BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शुक्रवार, 22 फ़रवरी, 2008 को 08:53 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
किसानों को राहत मिलने की उम्मीद

भारतीय किसान
समस्याओं से घिरे किसानों के नेता सरकार से कर्ज़ माफ़ी की माँग कर रहे हैं
भारत के वित्तमंत्री पी चिदंबरम जब इस महीने अपनी सरकार का आख़िरी आम बजट पेश करेंगे तो उस पर अगले साल होने वाले आम चुनावों की छाप दिख सकती है.

उम्मीद की जा रही है कि वित्त वर्ष 2008-09 के लिए पेश होने वाला चिदंबरम का यह बजट संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार में ही उनके पिछले बजटों से अलग होगा.

सरकार से इस चुनावी साल में किसानों के हित में कई तरह के क़दम उठाने की अपेक्षा की जा रही है.

अगले साल आम चुनाव निर्धारित हैं और उससे पहले कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव परिणामों से सरकार के घटक दलों की चिंता बढ़ी है.

किसान कर्ज़ माफ़ी की उम्मीद कर रहे हैं. ख़ुद कांग्रेस पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर चर्चा हुई है और पार्टी के नेता वित्तमंत्री पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

किसानों ने सत्तारूढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलकर भी कर्ज़ माफ़ कराने की माँग की है.

सोनिया ने अपने चुनाव क्षेत्र रायबरेली की एक सभा में किसानों को राहत मिलने के संकेत भी दिए हैं.

ठोस क़दम की उम्मीद

किसानों के संगठन भारत कृषक समाज के अध्यक्ष कृष्णवीर सिंह कहते हैं कि उन्होंने वित्तमंत्री के समक्ष अपनी माँगे रख दी हैं.

एक को सब्सिडी, दूसरे को रियायत...
 ये भी अजीब है कि ग़रीबों को जब रियायत मिलती है तो उसे सब्सिडी का नाम दिया जाता है. लेकिन इस सरकार में कंपनियों को मिली कर रियायतों को देखें तो सरकारी ख़ज़ाने को लगभग दो लाख 33 हज़ार करोड़ रुपए का चूना लग चुका है
देविंदर शर्मा, कृषि मामलों के विशेषज्ञ

कांग्रेस पार्टी से जुड़े कृष्णवीर सिंह का कहना है, "हमने पी चिदंबरम से कहा है कि किसानों की बुरी हालत सरकारी नीतियों की वजह से ही है, इसलिए पूरा कर्ज़ माफ़ होना चाहिए."

वो कहते हैं, "अगले साल इस सरकार की अग्निपरीक्षा होनी है इसलिए बजट से लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश ज़रूर की जाएगी."

कृषि मामलों के जानकार देविंदर शर्मा का कहना है, "देश के किसानों पर अभी लगभग तीन लाख़ पचास हज़ार करोड़ रुपए का कर्ज़ है. प्रधानमंत्री ने पिछले साल कपास किसानों के लिए जिस पैकेज की घोषणा की थी, वह भी ज़मीन पर नहीं उतर सका. इसलिए इस बार किसानों को सरकार से ठोस क़दम की उम्मीद है."

शर्मा कहते हैं, "ये भी अजीब है कि ग़रीबों को जब रियायत मिलती है तो उसे सब्सिडी का नाम दिया जाता है. लेकिन इस सरकार में कंपनियों को मिली कर रियायतों को देखें तो सरकारी ख़ज़ाने को लगभग दो लाख 33 हज़ार करोड़ रुपए का चूना लग चुका है."

बढ़ता दायरा

विदर्भ में किसान
खेती में घाटा और फ़सल ख़राब होने के कारण किसानों की ख़ुदकुशी चिंताजनक है

कृष्णवीर चौधरी कहते हैं कि किसानों की समस्या को अब क्षेत्र के आधार पर बाँट कर नहीं देखा जा सकता.

उनका कहना है, "कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश में कपास उत्पादक किसानों की हालत तो ख़राब थी ही अब उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दक्षिणी राज्यों में गन्ना किसानों की स्थिति भी ख़राब है."

वो कहते हैं, "मैंने आंध्र प्रदेश का दौरा किया तो पता चला कि वहाँ के गन्ना किसान भी आत्महत्या कर रहे हैं. इस साल बाढ़ के कारण बिहार और पश्चिम बंगाल के किसानों की गेहूँ की फ़सल भी चौपट हो गई. इसलिए सरकार को चाहिए कि वो पूरे देश के किसानों के लिए कोई फ़ैसला करे."

किसानों की एक बड़ी माँग रही है कि उन्हें सस्ती दर पर कर्ज़ की सुविधा मिले. पिछले बजट में वित्तमंत्री ने सात फ़ीसदी ब्याज दर पर किसानों को कर्ज़ देने की घोषणा की थी.

लेकिन देविंदर शर्मा कहते हैं, "ब्याज दर अभी भी ज़्यादा है. इसे घटाकर चार फ़ीसदी करना चाहिए. वैसे सबसे बेहतर नीति तो ये होगी कि किसानों तक सीधे आर्थिक सुविधा पहुँचाई जाए जैसा कि विकसित देश कर रहे हैं."

भारत कृषक समाज के कृष्णवीर चौधरी कहते हैं कि इस बजट में सब्सिडी घटने के बजाय और बढ़ सकती है.

वे कहते हैं, "ऐसी ख़बरें है कि सरकार वित्तीय जवाबदेही और बजट प्रबंधन क़ानून को फ़िलहाल स्थगित कर सकती है. ऐसे में सब्सिडी बढ़ेगी."

इससे जुड़ी ख़बरें
बजट- 2007-08
27 फ़रवरी, 2007 | पहला पन्ना
रेल बजट का स्वागत भी, विरोध भी
26 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस
रुक नहीं रहीं किसानों की आत्महत्याएँ
21 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस
बजट 2006-07
28 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना
लहलहा रही है कर्ज़ की विषबेल
16 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस
बजट 2005 विशेष
25 फ़रवरी, 2005 | पहला पन्ना
आम बजट 2004
06 जुलाई, 2004 | पहला पन्ना
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>