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होठों तक आ गया है प्याला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
'देयर इज़ मेनी अ स्लिप बिटविन द कप एंड द लिप.' यानी लब तक आते-आते जाम छलक जाते हैं. पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की शीर्ष नेता बेनज़ीर भुट्टो ने लंदन में खचाखच भरे एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि परवेज़ मुशर्रफ़ के साथ सत्ता साझीदारी का समझौता मौखिक तौर पर तय हो गया है लेकिन दस्तावेज़ों का इंतज़ार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि दस्तावेज़ मिलने के बाद ही पक्के तौर पर कुछ कहा जा सकता है मगर बुधवार की रात हुई लंबी बातचीत के उम्मीद यही है कि समझौता हो जाएगा. बुधवार को ही उन्होंने कहा था कि परवेज़ मुशर्रफ़ के साथ चल रही बातचीत "पूरी तरह अटक गई है." बेनज़ीर भुट्टो ने कहा, "हम जनरल मुशर्रफ़ के साथ लोकतंत्र की बहाली को लेकर काफ़ी समय से बातचीत कर रहे हैं, कल रात को राष्ट्रपति के सलाहकारों और हमारी पार्टी के नुमाइंदों के बीच काफ़ी विचार-विमर्श हुआ है. इस वक़्त हम उम्मीद कर रहे हैं कि कुछ समझौता हो जाएगा. लेकिन अभी तक कुछ तय नहीं हुआ है." बेनज़ीर का कहना है कि जनरल मुशर्रफ़ ने राष्ट्रीय सहयोग और समन्वय की बात कही है और उनकी पार्टी भी चाहती है कि अतीत को पीछे छोड़कर "देश भविष्य की ओर क़दम बढ़ाए." उन्होंने कहा, "इस सिलसिले में क़ानूनी दस्तावेज़ तैयार किए जा रहे हैं, जब ये दस्तावेज़ पूरे हो जाएँगे तभी हम कह सकेंगे कि हमारी सारी बातों को माना गया है या नहीं. हमारी एक बड़ी माँग थी कि पाकिस्तान का राष्ट्रपति वर्दीवाला नहीं होना चाहिए, इस सिलसिले में जनरल मुशर्रफ़ ने सुप्रीम कोर्ट से कह दिया है कि वे शपथ लेने से पहले वर्दी उतार देंगे." बेनज़ीर भुट्टो ने उम्मीद जताई कि उनकी वापसी पर कोई रुकावट नहीं डाली जाएगी, वे लंबे निर्वासन के बाद 18 अक्तूबर को पाकिस्तान वापस जा रही हैं. बदलता रुख़ बुधवार को उन्होंने संकेत दिए थे कि अन्य विपक्षी दलों की ही तरह पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेशनल एसेंबली मेंबर भी इस्तीफ़ा दे सकते हैं लेकिन अब बेनज़ीर भुट्टो ने कहा कि "अगर हमारी माँगें मान ली जाती हैं तो हम इस्तीफ़ा नहीं देंगे, हम या तो चुनाव लड़ेंगे या उससे अलग रहेंगे लेकिन इस्तीफ़ा नहीं देंगे."
जानकारों का कहना है कि सारा मामला इस बात पर अटका था कि बेनज़ीर फिर प्रधानमंत्री बन सकें और उसके लिए राष्ट्रपति मुशर्रफ़ एक अध्यादेश यानी ऑर्डिनेंस पास करें और फिर संसद में एक प्रस्ताव पारित करवाएँ. इस अध्यादेश के ज़रिए बेनज़ीर के ख़िलाफ़ मामले वापस ले लिए जाएँ और तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने से रोक हटा ली जाए. मौजूदा संविधान के मुताबिक़ बेनज़ीर और नवाज़ शरीफ़ प्रधानमंत्री नहीं बन सकते क्योंकि वे पहले ही दो बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं. राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए क्या बेनज़ीर की पार्टी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के निर्वाचित प्रतिनिधि मुशर्रफ़ का समर्थन करेंगे या नहीं, इस पर बेनज़ीर भुट्टो का कहना था कि अन्य विपक्षी दलों की तरह उनकी पार्टी के नेता मुशर्रफ़ के विरोध में इस्तीफ़ा तो नहीं देंगे लेकिन मुशर्रफ़ का समर्थन भी नहीं करेंगे. तो क्या अब आगे ये कहना सही होगा कि आने वाले समय में हम पीपीपी नेता बेनज़ीर को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में देखेंगे. इस पर बेनज़ीर भुट्टो का कहना था कि पक्के तौर पर कुछ भी कहना मुश्किल है क्योंकि स्थितियाँ स्पष्ट नहीं है लेकिन उन्हें उम्मीद है कि ऐसा होगा. गुरुवार को बेनज़ीर के हाव-भाव से स्पष्ट था कि उन्हें अपने फिर प्रधानमंत्री बनने की संभावना पर काफ़ी हद तक यकीन हो चला है. | इससे जुड़ी ख़बरें वर्दी के साथ चुनाव लड़ने की अनुमति28 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'बातचीत के दरवाज़े खुले रखने चाहिए'27 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस सियासत का माहिर जनरल24 अप्रैल, 2002 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान के हालात पर अमरीका 'चिंतित'24 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस पाक में विपक्षी नेता हिरासत में लिए गए23 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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