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'बटला हाउस मुठभेड़' के ख़िलाफ़ प्रदर्शन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बटला हाउस मुठभेड़ की न्यायिक जाँच और चरमपंथ के नाम पर मुसलमानों की गिरफ़्तारी बंद करने की माँगों को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर में मुसलमानों ने प्रदर्शन किया है. गुरुवार को जंतरमंतर पर इस माँग को लेकर सरकार के ख़िलाफ़ हज़ारों लोगों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया. प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग आज़मगढ़ ज़िले से आए थे और उनके साथ दिल्ली के मुसलमान भी शामिल हुए. ग़ौरतलब है कि पिछले वर्ष सितंबर में बटला हाउस में हुई पुलिस मुठभेड़ में आज़मगढ़ ज़िले के ही दो लड़के मारे गए थे. इसके बाद आज़मगढ़ के कई लोगों को पुलिस ने गिरफ़्तार भी किया था. प्रदर्शन का आयोजन उत्तरप्रदेश के एक धार्मिक संगठन 'उलेमा काउंसिल' ने किया था. इस प्रदर्शन को दूसरे कई धार्मिक संगठनों ने भी समर्थन दिया. 'बुरा सलूक बंद हो'
उलेमा काउंसिल के संयोजक और इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे मौलाना आमिर रशादी मदनी ने कहा कि 'देश में मुसलमानों से साथ किया जाने वाला बुरा सलूक बंद किया जाना चाहिए' और 'चरमपंथ के नाम पर मुसलमान नौजवानों की गिरफ़्तारी' भी रोकनी चाहिए. उनका कहना था, "देश में सरकारी आतंकवाद नहीं चलेगा, हम देश में सिर्फ़ वोट डालने वाले की भूमिका में नहीं रहेंगे, बल्कि हम दिल्ली और लखनऊ में बैठी सरकारों को जगाने आए है. हमारी माँग है कि बटला हाउस मुठभेड़ की न्यायिक जाँच हो." रशादी मदनी की माँग थी, "पूरी मुस्लिम बिरादरी को दहशतगर्दी से जोड़ने का सिलसिला बंद किया जाना चाहिए और आतंकवादी कार्रवाइयों के नाम पर गिरफ़्तार मुस्लिम नवजवानों को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए." उनका का कहना था कि उलेमा कांउंसिल नए सियासी गठजोड़ पर भी बातचीत कर रहा है और लोकसभा चुनाव में आज़मगढ़ के दो लोकसभा क्षेत्रों से हर हाल में वह अपना उम्मीदवार खड़ा करेगा. उनका कहना था कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुई तो आने वालों दिनों में जेल भरो आंदोलन चलाया जाएगा. उन्होंने अपने भाषण में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा. प्रदर्शन में शामिल मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता क़ासिम रसूल इलियास का कहना था कि चरमपंथ के नाम पर भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए. छात्रों का समर्थन प्रदर्शन में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, जामिया मिल्लिया इस्लामिया और जामिया हमदर्द के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया. जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष संदीप ने माँग की कि देश में हुए तमाम बम धमाकों के हर पहलू की जाँच की जानी चाहिए ताकि हक़ीक़त का पता चल सके. प्रदर्शन के दौरान कई वक्ताओं ने ख़ूब जज़्बाती भाषण दिए. मौलाना महबूब आलम क़ासमी भी उनमें शामिल थे. उनका कहना था, "मुसलमानों को पहले सिर्फ़ वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था लेकिन अब उनके ख़ून का इस्तेमाल किया जा रहा है." बटला हाउस मुठभेड़ पर बोलते हुए कई वक्ताओं का कहना था कि वो नहीं कह रहे हैं कि उस मुठभेड़ में मारे गए दोनों लड़के बेकसूर ही हैं, लेकिन इसकी जाँच ठीक तरह से होनी चाहिए. उनका कहना था कि उन्हें सरकार पर भरोसा नहीं है और वो चाहते हैं कि इसकी न्यायिक जाँच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके. आज़मगढ़ से आए एक नौजवान मोहम्मद युसूफ़ से जब पूछा कि उनकी क्या माँग है, तो उनका का कहना था, "आतंकवाद ख़त्म हो यही हमारी माँग है, लेकिन इसके लिए सिर्फ़ मुसलमानों को निशाना नहीं बनाया जाए, बल्कि इंसाफ़ किया जाए." आज़मगढ़ से आए कई लोगों का कहना था कि देश में मुसलमानों के साथ हर स्तर पर भेदभाव किया जाता है और इस क्रम में आजकल आज़मगढ़ निशाने पर है. अंसार अहमद का कहना था, " हम अपना दर्द बयान करने के लिए दिल्ली आए हैं." ग़ौरतलब है कि बटला हाउस में हुई पुलिस मुठभेड़ को लेकर शुरु से ही सवाल उठते रहे हैं. कई मुस्लिम संगठनों, आम नागरिकों, मानवाधिकार संगठनों के साथ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पार्टी के नेता अर्जुन सिंह भी इसकी न्यायिक जाँच की माँग कर चुके हैं. लेकिन यह पहला मौक़ा था कि मुसलमानों ने इतनी बड़ी संख्या में इकट्ठे होकर दिल्ली में प्रदर्शन किया और इसके लिए लोग आज़गढ़ से भी यहाँ आए. कुल लोग इस प्रदर्शन को लोकसभा चुनावों से भी जोड़कर देख रहे हैं और उनकी राय है कि इसके पीछे चुनावी सौदेबाज़ी की मंशा भी हो सकती है. |
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