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'कोसी बांध टूटने के लिए भारत ज़िम्मेदार' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल के विदेश मंत्री उपेंद्र यादव ने कहा है कि कोसी तटबंध टूटने के लिए भारत ज़िम्मेदार है क्योंकि उसके रख-रखाव की ज़िम्मेदारी उसी की है. दूसरी ओर बिहार के आपदा प्रबंधन मंत्री नीतीश मिश्र का कहना है कि जब तटबंध के निरीक्षण के लिए इंजीनियरों को भेजा गया तो नेपाल के अधिकारियों ने उनके साथ सहयोग नहीं किया. ग़ौरतलब है कि नेपाल के कुशहा में 18 अगस्त को कोसी का तटबंध टूटने से बिहार के कई ज़िले जलमग्न हो गए हैं और जान-माल की भारी क्षति हुई है. नेपाल में माओवादियों की अगुआई में बनी सरकार के विदेश मंत्री उपेंद्र यादव ने रविवार शाम कोसी तटबंध के टूटने के मुद्दे पर नई दिल्ली में भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी और अन्य नेताओं से बातचीत की. बातचीत के बाद उनका कहना था, "ये आरोप लगाना कि तटबंध टूटने के लिए नेपाल ज़िम्मेदार है, बिल्कुल ग़लत है. कोसी ने रास्ता बदल दिया इसलिए बांध टूट गया." उपेंद्र यादव का कहना था, "हमने इस मुद्दे पर मनमोहन सिंह से बात की है. हम इस पर सहमत हैं कि इस तरह की विपदा से निपटने के लिए दोनों देशों को मिल कर काम करना चाहिए." समझौते की समीक्षा ज़रूरी लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि दोनों देशों के बीच 1954 में हुए कोसी समझौते की समीक्षा की जानी चाहिए.
तटबंध की मरम्मत के बारे में नेपाली विदेश मंत्री ने कहा, "इसके लिए अध्ययन कराया जाएगा और उसके आधार पर आगे का काम होगा." हालाँकि उन्होंने इसके लिए कोई समयसीमा बताने से इनकार कर दिया. उन्होंने तटबंध टूटने से नेपाल में प्रभावित हुए लोगों को भारत की ओर से मुआवज़ा देने की भी माँग की. ग़ौरतलब है कि कोसी समझौते के तहत इस तरह का प्रावधान है कि अगर इसके कारण नेपाल की सीमा में बाढ़ आती है तो नुकसान की भरपाई भारत सरकार करेगी. उपेंद्र यादव का कहना था कि बांध टूटने से नेपाल में 70 हज़ार लोग प्रभावित हुए हैं और उन्हें तुरंत राहत देने की ज़रूरत है. बिहार के आपदा प्रबंधन मंत्री नीतीश मिश्र का कहना था, "जब हमारे इंजीनियर वहाँ (कुशहा) गए तो उन्हें काम नहीं करने दिया गया." उन्होंने कहा कि टूटे बांध की मरम्मत का काम दिसंबर से पहले शुरु होना मुश्किल है. |
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