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सोमवार, 25 फ़रवरी, 2008 को 22:43 GMT तक के समाचार
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चार मिनट में सुनाई 'सज़ा-ए-मौत'
अफ़ग़ानी पत्रकार परवेज़ कंबक्श
परवेज़ का कहना है कि उनका मुक़दमा चार मिनट में निपटा दिया गया
अफ़ग़ानिस्तान के एक पत्रकार को एक न्यायालय ने सज़ा-ए-मौत का फ़ैसला सुनाया है. अपराध यह है कि उसने महिलाओं के अधिकारों संबंधी एक लेख इंटरनेट से डाउनलोड कर लिया था.

पर मामला इतना भर ही नहीं है, पत्रकार का कहना है कि इस पूरे मुक़दमे की कार्रवाई महज चार मिनट में पूरी कर ली गई थी.

तेइस बरस के परवेज़ कंबक्श ने जेल की सलाखों के पीछे से ही ब्रितानी अख़बार इंडिपेंडेंट को बताया कि इस पूरे मांमले में न तो उन्हें वकील करने की अनुमति मिली और न ही अपनी बात रखने का मौका.

कंबक्श पर आरोप है कि उन्होंने एक ऐसा लेख लोगों के बीच बाँटा जिसमें इस्लाम का अपमान किया गया है.

हालत यह है कि अब परवेज़ को मौत की सज़ा सुनाई जा चुकी है और इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ उनकी अपील को लंबित रखा गया है.

परवेज़ को उत्तरी शहर मज़ारे शरीफ़ की एक जेल में रखा गया है जहाँ उनकी सेल में गुंजाइश से ज़्यादा लोगों को क़ैद करके रखा गया है.

परवेज़ को जिन लोगों के साथ क़ैद करके रखा गया है उनमें चरमपंथी, हत्यारे और लुटेरे शामिल हैं.

विवाद

दरअसल, इस विवाद की शुरुआत हुई पिछले वर्ष अक्टूबर महीने में. सबसे पहले सवाल उठाए कुछ धार्मिक गुरुओं ने.

इसपर जवाब देते हुए परवेज़ ने बताया कि उन्होंने एक ईरानी वेबसाइट से एक लेख डाउनलोड किया था जिसमें यह सवाल उठाया गया था कि अगर एक से ज़्यादा लोगों से संबंध बनाना पुरुषों के लिए उचित है तो महिलाओं के लिए ऐसा करना अनुचित क्यों.

इसके कुछ दिनों बाद ही परवेज़ कंबक्श को अफ़ग़ानिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ने तलब किया.

परवेज़ को हिरासत में ले लिया गया और कहा गया कि ऐसा उनकी सुरक्षा के लिए किया जा रहा है क्योंकि अगर वो बाहर रहे तो उनकी हत्या हो हो सकती है.

इसके बाद परवेज़ पर इस्लाम विरोधी अपराधों में लिप्त होने का आरोप लगाया गया और मुक़दमा चला.

मुक़दमे की सुनवाई के लिए जब उन्हें कचहरी ले जाया गया उस वक्त कचहरी के बंद होने का वक्त हो चला था.

इन चंद मिनटों में ही कुछ मामूली जानकारी देते हुए परवेज़ की सज़ा तय कर दी गई. परवेज़ का आरोप है कि उन्हें अपना पक्ष रखने या अपना वकील करने तक का मौका नहीं मिला.

अब इस मामले की सुनवाई काबुल की एक ओपन कोर्ट में होना है.

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