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रविवार, 26 जून, 2005 को 09:40 GMT तक के समाचार
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जुलाई में शुरु होगी सेतुसमुद्रम परियोजना

सेतुसमुद्रम
इस समय भारत और श्रीलंका के बीच का समुद्री इलाक़ा आवाजाही के लिए उपयोग में नहीं आता
सेतुसमुद्रम परियोजना की शुरुआत दो जुलाई को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह करने जा रहे हैं.

यह एक ऐसी महत्वाकांक्षी परियोजना का नाम है जो बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के बीच समुद्री मार्ग को सीधी आवाजाही के लिए खोल देगी.

इस मार्ग के शुरु होने से जहाज़ों को 400 समुद्री मीलों की यात्रा कम करनी होगी जिससे लगभग 36 घंटे समय की बचत होगी.

इस समय इसके लिए जहाज़ों को श्रीलंका की परिक्रमा करके जाना होता है.

भारत और श्रीलंका के पर्यावरणवादी संगठन इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं. उनका मानना है कि इस परियोजना से पाक स्ट्रेट और मन्नार की खाड़ी में समुद्री पर्यावरण को नुक़सान पहुँचेगा.

भारत सरकार इस तर्क से सहमत नहीं है.

सहयोग

भारत और श्रीलंका के बीच से गुज़रने वाले इस परियोजना का प्रस्ताव 1860 में भारत में कार्यरत ब्रितानी कमांडर एडी टेलर ने रखा था.

नौसेना का जहाज़
सामरिक दृष्टि से भी इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है

इसी प्रस्ताव पर 135 वर्षों बाद अमल होने जा रहा है.

लगभग ढाई हज़ार करोड़ की इस परियोजना के लिए भारत सरकार ने स्वेज़ नहर प्राधिकरण के साथ एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं.

स्वेज़ नहर प्राधिकरण सेतुसमुद्रम शिपिंग चैनल प्रोजेक्ट (एसएससीपी) का निर्माण करेगा, इसे संचालित करेगा और इसकी देखरेख भी करेगा.

यह चैनल 12 मीटर गहरा और 300 मीटर चौड़ा होगा. इसमें आने और जाने दोनों का मार्ग होगा.

स्वागत और विरोध

इस परियोजना का स्वागत करने वालों में दक्षिण भारतीय राज्य हैं.

तमिलनाडु का कहना है कि इस चैनल के शुरु होने से दक्षिण भारत से समुद्गी तट पर व्यापार के अवसर बढ़ेंगे और आर्थिक विकास तेज़ होगा.

उनका कहना है कि चूंकि तूतीकोरिन बंदरगाह यूरोप और मध्यपूर्व के बीच व्यापार के अंतरराष्ट्रीय मार्ग में आता है इसलिए यह अग्रणी बंदरगाह बन सकता है.

उधर रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस परियोजना के शुरु होने के बाद से भारत को एक अच्छा नौसैनिक अड्डा मिलेगा और भारत की नौसेना दुनिया के सबसे मज़बूत नौसेनाओं में से एक हो जाएगी.

लेकिन दूसरी ओर इस परियोजना का विरोध भी हो रहा है.

जयललिता
हालांकि दक्षिण के राज्य इस परियोजना से ख़ुश हैं लेकिन जयललिता ने पर्यावरण का मुद्दा उठाया है

श्रीलंका इस परियोजना को लेकर चिंतित है और उसका मानना है कि इससे उसे उत्तर पूर्वी तट पर फ़र्क पड़ेगा.

श्रीलंका ने इस परियोजना के अध्ययन के लिए मंत्रिमंडल की एक समिति का भी गठन किया है.

भारत और श्रीलंका के कई पर्यावरणवादी संगठनों ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि इससे समुद्र के संवेदनशील पर्यावरण को नुक़सान पहुँचेगा.

मछुआरों को आशंका है कि उस चैनल के शुरु होने से उनके मछली मारने की गतिविधियाँ समित हो जाएँगी और मछलियों की संख्या भी कम हो जाएगी.

हालांकि सरकार ने मछुआरों को आश्वासन दिया है इनके व्यवसाय पर कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा.

लेकिन इस बीच तमिलनाडु की मुख्यमंत्री ने पर्यावरण की चिंता करते हुए इस पर चिंता जताई है लेकिन केंद्र सरकार में पर्यावरण मंत्री टीआर बालू ने इसे राजनीति से प्रेरित चिंता कहा है.

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