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बुधवार, 19 सितंबर, 2007 को 10:12 GMT तक के समाचार
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परमाणु समझौते पर अहम बैठक
भारत का एक परमाणु संयंत्र
भारत-अमरीका के परमाणु समझौते को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा है
अमरीका और भारत के बीच परमाणु समझौते को लेकर लगातार चल रही बयानबाज़ी के बीच यूपीए और वामपंथी दलों की समिति की अहम बैठक बुधवार को होने जा रही है.

इस बीच मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के महासचिव प्रकाश करात ने सरकार से कहा है कि वह छह महीने तक समझौते पर कोई क़दम न उठाए.

दूसरी ओर यूपीए का नेतृत्व कर रही कांग्रेस ने कहा है कि यदि परमाणु समझौते के मसले को सड़कों पर ही ले जाना था तो यूपीए-वामपंथी दलों की समिति गठित करने का क्या औचित्य था.

भारत में अमरीका के राजदूत डेविड मलफ़र्ड ने कहा है कि यह समय महत्वपूर्ण है और भारत को समझौते को लागू करने में देर नहीं करनी चाहिए.

इस बीच नज़रें विएना में चल रही अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की बैठक पर भी लगी हुई है जिसमें भारत की ओर से परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष अनिल काकोदकर हिस्सा ले रहे हैं.

उल्लेखनीय है कि भारत और अमरीका के बीच असैनिक परमाणु समझौते को लेकर वामपंथी दल खुला विरोध कर रहे हैं. उनका मानना है कि हाइड एक्ट से भारत की विदेश नीति प्रभावित होगी और परमाणु कार्यक्रम भी प्रभावित होगा.

बैठक

केंद्र की यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दलों के साथ मतभेद को सुलझाने के लिए एक समिति का गठन किया गया है.

 जो क़दम उठाने हैं उनमें आईएईए के साथ सुरक्षा समझौता करना है और परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के नियमों में परिवर्तन करना है जिससे यह समझौता लागू हो सके
डेविड मलफ़र्ड, अमरीकी राजदूत

इस समिति की दो बैठकें हो चुकी हैं और दोनों पक्षों की ओर से कागज़ों का आदान प्रदान हो चुका है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार वामदलों की ओर से सरकार को पाँच पृष्ठों का एक नोट भेजा गया था जिसमें कई सवाल उठाए गए थे.

सरकार की ओर से वामदलों को 15 पृष्ठों का एक जवाब भेज दिया गया है.

बुधवार को होने वाली बैठक में इसके आगे बात होने की संभावना है.

जैसा कि तय है इस समिति की रिपोर्ट छह महीने बाद आएगी.

'छह महीने नहीं'

लेकिन इस बीच वामपंथी दल परमाणु समझौते का विरोध सार्वजनिक रुप से कर रही है और खुली बयानबाज़ी भी चल रहे हैं.

दिल्ली में सीपीएम की एक रैली को संबोधित करते हुए मंगलवार को प्रकाश करात ने कहा कि छह महीने तक परमाणु समझौते पर कोई क़दम नहीं उठाना चाहिए और संसद में इस विषय पर चर्चा होने तक इंतज़ार करना चाहिए.

उन्होंने रैली में कहा, "सरकार को संसद में बहस के नतीजे आने तक इंतज़ार करना चाहिए और तब तक समझौते को लेकर कोई क़दम नहीं उठाना चाहिए."

वामपंथियों की रैली
वामपंथी इस मुद्दे पर सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं

उनका सुझाव था कि संसद की बहस से इसका कोई रास्ता निकल सकता है. उनका कहना था कि इसके बिना देश में एक राजनीतिक संकट हो सकता है.

उन्होंने अमरीकी नीतियों पर सीधा हमला किया और आरोप लगाया कि अमरीका ने इराक़ पर हमला करके उसे बर्बाद कर दिया और अब वह ईरान को धमकी दे रहा है.

लेकिन वामपंथियों की इस टिप्पणी के बाद यूपीए का नेतृत्व कर रही कांग्रेस ने नाराज़गी जताई है.

कांग्रेस प्रवक्ता सत्यव्रत चतुर्वेदी ने कहा है कि यदि वामपंथी दलों को परमाणु समझौते का मुद्दा लेकर सड़क पर उतरना ही था तो इसे पर समिति का क्या औचित्य रह जाता है.

उधर केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने भी प्रकाश करात के उस बयान पर नाराज़गी जताई है जिसमें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सलाह दी गई थी कि वे अपने मित्र सावधानी से चुनें.

समाचार एजेंसी यूएनआई के अनुसार सिब्बल ने भी सलाह दी, "मेरा सुझाव है कि वामपंथी इस तरह हमला करने की जगह समिति में भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर ईमानदारी से बात करें."

मलफ़र्ड की सलाह

दूसरी ओर भारत में अमरीका के राजदूत डेविड मलफ़र्ड ने सलाह दी है कि समय महत्वपूर्ण है और भारत को समझौते को लागू करने के लिए क़दम उठाना चाहिए.

दिल्ली में भारत-अमरीकी आर्थिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए मलफ़र्ड ने कहा, "अब हमें क़दम उठाने चाहिए."

उनका कहना था, "जो क़दम उठाने हैं उनमें आईएईए के साथ सुरक्षा समझौता करना है और परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के नियमों में परिवर्तन करना है जिससे यह समझौता लागू हो सके."

इस बीच वियना में आईएईए की बैठक में भाग लेने गए अनिल काकोदकर ने परमाणु ऊर्जा को अपरिहार्य बताया है.

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