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जम्मू: प्रदर्शनों के बीच बातचीत का न्योता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर की शीतकालीन राजधानी जम्मू में अमरनाथ मंदिर बोर्ड को दी गई ज़मीन से उपजे विवाद पर लगातार सातवें दिन विरोध प्रदर्शन हुए हैं. उधर जम्मू-कश्मीर की सरकार ने इस आंदोलन का नेतृत्व कर रही अमरनाथ यात्रा संघर्ष समिति को बातचीत का न्यौता दिया है. इस साल जून में अमराथ मंदिर बोर्ड को 40 हेक्टेयर ज़मीन दी गई थी जहाँ तीर्थयात्रियों के लिए अस्थाई कमरे और शौचालय बनाए जा सकें. इसका कश्मीर घाटी में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर ख़ासा विरोध हुआ था. इसके बाद पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने काग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार से समर्थन वापस ले लिया था और मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद ने इस्तीफ़ा दे दिया था. विरोध को देखते हुए सरकार ने ज़मीन देने का फ़ैसला तो रद्द किया ही, साथ ही तीर्थ यात्रा की ज़िम्मेदारी भी अमरनाथ बोर्ड की जगह सरकारी विभाग को सौंप दी. जहाँ कश्मीर घाटी में शांति लौट आई वहीं जम्मू में ज़मीन वापस लिए जाने और तीर्थ यात्रा की ज़िम्मेदारी सरकार को सौंपे जाने के फ़ैसले का कड़ा विरोध होने लगा. अमरनाथ यात्रा संघर्ष समिति में लगभग तीस राजनीतिक (भाजपा समते), धार्मिक, सामाजिक और व्यवसायिक संगठन शामिल हुए और इस समिति ने विरोध प्रदर्शन शुरु कर दिए. आत्महत्या से मामला भड़का बुधवार को लगातार सातवें दिन शहर में दुकानें, व्यापारिक प्रतिष्ठान, स्कूल और बैंक बंद रहे. सड़को पर यात्री वाहन बंद रहे और दफ़्तरों में उपस्थिति काफ़ी कम दर्ज हुई. विरोध प्रदर्शन तब तेज़ हो गए जब बीस वर्षीए कुलदीप कुमार डोगरा ने अमरनाथ मंदिर बोर्ड को आवँटित भूमि को वापस लेने के लिए किए जा रहे 'आंदोलन को बल देने के इरादे से आत्महत्या' कर ली थी. इसके बाद पिछले बुधवार को कुलदीप की अंत्येष्ठि के बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों की वजह से आंदोलन में और तेज़ी आ गई. उधर बुधवार को जम्मू-कश्मीर के गृह सचिव अनिल गोस्वामी और पुलिस प्रमुख कुलदीप खुडा ने अमरनाथ यात्रा संघर्ष समिति के सदस्यों से मुलाक़ात की और उन्हें सरकार से बातचीत का न्योता दिया. संघर्ष समिति के संयोजक लीला करण शर्मा ने पत्रकारों को बताया, "अधिकारियों ने इस समस्या को सुलझाने के लिए राज्य के राज्यपाल की ओर से हमें बातचीत का न्योता दिया है. हमने बताया कि बातचीत के लिए बेहतर और शांतिपूर्ण माहौल पैदा करना होगा. तनाव को घटाना होगा. हमने ये भी माँग रखी है कि प्रदर्शनों के दौरान गिरफ़्तार हुए लोगों को रिहा किया जाए और उनके ख़िलाफ़ दर्ज मामले वापस लिए जाएँ." | इससे जुड़ी ख़बरें अमरनाथ कैंप के पास धमाका17 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस अमरनाथ को ज़मीन देने का विरोध24 जून, 2008 | भारत और पड़ोस राज्य सरकार संभालेगी अमरनाथ यात्रा का ज़िम्मा29 जून, 2008 | भारत और पड़ोस ग़ुलाम नबी आज़ाद का इस्तीफ़ा स्वीकार07 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस जम्मू में तीसरे दिन भी हिंसक प्रदर्शन26 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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