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गुरुवार, 07 फ़रवरी, 2008 को 16:00 GMT तक के समाचार
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उत्तर भारतीयों पर बयान का विवाद
तेजेंद्र खन्ना
तेजेंद्र खन्ना ने कहा है कि वह लोगों की सामान्य यातायात आदतों की बात कर रहे थे
भारत की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के उपराज्यपाल तेजेंद्र खन्ना ने कहा है कि मीडिया ने उत्तर भारतीय लोगों के बारे में उनके बयान को "गंभीर रूप से तोड़-मरोड़कर" पेश किया है.

गुरूवार को ही मीडिया में ख़बरें आई थीं जिसमें तेजेंद्र खन्ना को यह कहते हुए दिखाया और लिखा गया था कि "उत्तर भारत के लोग क़ानून तोड़ने में गर्व महसूस करते हैं."

दिल्ली के राजभवन से जारी एक वक्तव्य में कहा गया है, "तेजेंद्र खन्ना कुछ ऐसी आदतों का ज़िक्र कर रहे थे जो लोग बेख़याली में करते हैं, जैसे कि दिल्ली में लोगों में सड़कों पर लाइनों में चलने की आदत नहीं होती, दूसरे वाहनों को रास्ता नहीं देते और लाल बत्तियों का पालन नहीं करते हैं, जबकि दक्षिण भारत के कुछ महानगरों में लोग इन नियमों का पालन करते हैं और ऐसा आँकड़ों से भी साबित होता है."

वक्तव्य में कहा गया है, "बेख़याली में होने वाले इन नियम उल्लंघन से ज़्यादा पुलिस मौजूदगी की ज़रूरत पड़ती है और ज़्यादा सतर्कता बरतने की भी."

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार मीडिया ने "तेजेंद्र खन्ना के बयान का संदर्भ और आशय गंभीर रूप से तोड़-मरोड़कर पेश किया है जो उन्होंने दिल्ली पुलिस के मोटरसाइकिल यातायात गश्ती दल की योजना की शुरूआत के समय दिया था."

तेजेंद्र खन्ना ने दिल्ली में एक आयोजन में कहा था, "इस (उत्तरी) क्षेत्र में स्थिति ये है कि सामान्य तौर पर क़ानून तोड़ने को गर्व का मामला समझा जाता है. दक्षिण भारत में लोगों का बर्ताव इस तरह का होता है कि लोग सामान्य तौर पर क़ानून की हदों में रहते हैं."

तेजेंद्र खन्ना ने कहा था, "यह मुख्य रूप से उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्र हैं जहाँ लोग क़ानून तोड़ने में गर्व महसूस करते हैं और यह भी महामंडित करते हैं कि उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं हुई."

तेजेंद्र खन्ना ने कहा था कि दिल्ली के उपराज्यपाल के तौर पर उन्होंने यह फ़ैसला किया है कि ऐसे प्रयास किए जाएंगे कि दिल्ली के नागरिक क़ानून का सम्मान करें और क़ानून तोड़ने से डरें.

उन्होंने कहा था, "डर का मतलब ये नहीं है कि उनके साथ कोई ज़्यादती होगी लेकिन अगर लोग क़ानून की हदों से बाहर निकलेंगे तो क़ानून लागू करने वाली एजेंसियाँ सिर्फ़ मूर्क दर्शक नहीं बनी रहें और ठोस कार्रवाई करें."

तेजेंद्र खन्ना जनवरी 2008 में भी उस समय चर्चा में आ गए थे जब उनका यह कथित बयान मीडिया में आया था कि दिल्ली में सभी लोगों को पहचान-पत्र रखना अनिवार्य किया जा रहा है.

उस बयान के बारे में भी तेजेंद्र खन्ना ने कहा था कि उन्होंने दिल्ली में पहचान-पत्र अनिवार्य करने जैसा कोई बयान दिया ही नहीं था.

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