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मध्यप्रदेशः सांप्रदायिक तनाव के बाद कर्फ़्यू | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मध्यप्रदेश के शहर बुरहानपुर में गुरूवार की रात से जारी हिंदू-मुस्लिम तनाव के मद्देनज़र प्रशासन ने वहाँ अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया है. राज्य के इस दक्षिणी शहर में हिंदू मुस्लिम दंगों के दौरान तीन लोगों की मौत हो गई है जबकि पाँच पुलिसकर्मियों समेत 17 लोग ज़ख्मी हैं. पुलिस महानिरीक्षक संजीव कुमार सिंह ने बीबीसी से कहा कि मारे जाने वालों में से दो लोग तो पुलिस की गोलियों का शिकार हुए हैं मगर तीसरे व्यक्ति की मौत का कारण अभी पता नहीं चल पाया है. उन्होनें कहा कि घायलों में से कई लोगों को दोनों समुदायों के बीच हुई पत्थरबाज़ी में चोटें आई हैं जबकि कुछ लोग तलवार, छुरी और दूसरे धारदार हथियारों से घायल बताए गए हैं. राज्य प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए वहाँ अतिरिक्त पुलिस बल और रैपिड एक्शन फ़ोर्स रवाना कर दी है साथ ही पुलिस के आला अधिकारी भी प्रभावित इलाके में पहुँच गए हैं. बुरहानपुर में गुरूवार की शाम से ही धार्मिक तनाव का माहौल पैदा हो गया था जब कुछ अज्ञात लोगों ने बालाजी की सालाना निकलने वाली यात्रा पर पथराव किया. इस घटना के बाद पुलिस ने शहर में निषेधाज्ञा लागू कर दी थी. निषेधाज्ञा के बावजूद गुरूवार की रात में नगर के छोर पर बसे कई मुस्लिम घरों में आगज़नी की घटनाएं हुईं और शुक्रवार सुबह से कुछ नेता गाँधी चौक के पास स्थित जामा मस्जिद के सामने धरने पर बैठ गए जिससे तनाव बढ़ गया. शांति भंग ताज़ा घटना के अलावा, महाराष्ट्र की सीमा से लगा दक्षिणी मध्य प्रदेश का यह शहर शांत रहा है और प्रदेश में बाकी जगहों पर सांप्रदायिक तनाव में भी यहाँ हिंसा या तनाव की ख़बरें सुनने को नहीं मिलीं. पिछले महीने राज्य में विश्व हिंदू परिषद के बंद के बाद कई स्थानों पर हुए सांप्रदायिक दंगों के बावजूद यहाँ किसी गड़बड़ी की ख़बर नहीं मिली थी. ऐसा उस समय हुआ जबकि यहाँ आला प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों के कई पद भी खाली पड़े थे. वहाँ अभी हाल ही में उच्चाधिकारियों की नियुक्तियाँ हुई हैं. शहर में कल शाम से ही धार्मिक तनाव की स्थिति कायम थी मगर दिन में हालात और ख़राब हो गए जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और बाद में गोलियाँ भी चलानी पड़ीं. प्रशासन ने कर्फ़्यू शुक्रवार को दोपहर जुमा की नमाज़ के बाद उस समय लगाया जब कुछ लोगों ने मस्जिद के पास स्थित कुछ दुकानों में आग लगा दी. ये दुकानें हिंदू समुदाय के लोगों की थी. आगजनी में बुरहानपुर की जामा मस्जिद के कुछ हिस्से को भी नुकसान पहुँचा है. तनाव के बाद कर्फ़्यू बुरहानपुर के कलेक्टर कर्लीन देशमुख ने बीबीसी को बताया कि प्रशासन ने शहर में तनाव की स्थिति को देखते हुए कर्फ़्यू लगाया है. हालाँकि स्थानीय भारतीय जनता पार्टी नेता और राज्य की पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस का कहना है कि प्रशासन को यह कदम पहले ही उठाना चाहिए था. बुरहानपुर शहर के एक अन्य विधायक हमीद काज़ी का भी कहना है कि प्रशासन ने मौक़े की नज़ाकत को देखते हुए उचित क़दम नहीं उठाया और इसकी वजह वो राजनीतिक दबाव बताते हैं. हमीद काज़ी भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहते हैं, "धार्मिक आयोजन के नाम पर हिंदुत्ववादी संगठन कई दिनों से शहर में खुले आम हथियारबंद घूम रहे थे, जिससे डर का माहौल बन गया था. जो रही सही कमी थी वह कुछ बीजेपी नेताओं ने मस्जिद के सामने जुमे के दिन धरना देकर पूरी कर दी." | इससे जुड़ी ख़बरें चित्तौड़गढ़ में हिंसा के बाद कर्फ़्यू23 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस टाइटलर की भूमिका की जाँच के आदेश18 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस सिख-विरोधी दंगों में तीन लोग दोषी क़रार26 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस चौखट के बाहर की दुनिया में क़दम28 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस गोरखपुर में हिंसा के बाद कर्फ्यू29 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस 'सामूहिक क़ब्र की सीबीआई जाँच नहीं'08 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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