BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शुक्रवार, 21 सितंबर, 2007 को 19:36 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
सीपीएम भी सेतुसमुद्रम के पक्ष में
प्रकाश करात
प्रकाश करात ने भाजपा पर धार्मिक भावनाएँ भड़काकर राजनीति करने का आरोप लगाया है
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री करुणानिधि के बाद अब मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने भी कहा है कि रामसेतु का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है इसलिए सेतुसमुद्रम परियोजना जारी रहनी चाहिए.

उनका कहना था कि सिर्फ़ रामसेतु के नाम पर इतनी बड़ी परियोजना को नहीं रोका जाना चाहिए.

इससे पहले करुणानिधि ने कहा था कि रामसेतु के मानवनिर्मित होने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है इसलिए परियोजना को नहीं रोका जाना चाहिए.

हालांकि उन्होंने इससे आगे बढ़ते हुए यह भी कहा था कि भगवान राम के होने के भी कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं हैं.

इस बयान पर ख़ासा बवाल मचा था और तमिलनाडु और कर्नाटक में हिंसा की कुछ घटनाएँ भी हुई थीं.

'केंद्र आगे बढ़े'

सीपीएम के महासचिव ने चेन्नई में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "इस बात के कोई वैज्ञानिक आधार नहीं हैं कि एडम्स ब्रिज (रामसेतु) मानवनिर्मित है इसलिए केंद्र सरकार को सेतुसमुद्रम परियोजना पर बिना और विलंब किए आगे बढ़ना चाहिए."

 इस देश में लोग हैं जिनकी धार्मिक आस्थाएँ हैं और कुछ लोग हमारी तरह हैं. अपनी राय प्रकट करने पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए
प्रकाश करात

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार करुणानिधि के बयान पर टिप्पणी माँगे जाने पर उन्होंने कहा, "इस देश में लोग हैं जिनकी धार्मिक आस्थाएँ हैं और कुछ लोग हमारी तरह हैं. अपनी राय प्रकट करने पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए."

सेतुसमुद्रम का रास्ता बदलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस पर तो कोई आपत्ति ही नहीं है. उन्होंने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने इस परियोजना को मंज़ूरी दी थी और इससे राजनीतिक लाभ उठाने की भी कोशिश की थी.

सीपीएम महासचिव ने कहा, "यदि भाजपा को लगता है कि वह इस मुद्दे से राजनीतिक लाभ उठा लेगी तो वह ग़लत सोचती है. उन्होंने उत्तरप्रदेश में धार्मिक भावनाओं के आधार पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की लेकिन विफल हो गए."

परियोजना और विवाद

उल्लेखनीय है कि सेतुसमुद्रम परियोजना के तहत भारत और श्रीलंका के बीच उथले समुद्र के बीच एक नहर बनाकर जहाज़ों के आने-जाने का रास्ता बनाना है.

सेतु समुद्रम परियोजना स्थल
सेतु समुद्रम परियोजना पर सौ साल से भी पहले से विचार हो रहा है

इससे भारत के पूर्वी हिस्से से पश्चिमी हिस्से में जाने वाले जहाज़ों को श्रीलंका से घूमकर नहीं जाना पड़ेगा और इससे अरबों रुपयों की बचत होगी.

लेकिन इस परियोजना के लिए उन टापुओं के बीच से रास्ता निकालना होगा जिसे एडम्स ब्रिज या रामसेतु कहा जाता है.

हिंदू संगठन इसे तोड़ने पर आपत्ति जता रहे हैं. उनका कहना है कि यह उसी पुल का अवशेष है जिसका ज़िक्र रामायण में है और जिसे राम की वानर सेना ने बनाया था.

इसे लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुँचा है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जब केंद्र सरकार ने हलफ़नामा दिया तो उसमें कहा गया कि रामसेतु के मानवनिर्मित होने का कोई एतिहासिक और वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं.

लेकिन इस हलफ़नामे में यह भी कहा गया था कि भगवान राम के होने का भी कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है.

इस पर हंगामा मचा और फिर सरकार ने यह हलफ़नामा यह कहकर वापस ले लिया कि वह किसी की धार्मिक भावना को आहत नहीं करना चाहती.

इसके बाद से यह राजनीति का मुद्दा बना हुआ है.

इससे जुड़ी ख़बरें
'रामसेतु' का हलफ़नामा वापस
14 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस
आरएसएस का नया मुद्दा - रामसेतु
10 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस
क्या है सेतुसमुद्रम परियोजना?
26 जून, 2005 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>