BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
मंगलवार, 22 जुलाई, 2008 को 05:31 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
किसने क्या कहा?
संसद
संसद में बहस के दौरान नेताओं ने तीखे बयान दिए
विश्वास मत के लिए बुलाए गए संसद के विशेष सत्र के पहले दिन संसद के अंदर और बाहर नेताओं के कई तीखे बयान सुनाई दिए.

राजनीतिक गलियारों में कई रोचक कथन सुनाई दिए. किसी ने यूपीए को 'यूनाइटेड पोचर्स एसोसिएशन' यानी शिकारियों का संगठन कहा तो किसी ने एनडीए को 'नॉन डिलिवरी एजेंट' कहा.

लोकसभा के अंदर सरकार के पक्ष में वोट देने वाले सरकार का बचाव करते दिखे तो विपक्ष के लोग सरकार की टांग खींचते नज़र आए.

लेकिन संसद के बाहर कई ऐसी बातें सुनाई दीं जिन्हें सुनकर राजनीति की थोड़ी भी समझ रखने वाला कोई भी शख्स मुस्कुराए बिना नहीं रह सकता.

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) यानी 'बीएसपी' पर लगातार समाजवादी पार्टी(सपा) यानी 'एसपी' के सांसदों को ख़रीदने के आरोप लगते रहे. ऐसे में समाजवादी पार्टी के समर्थकों ने बीएसपी को 'बाइंग समाजवादी पार्टी' का नाम दे दिया.

ऐसे में भला मायावती के समर्थक कैसे चुप रहते. उन्होंने भी 'एसपी' यानी समाजवादी पार्टी को कह दिया कि ये तो 'सर्विस प्रोवाइडर' हैं यानी यूपीए सरकार को बचाने के लिए सांसदों को जमा करने वाले.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तो यूपीए को 'यूनाइटेड प्रोग्रेसिव एलायंस' की बजाए 'यूनाइटेड पोचर्स एसोसिएशन' का नाम दे दिया. यानी ऐसा संगठन जो सांसदों का शिकार कर रहा है.

दरअसल, जनता दल(यूनाइटेड) के दो सांसदों रामस्वरूप प्रसाद और एमएम कोया ने यूपीए के पक्ष में वोट देने का फ़ैसला किया है.

रामस्वरूप बिहार के नालंदा के सांसद हैं जबकि कोया लक्षद्वीप से.

इस बीच एक बार तो लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी को भी कहना पड़ा "मैं बहुत छोटा आदमी हूँ. सिर्फ़ दिखने में बड़ा हूँ."

संसद के अंदर अपने आठ मिनट के भाषण में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पूरी तरह अपनी सरकार का बचाव किया.

अपने अभिभाषण में मनमोहन ने कहा, "माफ़ी के साथ मैं ये कहना चाहता हूँ कि संसद का ये सत्र ऐसे समय में बुलाया गया है जब सरकार पूरी तरह से आर्थिक मुद्दे को सुलझाने में व्यस्त है. ख़ासतौर पर महँगाई पर काबू पाने की जद्दोजहद कर रही है और ऐसे कार्यक्रम बनाने में जुटी है जिनसे देश के लोगों को फ़ायदा हो खासकर किसानों को. महोदय मुझे लगता है कि इससे बचा जा सकता था."

लेकिन संसद में विपक्ष के नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने मनमोहन सिंह और यूपीए पर बेहद तीखे तीर छोड़े.

"यूपीए एक आईसीयू के मरीज़ की तरह है. पहला सवाल ये है कि ये मरीज़ बच पाएगा या नहीं. अगर सरकार परमाणु क़रार की इतनी इच्छुक थी तो उसने इसका ज़िक्र अपने न्यूनतम साझा कार्यक्रम में क्यों नहीं किया. कम से कम इसका ज़िक्र उसे कांग्रेस के घोषणा पत्र में तो करना था. ये क़रार दो देशों के बीच नहीं बल्कि दो नेताओं के बीच हो रहा है. जिसमें एक प्रधानमंत्री हैं."

संसद के अंदर जब रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव बोलने के लिए खड़े हुए तो विपक्ष ने जमकर हंगामा मचाया. जिसके बाद लालू एकदम लाल हो गए और नौबत चीखने-चिल्लाने तक जा पहुँची.

विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने क़रार का पक्ष लेते हुए आईएईए से मंज़ूरी मिलने की तुलना पासपोर्ट और वीसा से की.

"हमें ये पासपोर्ट और वीसा मिल जाने दीजिए. इसके बाद हम तय करेंगे कि हमें सफ़र करना है या नहीं. अगर हम यात्रा करते हैं तो हम ही ये तय करेंगे कि हमारी मंज़िल क्या होगी."

यूपीए और वामदलों के बीच मध्यस्तता करने वाले मुखर्जी ने वामदलों से कहा, "ज़रा आप खुद अपने दिल पर हाथ रखकर ये बताएँ कि क्या ये मुद्दा है सरकार को गिराने का."

मुखर्जी ने संसद में आंकड़े पेश किए. उन्होंने कहा "2030 तक भारत के पास 1.45 लाख मेगावाट बिजली होगी जबकि डेढ़ लाख मेगावाट बिजली की कमी होगी. 2050 में ये कमी बढ़कर 4.12 लाख मेगावाट हो जाएगी. परमाणु ऊर्जा होने के बावजूद हम 2050 में सिर्फ़ 7000 मेगावाट बिजली की कमी ही पूरा कर पाएँगे."

वामदलों की तरफ़ से सीपीएम नेता मोहम्मद सलीम ने यूपीए सरकार की टांग खींची. सलीम ने कहा, "हम वामदलों ने सरकार को डेबिट कार्ड थमा दिया था. आप लोगों को तय करना था कि हमें कितना पैसा निकालना है."

मोहम्मद सलीम ने कहा, "जब क़रार की बात आती है तो सरकार बड़ी तेज़ी से काम करती है. लेकिन बात जब महँगाई, कीमते बढ़ने और सच्चर समिति की रिपोर्ट को लागू करने पर आती है तो की गति बिल्कुल शून्य हो जाती है. सरकार थोक क़रार के साथ-साथ खुदरा क़रार भी कर रही है. ये सिर्फ़ विश्वासमत की ही बात नहीं है बल्कि उसकी विश्वासनियता की है."

नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफ़ुल्ल पटेल ने कहा, "मैं आडवाणी जी और प्रणब दा जितना अनुभवी तो नहीं हूँ लेकिन, अपने पिछले 18 साल के संसदीय अनुभव के दौरान मैंने देश की विदेश नीति के साथ ऐसा उपहास कभी नहीं देखा. सभी हाइड एक्ट की बात कर रहे हैं. लेकिन कोई ये नहीं बता रहा कि इसमें कौन का बिंदु विवादास्पद है."

इससे जुड़ी ख़बरें
संसद का विशेष सत्र शुरु
21 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस
बड़े खिलाड़ी लेकिन वोट नहीं
21 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस
धोखा देने का सवाल ही नहीं: मुखर्जी
21 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस
'सरकार ने विश्वास तोड़ा है'
21 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस
विश्वास मत पर आज होगा मतदान
21 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>