|
संयुक्त राष्ट्र बर्मा पर दबाव डालेगा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र के दूत जॉन होम्स बर्मा पहुँच रहे हैं. वे सैनिक सरकार से तूफ़ान प्रभावित इलाक़ों में सहायता चलाने के लिए और छूट देने की माँग करेंगे. जॉन होम्स अपने साथ संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून का एक पत्र ले जा रहे हैं जो बर्मा के सैन्य नेता थान श्वे को संबोधित है. ग़ौरतलब है कि थान श्वे ने बान की मून से बात करने से इनकार कर दिया था. बर्मा का कहना है कि दो हफ़्ते पहले आए चक्रवातीय तूफ़ान नर्गिस ने भारी क्षति पहुँचाई है और लगभग 78 हज़ार लोग मारे गए हैं. अभी भी 56 हज़ार लोग लापता हैं. बर्मा अंतरराष्ट्रीय मदद की पेशकश ठुकराता रहा है. हालाँकि सैनिक सरकार ने भारतीय सहायता दल को आने की अनुमति दी है. इस दल में 50 डॉक्टर शामिल हैं जो चिकित्सा उपकरणों के साथ बर्मा पहुँच रहे हैं. इस बीच ब्रिटेन स्थित एक संस्था ने कहा है कि बर्मा में दो हफ़्ते पहले आए समुद्री तूफ़ान की वजह से वहाँ के इरावदी डेल्टा में बच्चे भुखमरी का शिकार हो रहे हैं. ‘सेव द चिल्ड्रेन’ नाम की इस संस्था के मुताबिक तूफ़ान आने से पहले ही उन्होंने इन इलाकों में पाँच साल से कम उम्र के करीब तीस हज़ार कुपोषित बच्चों का पता लगाया था. बर्मा की सैन्य सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सहायता के कई प्रस्ताव ठुकरा दिए हैं. कई सरकारों ने बर्मा सरकार को तूफ़ान की समझ रखने विशेषज्ञ और अन्य साज़ो सामान भेजने की भी पेशकश की लेकिन उसे भी ठुकरा दिया गया. | इससे जुड़ी ख़बरें बर्मा में भीषण तूफ़ान, 350 से ज़्यादा मरे04 मई, 2008 | भारत और पड़ोस तूफ़ान में मृतकों की संख्या दस हज़ार से ज़्यादा05 मई, 2008 | भारत और पड़ोस संयुक्त राष्ट्र की सहायता की पेशकश05 मई, 2008 | भारत और पड़ोस पीड़ितों के लिए भारत ने मदद भेजी06 मई, 2008 | भारत और पड़ोस बर्मा में मृतक संख्या 15 हज़ार06 मई, 2008 | भारत और पड़ोस बर्मा की सहायता पर हो रही है राजनीति07 मई, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||