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बांग्लादेशियों को 'वर्क परमिट' पर विचार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मेघालय में गै़र-क़ानूनी ढंग से आए बांग्लादेशियों को 'वर्क परमिट' देने के बारे में मेघालय सरकार विचार कर रही है. राज्य में मेघालय प्रोग्रेसिव एलायंस (एमपीए) के सत्ता संभालने के बाद सीमा पार से गैरक़ानूनी ढंग से आने वाले बांग्लादेशियों के मुद्दे पर एक कैबिनेट समिति का गठन किया था. मेघालय के मुख्यमंत्री दोनकेपुर रॉय ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "गैर कानूनी ढंग से मेघालय में आ गए बांग्लादेशियों को वर्क परमिट देने के बारे कैबिनेट समिति ने सुझाव दिया है. समिति का कहना है कि वे यहाँ काम कर सकते हैं, लेकिन वे यहाँ बस नहीं सकते या जायदाद नहीं ख़रीद सकते." उन्होंने कहा कि वे गंभीरता पूर्वक इस मसले पर सोच रहे हैं और इस मामले पर वे केंद्र सरकार के साथ विचार-विमर्श कर रहे हैं. कैबिनेट समिति ने सुझाव दिया है कि भारत के दूसरे राज्यों से आकर मेघालय में बसने वालों लोगों पर नियम क़ानून लागू होने चाहिए, वे अपनी मर्ज़ी से मेघालय में नहीं बस सकते. समिति के चेयरमैन पॉल लिंग्दोह ने बीबीसी को बताया कि समिति ने सुझाव दिया है कि प्रस्तावित वर्क परमिट तीन महीने के लिए होगा जिसे हर तीन महीने पर नवीकृत कराना होगा. उन्होंने बताया, "बांग्लादेशी मजदूरों की सेवा लेने वाले कांट्रेक्टर को क़ानूनन स्थानीय स्वतंत्र जनजातीय ज़िला परिषद में रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ेगा और उन्हें हर मजदूर के अता पता के बारे में बताना होगा. इसमें चूक होने पर उनका ट्रेड लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा साथ ही उन्हें जुर्माना भी भरना पड़ेगा." उन्होंने कहा कि 'इंटर स्टेट वर्कमेन रेग्युलेशन 1979' को भी मजबूत करने की जरुरत पर समिति ने जोर दिया है कि ताकि प्रवासी मजदूर स्थायी निवासी होने का दावा न करें. आंदोलन की धमकी भारतीय क़ानून के मुताबिक कोई भी यदि छह महीने से ज़्यादा समय से किसी राज्य में रह रहा हो तो वह स्थायी निवासी बनने के लिए आवेदन कर सकता है. खासी छात्र संघ ने धमकी दी है कि यदि वर्क परमिट को तुरंत लागू नहीं किया गया तो वे आंदोलन करेंगें. 'गैर क़ानूनी प्रवासियों' पर कड़ाई करने की माँग मेघालय के स्थानीय जनजातियों के हितों को लेकर काम करने वाले समूह और विभिन्न पार्टी करते रहे हैं. एमपीए के वरिष्ठ नेता पीए संगमा का कहना है कि बांग्लादेश से गैर क़ानूनी ढंग से आने वाले लोगों पर मेघालय को नज़र रखनी होगी. उन्होंने कहा, "नहीं तो पड़ोसी राज्यों की तरह ही वे राजनीति को प्रभावित करने लगेंगे." विश्लेषकों का कहना है कि वर्क परमिट से स्थानीय अर्थव्यवस्था को पर्याप्त मजदूर मिलेंगे और साथ ही इससे राज्य में जनसंख्या के अनुपात में एकाएक बदलाव होने का भी डर नहीं रहेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें बांग्लादेशी या सिर्फ़ बांग्लाभाषी? | भारत और पड़ोस कश्मीर में बांग्लादेशी गिरफ़्तार | भारत और पड़ोस विदेशी नागरिक क़ानून में संशोधन होगा10 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस बांग्लादेशियों को वापस भेजने पर विचार22 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस बांग्लादेशियों की धरपकड़ शुरु 19 मई, 2008 | भारत और पड़ोस बांग्लादेशी सीमा पर चौकसी | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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