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शुक्रवार, 05 जून, 2009 को 15:30 GMT तक के समाचार
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ब्लूस्टारः इतिहास की साक्षी तारीखें
ऑपरेशन ब्लूस्टार

भारत के आज़ादी के बाद के इतिहास की चर्चा शायद ही कभी ऑपरेशन ब्लूस्टार का ज़िक्र किए बिना पूरा हो.

ऑपरेशन ब्लूस्टार के पीछे जो बातें सबसे अहम रही हैं, उनमें पंजाब की स्वायत्तता का सवाल और सिखों के धार्मिक अधिकारों के कारण उनकी भावनाओं का उग्र होकर सामने आना मूल कारण रहा है.

इसकी कुछ अहम तारीखों को देखें तो हम ऑपरेशन ब्लूस्टार के क्रम को समझ पाने में सक्षम हो सकेंगे.

वर्ष 1973- आनंदपुर साहिब प्रस्ताव पारित. प्रस्ताव में केंद्र को विदेश मामलों, मुद्रा, रक्षा और संचार सहित केवल पाँच दायित्व अपने पास रखते हुए बाकी के अधिकार राज्य को देने और पंजाब को एक स्वायत्त राज्य के रूप में स्वीकारने संबंधी बातें कही गईं.

वर्ष 1977- जरनैल सिंह भिंडरावाले सिखों की धार्मिक प्रचार की प्रमुख शाखा, दमदमी टकसाल के प्रमुख चुने जाते हैं और अमृत प्रचार अभियान शुरू करते हैं.

अप्रैल, 1978- अखंड कीर्तनी जत्थे, दमदमी टकसाल और निरंकारी सिखों के बीच अमृतसर में संघर्ष, 13 सिखों की मौत.

जून, 1978- अकाल तख़्त साहिब ने सिखों के संत निरंकारी पंथ के ख़िलाफ़ हुक़्मनामा जारी किया.

अक्टूबर, 1978- लुधियाना में 18वीं अखिल भारतीय अकाली सम्मेलन का आयोजन जिसमें अनंदपुर साहिब प्रस्ताव पर एक लचीला रुख अपनाते हुए दूसरा प्रस्ताव पारित किया गया.

सितंबर, 1979- अकाली दल में विभाजन, दो अलग धड़े. पहले धड़े का नेतृत्व हरचंद सिंह लोंगवाल और प्रकाश सिंह बादल संभालते हैं जबकि दूसरा धड़ा जगदेव सिंह तलवंडी और तत्कालीन एसजीपीसी अध्यक्ष गुरचरण सिंह तोहड़ा के नेतृत्व में आता है.

अप्रैल, 1980- निरंकारी पंथ के प्रमुख गुरबचन सिंह पर छठा और अंतिम जानलेवा हमला, जिस वक़्त वो दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय आ रहे थे. हमले में गुरबचन सिंह की मौत.

खालिस्तान का परचम

मार्च, 1981- एक नए स्वायत्त खालिस्तान का झंडा पंजाब स्थित अनंदपुर साहिब पर फहरा दिया जाता है.

सितंबर, 1981- हिंद समाचार समूह के प्रमुख जगत नारायण की हत्या. जरनैल सिंह भिंडरावाले का इस मामले में आत्मसमर्पण. उन्हें हिरासत में लिया जाता है और जेल भेज दिया जाता है.

ऑपरेशन ब्लूस्टार
भिंडरावाले अपने मक़सद के लिए हिंसा के रास्ते को भी सही मानते थे

इसी महीने दल खालसा के गजिंदर सिंह और सतनाम सिंह पौंटा सहित पांच सदस्य श्रीनगर से दिल्ली आ रहे इंडियन एयरलाइंस के विमान को हाईजैक करके लाहौर ले जाते हैं. उनकी ओर से नकद रक़म और भिंडरावाले को जेल से बाहर करने की मांग रखी जाती है.

अक्टूबर, 1981- जरनैल सिंह भिंडरावाले को जेल से रिहाई मिल जाती है.

इसी महीने शिरोमणि अकाली दल और दिल्ली की केंद्र सरकार के बीच पहले दौर की बातचीत होती है जिसमें शिरोमणि अकाली दल लचीला रुख अपनाकर अपनी मांगों को 45 से घटाकर 15 कर देता है. इन मांगों में एक अहम मांग होती है भिंडरावाले की बिना शर्त रिहाई.

अप्रैल, 1982- शिरोमणि अकाली दल और केंद्र सरकार के बीच तीसरे दौर की बातचीत. बातचीत को अकाली दल की ओर से विफल करार दिया जाता है.

इसी महीने शिरोमणि अकाली दल अपने विरोध को आगे बढ़ाते हुए यमुना-सतलुज परियोजना का ज़ोरदार विरोध करने का फैसला लेता है और नहर रोको मोर्चा खोलता है.

जुलाई, 1982- भिंडरावाले अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर परिसर में गुरुनानक निवास के कमरा नंबर 47 में आ जाते हैं.

हाईजैक, हत्याएं, हिंसा... सुलगा पंजाब

अगस्त, 1982- अकाली दल की ओर से धर्म युद्ध मोर्चा की घोषणा.

इसी महीने दिल्ली से श्रीनगर जा रहे एक 126 यात्रियों वाले इंडियन एअरलाइंस विमान को हाईजैक कर लाहौर में उतारने की कोशिश होती है. लाहौर से इसकी इजाज़त नहीं मिलती और विमान अमृतसर में उतारा जाता है. अपहर्ता अमृतसर में गिरफ़्तार हो जाता है.

इसी महीने इंडियन एअरलाइंस का एक और विमान जोधपुर के रास्ते मुंबई से दिल्ली आते वक़्त हाईजैक किया जाता है. इसे भी लाहौर में उतारने की अनुमति न मिलने के बाद अपहर्ता अमृतसर में विमान उतारते हैं. अमृतसर हवाईअड्डे पर कमांडो कार्रवाई में सिख अपहर्ता मुसीबत सिंह की मौत.

नवंबर, 1982- दिल्ली में नौवें एशियाई खेलों के आयोजन के दौरान अकाली दल की ओर से विरोध का आहवान. कई सिख राजधानी में दाखिल होने की कोशिशों के दौरान पकड़े जाते हैं. कुछ प्रताड़ित भी किए जाते हैं. सिखों के उत्पीड़न के मामले मुख्यतः हरियाणा से सामने आते हैं.

अप्रैल, 1983- पंजाब पुलिस के डीआईजी अवतार सिंह अटवाल की अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के ठीक सामने हत्या हो जाती है.

जून- अगस्त, 1983- अकाली दल की ओर से रेल रोको और फिर काम रोको मोर्चा चलाया जाता है. आम जनजीवन और रेल यातायात इससे बुरी तरह प्रभावित होते हैं.

अक्टूबर, 1983- दरबारा सिंह के नेतृत्ववाली पंजाब की कांग्रेस सरकार को भंग कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया जाता है.

दिसंबर, 1983- भिंडरावाले अब अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर के गुरु नानक निवास से परिसर के सबसे अहम हिस्से यानी अकाल तख़्त साहिब में आ जाते हैं.

फ़रवरी, 1984- पंजाबी के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले मासिक, प्रीतलारी के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार सुमित सिंह शाम्मी की हत्या.

अप्रैल, 1984- पूर्व विधायक और अमृतसर में भाजपा प्रमुख हरबंस लाल खन्ना की उनके अंगरक्षक समेत गोली मारकर हत्या. अगले दिन शवयात्रा के दौरान हिंसा भड़कती है जिसमें आठ लोग मारे गए और नौ घायल हो गए.

इंदिरा गांधी
ऑपरेशन ब्लूस्टार के चार महीने बाद ही इंदिरा गांधी की हत्या हो गई

इसी सप्ताह हिंदू ब्राह्मण परिवार के एक पंजाबी भाषा के प्रोफ़ेसर विश्वनाथ तिवारी की उनकी पत्नी समेत हत्या कर दी गई. प्रोफ़ेसर विश्वनाथ तिवारी की पत्नी पंजाबी थीं.

दोनों गुटों, लोगंवाल और भिंडरावाले की ओर से पर्चे बांटकर एक दूसरे पर सिख संप्रदाय के नीचे गिरने का कारण बनने के आरोप लगाए जाते हैं.

मई, 1984- हिंद समाचार समूह के संपादक जगत नारायण की हत्या के बाद उनके बेटे रमेश चंद्र दायित्व संभाल चुके थे पर इस महीने उनकी भी जालंधर स्थित उनके कार्यालय में हत्या कर दी जाती है.

भारतीय सेना की कार्रवाई यानी ऑपरेशन ब्लूस्टार

06 जून, 1984- अमृतसर स्थित दरबार साहिब यानी स्वर्ण मंदिर परिसर में भारतीय सेना का प्रवेश.

सेना ने स्वर्ण मंदिर को चारों ओर से घेरा. भारी गोलाबारी और संघर्ष में सैकड़ों की मौत. मंदिर परिसर भी क्षतिग्रस्त. भिंडरावाले और लेफ्टिनेंट जनरल शाहबेग सिंह सहित कई प्रमुख लोगों की मौत.

इस पूरे अभियान को ऑपरेशन ब्लूस्टार का नाम दिया जाता है.

07-10 जून, 1984- देश के कई हिस्सों में सिख सैनिकों के विद्रोह की ख़बरें आती हैं.

सिख रेजीमेंट के क़रीब 500 सैनिक राजस्थान के गंगानगर ज़िले में ऑपरेशन ब्लूस्टार के बारे में सुनकर बग़ावत कर देते हैं. बिहार के रामगढ़, अलवर, जम्मू, थाणे और पुणे से भी विद्रोह होता है.

रामगढ़ में विद्रोही सैनिक अपने कमांडर, ब्रिगेडियर एससी पुरी की हत्या कर देते हैं.

जुलाई, 1984- भारत सरकार ऑपरेशन ब्लूस्टार पर एक श्वेतपत्र जारी करती है. पर सरकार को आलोचना की सुननी पड़ती हैं.

इंदिरा गांधी की हत्या... और सिख विरोधी दंगे

31 अक्टूबर, 1984- तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के दो सिख अंगरक्षकों, सतवंत सिंह और बेअंत सिंह ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी.

इंदिरा गांधी की हत्या के तुरंत बाद देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी दंगे भड़के और परिणामस्वरूप हज़ारों लोगों को अपनी जानें गंवानी पड़ीं.

जून, 1985- एअर इंडिया का विमान 182 आयरलैंड के पास नष्ट, 329 लोगों की मौत.

जुलाई, 1985- तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और हरचंद सिंह लोंगवाल ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए. चंडीगढ़ पंजाब को मिला.

अगस्त, 1985- एक गुरुद्वारे में भाषण देते वक़्त हरचंद सिंह पर हमला और उनकी हत्या.

सितंबर, 1985- अकाली दल पंजाब में चुनाव में भारी जीत हासिल करती है. सुरजीत सिंह बरनाला राज्य के नए मुख्यमंत्री बनते हैं.

जनवरी, 1986- स्वर्ण मंदिर यानी दरबार साहिब का नियंत्रण एक बार फिर से शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी को सौंप दिया जाता है.

ऑपरेशन ब्लूस्टार

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