|
'राम सेतु' तोड़ने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने सेतुसमुद्रम परियोजना के लिए रामेश्वरम से श्रीलंका के तलैमन्नार तट के बीच स्थित कथित 'राम सेतु' को तोड़ने पर रोक लगा दी है. भारत और श्रीलंका के बीच समुद्र में शैवल की उथली पट्टी पाई गई है. कुछ धार्मिक संगठनों का दावा है कि यह रामसेतु है जिसका ज़िक्र हिंदू धार्मिक ग्रंथ रामायण में है. सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बीएन अग्रवाल और न्यायमूर्ति पीपी नाओलेकर की खंडपीठ ने अपने अंतरिम आदेश में कहा, "14 सितंबर तक कथित राम सेतु या एडम्स पुल को किसी भी तरह क्षतिग्रस्त नहीं किया जाए." हालाँकि अदालत ने सेतुसमुद्रम परियोजना के लिए समुद्र की तलहटी की सफाई का काम जारी रखने को मंज़ूरी दी है, बशर्ते कि इससे कथित रामसेतु को कोई नुकसान नहीं पहुँचे. दो हज़ार 87 करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित सेतुसमुद्रम परियोजना का मक़सद भारत के पश्चिमी तट से पूर्वी तट के बीच जहाजों की आवाजाही सुगम बनाना है. इसके बन जाने के बाद जहाज को पूरे श्रीलंका का चक्कर नहीं लगाना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने अपना अंतरिम आदेश जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर दिया है. उन्होंने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार 'राम सेतु' को तोड़ने के लिए विस्फोटकों के इस्तेमाल का फ़ैसला किया है. सरकारी पक्ष से अतिरिक्त महाधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम ने कोई भी अंतरिम आदेश जारी नहीं करने की अपील की लेकिन अदालत ने इसे ठुकरा दिया. खंडपीठ ने केंद्र सरकार से यह आश्वासन देने को कहा कि मामले की अगली सुनवाई तक कोई ऐसी गतिविधि न की जाए जिससे 'राम सेतु' को नुकसान पहुँचता हो. अदालत का कहना था, "पुल से छेड़छाड़ मत कीजिए. पुल को तोड़ दिए जाने के बाद अदालत क्या फ़ैसला करेगी." | इससे जुड़ी ख़बरें सेतुसमुद्रम परियोजना की शुरुआत02 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस जुलाई में शुरु होगी सेतुसमुद्रम परियोजना26 जून, 2005 | भारत और पड़ोस क्या है सेतुसमुद्रम परियोजना?26 जून, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||