेहा

24 साल की नेहा गोयल 2011 में जूनियर टीम में शामिल हुईं और 2014 में सीनियर टीम में जगह बनाने में कामयाब रहीं.

उनका पहला गोल 2017 महिला हॉकी एशिया कप में चीन के ख़िलाफ़ था.

नेहा ने बीबीसी को बताया, "मेरे पिता शराब पीने के आदी थे और घर का माहौल भी अच्छा नहीं था. मैंने हॉकी खेलना इसलिए शुरू किया क्योंकि मुझे बताया गया था कि मुझे जूते और कपड़े मुफ़्त में मिलेंगे. मेरे कोच ने मेरा हौसला बढ़ाया और आर्थिक रूप से मेरी मदद की. मेरे पिता के निधन के बाद, मेरी माँ फैक्ट्री में काम किया करती थी और मेरी बहन और मैं घर के कामों में उनकी मदद किया करते थे."

नेहा पहली बार ओलंपिक में हिस्सा ले रही हैं. वो कहती हैं, "मैं भारतीय ओलंपिक टीम का हिस्सा बनकर बहुत उत्साहित हूँ. हम पिछले पाँच साल से ओलंपिक की तैयारी कर रहे हैं और हम बहुत खुश हैं कि आखिरकार वो घड़ी आ गई है. हमारी योजना तैयार है, बस हमें अपनी इस योजना के मुताबिक अपनी पूरी काबिलियत से खेलना है."

फ़ारवर्ड

रानी

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रानी

रानी भारतीय हॉकी महिला टीम की कप्तान हैं. 2020 में वह प्रतिष्ठित 'वर्ल्ड गेम्स एथलीट ऑफ द ईयर' पुरस्कार हासिल करने वाली पहली हाकी खिलाड़ी बनीं.

वह 15 साल की उम्र में 2010 विश्व कप में खेलने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बनी थीं. इसके बाद से ही वह भारतीय टीम की सदस्य हैं. उनके पिता हरियाणा के एक गांव में घोड़ा गाड़ी चलाते थे. जब वह हॉकी खेलना चाहती थी तो शुरू में उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से विरोध का सामना भी करना पड़ा, लेकिन जल्द ही उनके प्रदर्शन ने उनका साथ देना शुरू किया और वह हॉकी टीम की सदस्य बन गयीं. उन्हें 'बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमैन ऑफ़ द ईयर 2020' पुरस्कार के लिये भी नामांकित किया गया था.भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से भी सम्मानित है.

रानी रामपाल उन खिलाड़ियों में से एक रहीं जिन्होंने 2019 में अमेरिका को 6-5 से हराने में भारतीय टीम के लिए गोल किया जिससे टीम ने ओलंपिक के लिए क्वालिफ़ाई किया.

शर्मिला देवी

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शर्मिला देवी

टोक्यो 2020 ओलंपिक से दो साल पहले शर्मिला देवी ने 2019 में सीनियर टीम के लिए अपना डेब्यू किया. नौ मैचों के बाद वह ओलंपिक खेल रही हैं.

हरियाणा के हिसार की 19 वर्षीय शर्मिला को भारतीय टीम के लिए 'सरप्राइज पैकेज' माना जा रहा है. शर्मिला उस टीम का भी हिस्सा थीं जिसने एफ़आईएच हॉकी में अमेरिका को पराजित किया था. उन्होंने 2019 में एफ़आईएच हॉकी ओलंपिक क्वालिफ़ायर में अमेरिका के ख़िलाफ़ भारत के पहले मैच में एक गोल करने में अहम भूमिका अदा की थी.

ओलंपिक से पहले उन्होंने कहा था, "मुझे पूरा भरोसा है कि टोक्यो ओलंपिक एक रोमांचकारी अनुभव होगा और मैं खेलों के सबसे बड़े मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का बेसब्री से इंतज़ार कर रही हूं."

वंदना कटारिया

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वंदना कटारिया

भारतीय टीम की अग्रिम पंक्ति का हिस्सा हैं 29 साल की वंदना जो खुद को टेनिस स्टार रोज़र फ़ेडरर की प्रशंसक बताती हैं.

वह 2013 के जूनियर महिला विश्व कप में भारत की ओर से सबसे ज़्यादा गोल करने वाली खिलाड़ी रहीं. इसके बाद में उन्होंने भारतीय टीम में जगह बनायी और रियो ओलंपिक में टीम के साथ थीं.
उत्तर प्रदेश की यह खिलाड़ी अब तक 200 से ज़्यादा मैच खेल चुकी है और वह टीम की अनुभवी स्ट्राइकरों में से एक हैं.

वंदना उस टीम का भी हिस्सा थीं जिसने 2016 एशियाई चैम्पियंस ट्राफ़ी में स्वर्ण पदक जीता था लेकिन वह 2013 में जूनियर महिला विश्व कप की जीत को अपना पसंदीदा क्षण मानती हैं.

लालरेमसियामी

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लालरेमसियामी

लालरेमसियामी ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेने वाली मिज़ोरम की पहली महिला हॉकी खिलाड़ी हैं. 21 साल की लालरेमसियामी का जन्म मिज़ोरम के कोलासिब में हुआ और वहीं वह पली बढ़ीं. इन्हें 2019 में एफ़आईएच ने 'वीमेन राइजिंग स्टार ऑफ़ द ईयर' अवार्ड से सम्मानित किया था. इन्हें सियामी निकनेम से भी लोग जानते हैं.

ये 2018 के एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने वाली टीम में शामिल थीं. 2019 में ओलंपिक क्वालिफ़ायर के सबसे अहम सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले से पहले लालरेमसियामी को अपने पिता के निधन की ख़बर मिली. दुख के पलों में भी वह मैदान में उतरीं और सुनिश्चित किया कि भारतीय टीम ओलंपिक क्वालिफ़ाई कर सकती है. एशियाई खेलों में मेडल जीतने वाली भी वह मिज़ोरम की पहली पहली खिलाड़ी हैं.

टोक्यो ओलंपिक से पहले उन्होंने कहा था, "ओलंपिक को लेकर मैं हमेशा ही उत्सुक रही हूं और आख़िकार मुझे ओलंपिक में खेलने का मौका मिल ही गया."

नवनीत कौर

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नवनीत कौर

25 साल की नवनीत कौर भारत की ओर से अबतक 79 मैच खेल चुकी हैं, उन्हें भारतीय टीम का सबसे प्रभावी खिलाड़ियों में गिना जाता है. हरियाणा की नवनीत कौर 2013 में जर्मनी में आयोजित जूनियर वीमेंस हॉकी वर्ल्ड कप में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं. नवनीत 2019 में एफ़आईएच सिरीज़ फ़ाइनल और ओलंपिक क्वालिफ़ायर में जीत हासिल करने वाली टीम में भी शामिल रहीं.

टोक्यो ओलंपिक से पहले नवनीत ने कहा था, "हमारा इंतज़ार पूरा हो गया. इसका लंबे समय से इंतज़ार था और अब ये शुरू हो गया. हम सबने इसकी काफ़ी मेहनत की है."