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बांग्लादेशः 2300 मरे, लाखों प्रभावित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बांग्लादेश सरकार ने कहा है कि देश के तटवर्ती इलाक़ों में गुरुवार को आए तूफ़ान में मरनेवालों की तादाद बढ़कर 2300 हो गई है. बांग्लादेश सरकार इस राष्ट्रीय आपदा से उबरने के लिए राहत कार्यों को और तेज़ कर रही है. बताया जा रहा है कि इस तूफ़ान में क़रीब 10 लाख परिवार प्रभावित हुए हैं. सरकारी आकड़ों के मुताबिक मृतकों की संख्या बढ़कर 2300 हो गई है पर इससे इनकार नहीं किया जा रहा कि यह संख्या और बढ़ सकती है. राहत एजेंसियों ने आशंका जताई है कि मृतकों की सही तादाद अभी तक बताई जा रही संख्या से दोगुनी या उससे भी कहीं अधिक हो सकती है. इन एजेंसियों का कहना है कि अभी तक कई इलाकों से पर्याप्त सूचना नहीं मिल पा रही है और पूरी स्थिति स्पष्ट होने पर प्रभावितों और मृतकों की संख्या बढ़ सकती है. अभी भी कई हज़ार लोगों तक राहत सामग्री सही और पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुँच पा रही है. लोगों को भोजन, पीने के पानी, अस्थाई बसेरों और दवाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. उधर इस भीषण तबाही की स्थिति से उबरने में बांग्लादेश की मदद करने के लिए कई देशों की ओर से पेशकश की गई है. राहत कार्य तूफ़ान से हुई भीषण तबाही के बाद बचावकर्मी समुद्री जहाज़ों और हेलीकॉप्टरों के ज़रिए बच गए हज़ारों लोगों तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं.
जैसे-जैसे राहतकर्मी प्रभावित इलाक़ों तक पहुँच रहे हैं तो वहाँ हज़ारों घर ऐसे मिल रहे हैं जो पूरी तरह तबाह हो गए हैं और शव बरामद हो रहे हैं इसलिए मृतक संख्या भी बढ़ती ही जा रही है. तूफ़ान में जीवित बचे लोगों तक पहुँचने के लिए समुद्री जहाज़ों और हेलीकॉप्टरों का सहारा लिया जा रहा है लेकिन राहत कार्यों में बहुत मुश्किलें आ रही हैं. अधिकरियों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में मछली पकड़ने गईं 150 नौकाएँ लौटी नहीं है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि बांग्लादेश में शरणार्थी शिविरों के नेटवर्क और चेतावनी प्रणाली के कारण तटवर्ती इलाक़ों में रहने वाले लगभग पाँच लाख लोग तूफ़ान से बचने में कामयाब रहे. अधिकारियों ने बताया कि राजधानी ढाका और कुछ अन्य इलाक़ों में बिजली आपूर्ति बहाल करने की कोशिश की जा रही है. भीषण तबाही तूफ़ान में अनेक गाँव और हज़ारों घर तबाह हो गए और बहुत से प्रभावित इलाक़ों से संपर्क इसलिए नहीं हो पा रहा है क्योंकि सड़कों पर मलबे का ढेर जमा है और कई इलाक़ों में बिजली और संचार व्यवस्था ठप है. हेलीकॉप्टरों और नौसेना के समुद्री जहाज़ों के ज़रिए राहत सामग्री और चिकित्सा सुविधाएँ पहुँचाई जा रही हैं. समुद्र मार्ग में डूबे हुए पोतों को हटाने में भी इन जहाज़ों की मदद ली जा रही है.
ज़मीनी रास्ते से भारी मलबे के ढेर हटाने के लिए हाथियों का भी सहारा लिया जा रहा है. दक्षिण-पश्चिमी बागेरहाट ज़िले में रहने वाले एक प्रत्यक्षदर्शी ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि तूफ़ान में उनके गाँव के 80 प्रतिशत घर नष्ट हो गए हैं. वहाँ रहने वाले एक व्यापारी मलिक तरीकुर्रहमान ने कहा, "हर जगह पर विनाश की छाप है. ये मेरी ज़िंदगी के सबसे भयानक पाँच घंटे थे. मुझे लगा कि मैं अपने परिवार को दोबारा नहीं देख सकूँगा. हमें पता ही नहीं चल रहा है कि हमारे घर कहाँ पर थे. केवल कुछ ही घर बचे हैं." संयुक्त राष्ट्र का विश्व खाद्य कार्यक्रम और सरकारी व्यवस्था इस हादसे के बाद तबाह हुए इलाक़ों तक खाना, दवा, टेंट और कंबल वगैरह को पहुँचाने के लिए संघर्ष कर रही है. विश्व खाद्य कार्यक्रम तक़रीबन चार लाख लोगों के लिए 'एनर्जी बिस्कुट' भेज रहा है. सरकार, रैड क्रिसेंट और अन्य ग़ैर सरकारी संस्थाएँ भी राहत कार्य के लिए अपनी टीमें भेज रही है. | इससे जुड़ी ख़बरें बांग्लादेश में तूफ़ान से सैकड़ों मारे गए17 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस बांग्लादेश में आया भीषण समुद्री तूफ़ान15 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस बांग्लादेश में तूफ़ान से अनेक लापता23 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस बंगलादेश पर मंडराता 'ख़तरा'04 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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