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'गुप्तचर संस्था-फ़ौज सरकार की तरह सोचे' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका का मानना है कि आतंकवाद से मुक़ाबले के लिए ये ज़रूरी है कि पकिस्तान की गुप्तचर संस्था और फ़ौज भी पकिस्तान की सरकार की तरह ही सोचे और उसी दिशा में काम करे. बीबीसी के एक प्रश्न के उत्तर में अमरीका के विदेश उप-मंत्री और दक्षिण एशिया के प्रभारी रिचर्ड बाउचर ने कहा कि पकिस्तान की नई चुनी हुई सरकार के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं. उन्होंने कहा कि "उनमें से एक है प्रशासन के दूसरे अंगों जैसे फ़ौज और गुप्तचर संस्थाओं के साथ काम करना. ये ज़रूरी है कि इन दोनों को भी सही दिशा में लाया जाए तभी वो आतंकवाद की समस्या का मुकाबला कर सकते हैं." बाउचर ने कहा, "आतंकवाद का मुक़ाबला करने के लिए एक अच्छी गुप्तचर संस्था का होना ज़रूरी है लेकिन ये भी उतना ही ज़रूरी है की वो गुप्तचर संस्था भी शासन के बाकी अंगों की तरह ही सोचे और उसी दिशा में उनके साथ क़दम से क़दम मिला कर चले". उन्होंने ये भी कहा कि अगर ऐसा होगा तभी आतंकवाद की समस्या से निपटा जा सकता है जिससे पकिस्तान के भीतर और विदेशों में बहुत सारे लोग प्रभावित हैं. अमरीकी उप-मंत्री ने गिलानी की काबुल में भारतीय दूतावास पर हुए हमले की जाँच कराने की घोषणा का भी स्वागत किया है. बाउचर ने दो दिन के अंतराल के बाद शनिवार को गिलानी से दोबारा मुलाकात की. परमाणु क़रार भारत-अमरीका परमाणु क़रार के बारे में बाउचर ने ये विश्वास जताया कि जब तक ये समझौता परमाणु आपूर्तिकर्ताओं के संगठन एनएसजी में पहुंचेगा तब तक उसके किसी भी सदस्य देश को इस पर आपत्ति नहीं रह जाएगी. अमरीका एनएसजी के सदस्य देशों से बात कर रहा है. बाउचर ने ये भी कहा कि भारत को भी बहुत सारे देशों की शंकाओं को दूर करना होगा. दो रोज़ पहले भारत-अमरीका परमाणु क़रार से जुड़े भारत सरकार के एक उच्च अधिकारी ने माना था कि एनएसजी में कुछ देश परमाणु अप्रसार को ले कर कुछ ज़्यादा सख़्त रुख़ रखते हैं. कुछ सदस्य देश भारत को कुछ बंधनों के साथ हरी झंडी देना चाहते हैं. इस अधिकारी के अनुसार ज़्यादातर परमाणु आपूर्तिकर्ता देश भारत के साथ व्यापार के लिए राज़ी हैं और कुछ देशों को परमाणु अप्रसार से जुड़ी कुछ चिंताएं हैं लेकिन उन्होंने उम्मीद जताई थी कि ये एनएसजी में भारत के आड़े नहीं आएगी. भारत सरकार के विदेश सचिव शिव शंकर मेनन ने शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि भारत एनएसजी से 'साफ़ सुथरा बिना शर्त' क़रार करना चाहता है. एनएसजी में 45 देश सदस्य हैं. इस संगठन में हर फैसला सर्व सम्मति से ही होता है. एनएसजी के किसी भी सदस्य को ये अधिकार है कि वो संगठन के किसी भी फ़ैसले पर आपत्ति दर्ज करा सके. | इससे जुड़ी ख़बरें गिलानी-करज़ई की कोलंबो में मुलाक़ात03 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस 'आतंकवाद क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा ख़तरा'02 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस 'चार साल में रिश्ते ऐसे कभी नहीं थे'01 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस परमाणु समझौते पर फिर गरमाई राजनीति19 जून, 2008 | भारत और पड़ोस जाँच के लिए रॉबर्ट गेट्स का न्यौता13 जून, 2008 | भारत और पड़ोस जाँच में शामिल होने के न्यौते का स्वागत13 जून, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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