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खैरलांजी हत्या मामले में आठ दोषी क़रार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
महाराष्ट्र के भंडारा ज़िले में दलित परिवार के चार सदस्यों की हत्या के मामले में अदालत ने आठ लोगों को दोषी ठहराया है. इस मामले में सज़ा बाद में सुनाई जाएगी. नागपुर के नज़दीक भंडारा ज़िले की एक सत्र अदालत ने सोमवार को यह फ़ैसला सुनाया. वर्ष 2006 में हुए इस हत्या के मामले में सीबीआई ने 11 लोगों के ख़िलाफ़ आरोपपत्र दाखिल किया था. ज़िला न्यायाधीश एसएस कास्स ने सोमवार को गोपाल बिनजेवार, सकरु बिनजेवार, शत्रुघ्न धानडे, विश्वनाथ धानडे, रामू धानडे, जगदीश मंडेलकर, प्रभाकर मंडेलकर, शिशपाल धानडे को भारतीय क़ानून की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया. इस मामले में अन्य अभियुक्त महिपाल धानडे, धर्मपाल धानडे और पुरुषोत्तम तितरमारे को कोर्ट ने बरी कर दिया है. दलित जाति और जनजातियों के ख़िलाफ़ अत्याचार को रोकने के लिए बने क़ानून के तहत कोर्ट ने कोई सबूत इनके ख़िलाफ़ नहीं पाया. कोर्ट में 20 सितंबर से इस मामले की फिर से सुनवाई शुरु होगी. यह घटना सितंबर 2006 में भंडारा ज़िले के खैरलांजी में हुई थी और इसके बाद दलितों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किया था. राज्य सरकार ने मामला तूल पकड़ता देख पूरे मामले की छानबीन केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने का आदेश दिया था. सीबीआई ने इन लोगों के ख़िलाफ़ आपराधिक षडयंत्र रचने, हत्या, महिलाओं की इज़्ज़त से खिलवाड़ करने और सबूत मिटाने की कोशिश करने का आरोप लगाया था. मामला सितंबर महीने में कुछ लोगों ने दलित किसान भैया लाल की पत्नी और उनके तीन बच्चों की गला काट कर निर्मम तरीके से हत्या कर दी थी. इसके बाद भैया लाल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. राज्य सरकार ने पीड़ित परिवार को तुरंत न्याय दिलाने और वित्तीय सहायता देने की घोषणा की थी. इसके बावजूद दलितों का कहना था कि उनके जीवन और प्रतिष्ठा की रक्षा करने में सरकार विफल रही. स्थिति बिगड़ती देख सीबीआई से जाँच कराई गई. हालाँकि सीबीआई ने जो आरोपपत्र दाखिल किया है उसमे कहा गया है कि महिलाओं के पोस्टमॉर्टम से यह पता नहीं लगा कि हत्या से पहले उनके साथ बलात्कार किया गया था. | इससे जुड़ी ख़बरें दलितों की हत्या पर आरोपपत्र दाखिल27 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस दलितों के प्रति हिंसा: एक नज़र05 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस आरक्षण और सामाजिक समता का सवाल05 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस तमिलनाडु में अब भी दलितों के साथ भेदभाव20 मई, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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