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सोमवार, 14 जनवरी, 2008 को 13:28 GMT तक के समाचार
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परमाणु सहयोग बढ़ाने पर सहमति
मनमोहन सिंह
मनमोहन सिंह ने वेन जियाबाओ से मुलाकात की
भारत और चीन ने सोमवार को असैनिक परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने पर सहमति जताई है.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के स्थाई सदस्यता के दावे के प्रति सकारात्मक संकेत देते हुए चीन ने कहा कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र में अहम भूमिका निभाने की भारत की आकांक्षाओं का समर्थन करता है.

पिछले माह सैन्य अभ्यास से उत्साहित दोनों देशों ने भारत में दूसरा सैन्य अभ्यास आयोजित करने का भी फ़ैसला किया.

साथ ही भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चीन से व्यापारिक रिश्ते बढ़ाने पर जो़र दिया है. वे चीन की तीन दिन की आधिकारिक यात्रा पर हैं.

अपनी यात्रा के दूसरे दिन मनमोहन सिंह ने चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ से बीजिंग में मुलाक़ात की.

दोनों नेताओं ने कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं और 2010 तक व्यापार 60 अरब डॉलर करने पर सहमति जताई है.

दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार करीब 37 अरब डॉलर का है और पिछले एक साल में इसमें 56 फ़ीसदी की वृद्धि हुई है.

हालांकि द्विपक्षीय व्यापार में बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन साथ ही चीन के साथ व्यापार घाटा भी बढ़ा है. भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक वर्ष 2006 के बाद से व्यापार घाटा चार अरब डॉलर से बढ़कर नौ अरब डॉलर हो गया है और इस वित्तिय वर्ष के अंत तक ये 12 अरब डॉलर से ज़्यादा हो सकता है.

इससे पहले बिज़नेस नेताओं की एक बैठक में मनमोहन सिंह ने कहा कि चीन को भारतीय उत्पादों के लिए बाज़ार और खोलने की ज़रूरत है जबकि भारत को चीन में निर्यात बढ़ाना चाहिए.

मनमोहन सिंह चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ से भी मुलाक़ात करेंगे.

सीमा विवाद

पिछले करीब पाँच वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की ये पहली चीन यात्रा है. चीन और भारत विश्व की दो सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएँ हैं.

संवाददाताओं का कहना है कि भारत और चीन की अर्थव्यवस्थाओं के बीच प्रतियोगिता भी है और सहयोग भी. दोनों देशों की नज़र एक ही बाज़ार पर है.

माना जा रहा है कि बीजिंग में हो रही वार्ता में सीमा विवाद पर भी चर्चा होगी जिसपर 2003 से बातचीत चल रही है.

वर्ष 1962 में भारत-चीन यु्द्ध भी हो चुका है. चीन के पाकिस्तान से करीबी रिश्ते रहे हैं और इस वजह से भारत और चीन के बीच संबंधों में जटिलताएँ रही हैं.

चीन पाकिस्तान को हथियार और मिसाइल तकनीक देता रहा है.उधर चीन को की चिंता ये है कि भारत जापान-ऑस्ट्रेलिया-अमरीका के साथ मिलकर नया मोर्चा बना रहा है.

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