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बंदरों के कारण डिप्टी मेयर की मौत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत की राजधानी दिल्ली में बंदरों के हमले के बाद अस्पताल में भर्ती डिप्टी मेयर एसएस बाजवा का रविवार को निधन हो गया है. शनिवार की सुबह जब बाजवा अपने घर की छत पर खड़े थे कई बंदर वहां आ गए. जब वो बंदरों को भगाने लगे और आपाधापी में बाजवा छत से गिर पड़े. उनके सर में काफ़ी चोटें आईं थीं. दिल्ली पिछले चार पांच वर्षों से बंदरों के आतंक से जूझ रही है. कई सरकारी संस्थानों और इमारतों में बंदरों ने तहलका मचा रखा है और इन पर नियंत्रण के लिए कई लंगूरों को नियुक्त भी किया गया था. पिछले साल उच्च न्यायालय ने भी इस मुद्दे पर संज्ञान लिया था लेकिन कोई हल अभी तक नही निकला है. सरकार ने बंदर पकड़ने वालों की भी नियुक्तियां की लेकिन कोई ख़ास फ़ायदा नहीं हुआ क्योंकि बंदर शहर के एक इलाक़े से दूसरे इलाक़े में चले गए. बंदरों को पकड़ना और जंगलों में भेजना इसलिए भी मुश्किल हो रहा है क्योंकि लोग इन्हें भगवान हनुमान का रुप मानते हैं और इनके लिए भोजन इत्यादि देते है जिसके कारण इनकी संख्या तेज़ी से बढ़ रही है. हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह से दिल्ली का विकास हो रहा है उससे बंदरों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं और वो शहरों में आ रहे हैं. विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के सदस्य बाजवा अपने पीछे पत्नी और एक पुत्र छोड़ गए हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें हिमाचल में बंदरों की नसबंदी होगी22 अक्तूबर, 2003 | भारत और पड़ोस अब बंदरों के निर्यात का प्रस्ताव03 सितंबर, 2004 | भारत और पड़ोस बंदर को दूध पिलाने वाली माँ14 अप्रैल, 2005 | भारत और पड़ोस बेकाबू बंदरों को पकड़ने का अदालती निर्देश18 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस 'चश्माचोर' बंदर की तलाश में जुटी पुलिस17 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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