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हलफ़नामा विवाद: 'दोषियों को सज़ा मिले' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन दे रही मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने सेतुसमुद्रम परियोजना पर विवादास्पद हलफ़नामा तैयार करने वालों को सज़ा देने की माँग की है. तो दूसरी ओर कांग्रेस ने विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उस माँग को ख़ारिज कर दिया है जिसमें उसने पूरे मामले पर प्रधानमंत्री से माफ़ी मांगने को कहा था. ग़ौरतलब है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफ़नामे में कहा था कि रामायण या इसके पात्रों के अस्तित्व का कोई ऐतिहासिक या वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिलता है. व्यापक विरोध होने के बाद यूपीए सरकार ने यह हलफ़नामा वापस लेने का फ़ैसला कर नया हलफ़नामा पेश करने की घोषणा की. 'जो हुआ वो ठीक नहीं' माकपा नेता सीताराम येचुरी का इस प्रकरण पर कहना था, "किसी भी समुदाय के धार्मिक मामले में हस्तक्षेप करना ठीक नहीं है क्योंकि संविधान में सभी धर्मों की सुरक्षा का प्रावधान है." उन्होंने विवादास्पद हलफ़नामा वापस लेने के सरकार के फ़ैसले का स्वागत किया. येचुरी का ने हलफ़नामा तैयार करने वालों की पहचान करने और दोषियों को सज़ा देने की माँग की. उधर कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि हलफ़नामा वापस लेने के बाद यह माँग करना ग़लत है कि प्रधानमंत्री इस मामले पर माफ़ी माँगें. उन्होंने भाजपा पर चुनावों को ध्यान में रखते हुए इस मामले को तूल देने का आरोप लगाया. सिंघवी ने बताया कि 'विसंगतिपूर्ण' हलफ़नामा कैसे दाख़िल हुआ और इसके लिए कौन ज़िम्मेदार थे, इसका पता लगाने की प्रक्रिया चल रही है. |
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