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तिब्बत पर भारत की सधी प्रतिक्रिया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत ने तिब्बत में पिछले कुछ दिनों से बनी हुई हिंसा की स्थिति पर संभलकर प्रतिक्रिया दी है. भारतीय विदेशमंत्री प्रणव मुखर्जी ने शनिवार को कहा कि भारत तिब्बत में भड़की हिंसा के बाद की स्थिति पर नज़र रखे हुए है. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के राजधानी पहुँचने के बाद एक-दो दिनों में इस बारे में सरकार अपना रुख़ और स्पष्ट करेगी. उधर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि भारत तिब्बत में अस्थिर हालात, ल्हासा में जारी हिंसा और निर्दोष लोगों के मारे जाने की ख़बरों से दुखी है. बयान में उम्मीद जताई गई है कि तिब्बत की ताज़ा स्थिति से जुड़े सभी संबंधित पक्ष बातचीत और अहिंसक तरीकों से समाधान निकालने की कोशिश करेंगे. पश्चिमी देशों ने भी तिब्बत में हुए प्रदर्शनों और वहाँ भड़की हिंसा पर चिंता जताई है. अमरीका ने चीन से कहा है कि वो संयम से काम ले. ग़ौरतलब है कि तिब्बत में चीन के ख़िलाफ़ 1959 में हुए संघर्ष के 50 बरस होने पर शुक्रवार को तिब्बत में विरोध-प्रदर्शनों का क्रम शुरू हुआ पर बाद में इसने हिंसक रूप ले लिया. भारत में तिब्बत की निर्वासित सरकार का कहना है कि उसकी रिपोर्टों के मुताबिक ल्हासा में शुक्रवार को हुई हिंसा में तीस लोग मारे गए हैं. निर्वासित सरकार ने ये भी कहा है कि उसे ख़बरें मिल रही हैं कि 100 लोगों की मौत हुई है लेकिन वे इसकी पुष्टि नहीं कर सकते. उधर तिब्बत में चीन के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करे लोगों को वहाँ के अधिकारियों ने आत्मसमर्पण करने के लिए सोमवार तक का समय दिया है. चीन के सरकारी मीडिया के मुताबिक केवल 10 लोगों की मौत हुई है. भारत का रुख़ ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत सरकार की ओर से जारी बयान में चीन के बारे में स्पष्ट तौर पर कुछ भी नहीं कहा गया है.
दरअसल, भारत के साथ दुविधा यह है कि मानवाधिकार और अन्य पहलुओं पर भारत तिब्बत की निर्वासित सरकार से सहमत है. यही वजह है कि पिछले कुछ दशकों से तिब्बत की निर्वासित सरकार को भारत ने अपने पास शरण दे रखी है. पर इस शर्त पर कि उनकी ओर से कोई भी राजनीतिक गतिविधि नहीं की जाएगी. ऐसे में जहाँ भारत तिब्बतियों के देश में हो रहे प्रदर्शनों को अनुमति नहीं दे रहा है वहीं चीन से सुधरते संबंधों को ध्यान में रखते हुए बहुत संभलकर बोल रहा है. तिब्बत में पिछले 20 बरसों के दौरान हिंसा की यह सबसे बड़ी घटना बताई जा रही है. चीन ने ल्हासा की घटनाओं के लिए दलाई लामा को ज़िम्मेदार ठहराया है. चीन के सरकारी मीडिया ने कहा है कि ये प्रदर्शन 'पूर्वनियोजित' थे और इसके पीछे दलाई लामा हैं. लेकिन तिब्बतियों के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने कहा है कि ल्हासा की स्थिति को लेकर वो गंभीर रूप से चिंतित हैं. दलाई लामा ने एक प्रेस वक्तव्य जारी करके चीन से माँग की है वह ल्हासा में बर्बर तरीके से बलप्रयोग करना बंद करे. उन्होंने कहा है कि तिब्बतियों ने जो प्रदर्शन किए हैं वो चीनी शासन के ख़िलाफ़ लंबे समय से चले आ रहे असंतोष का प्रतीक हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें आत्मसमर्पण के लिए सोमवार की समयसीमा15 मार्च, 2008 | पहला पन्ना विरोध मार्च करते तिब्बती गिरफ़्तार13 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस निर्वासित तिब्बतियों के मार्च पर रोक10 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस विरोध जताने निकले निर्वासित तिब्बती...10 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस तिब्बत के पर्यटन में 'रिकार्ड बढ़ोतरी'17 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस बौद्ध सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप23 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस तिब्बत की बदलती तस्वीर20 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस दलाई लामा की सुरक्षा बढ़ाई गई05 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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