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शुक्रवार, 17 अगस्त, 2007 को 06:20 GMT तक के समाचार
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परमाणु समझौते पर वामदलों की बैठक
वामपंथी नेता
वामपंथी भारत अमरीका परमाणु समझौते को लेकर नाराज़ हैं
भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर यूपीए सरकार के साथ गंभीर होते मतभेदों पर विचार करने के लिए वामपंथी दलों की शुक्रवार को महत्वपूर्ण बैठक हो रही है.

हालांकि इस बारे में अभी वामपंथी नेताओं की ओर से कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है पर कुछ तीखे स्वर भी उठ रहे हैं.

इस गतिरोध पर वामपंथी दलों की बैठकों में शुक्रवार को विचार किया जा रहा है.

राजधानी दिल्ली में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) पोलित ब्यूरो की शुक्रवार से दो दिवसीय बैठक शुरू हो गई है.

दूसरी ओर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) की भी राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारियों की इस संबंध में बैठक हो रही है.

हालांकि सीपीएम के सदस्यों ने ऐसे संकेत दिए हैं कि समर्थन वापसी पर विचार नहीं हो रहा है लेकिन सीपीआई नेताओं ने कड़ा रुख़ अपना रखा है.

कड़ा रुख़

शुक्रवार की बैठक से पहले पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ वाम मोर्चा के अध्यक्ष और सीपीएम के वरिष्ठ नेता विमान बोस ने कोलकाता में कहा, ''हमारी नीति सरकार गिराने की नहीं है, लेकिन जो नीतियां राष्ट्रहित में नहीं हैं उसमें बदलाव के लिए काम करते रहेंगे.''

 यूपीए और वामपंथी दलों का हनीमून समाप्त हो गया है और ज़रूरत पड़ी तो वामपंथी दल तलाक़ के कागज़ात दाखिल कर देंगे
एबी बर्धन, सीपीआई महासचिव

उधर पार्टी पोलित ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि समर्थन वापसी पर पार्टी का ध्यान केंद्रित नहीं है.

उन्होंने कहा कि हमारी दिलचस्पी भारत के हित में है और मौजूदा करार ऐसा नहीं है.

दूसरी ओर सीपीआई महासचिव एबी बर्धन ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा,'' यूपीए और वामपंथी दलों का हनीमून समाप्त हो गया है और ज़रूरत पड़ी तो वामपंथी दल तलाक़ के कागज़ात दाखिल कर देंगे.''

बीबीसी से बातचीत में बर्धन ने कहा कि वामपंथी दलों को यूपीए सरकार के कामकाज और समर्थन पर पुनर्विचार करना चाहिए.

उनका कहना था कि सहयोगी दलों को परमाणु समझौते को लेकर शंकाएँ हैं, इससे देश की संप्रभुता पर ख़तरा है,लेकिन सरकार आगे बढ़ती जा रही है.

संसद में गुरुवार को विपक्षी सदस्यों ने अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के उस बयान पर जमकर हंगामा किया जिसमें कहा गया था कि अगर भारत ने परमाणु परीक्षण किया तो भारत के साथ परमाणु सहयोग खत्म हो जाएगा.

इसमें वामपंथी दलों ने भी उनका साथ दिया.

वे विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी के उस बयान से सहमत नहीं दिखे जिसमें कहा गया कि भारत को परीक्षण का अधिकार है और समझौते में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे भविष्य में ऐसा करने से सरकार के हाथ बंध जाएंगे.

सीपीआई नेता डी राजा ने आरोप लगाया कि सरकार और अमेरिकी प्रशासन का बयान विरोधाभासी है. उनका कहना था कि यह इस बात संकेत है कि कुछ तथ्य छिपाए जा रहे हैं.

ख़बरें हैं कि सीपीएम की शुक्रवार की बैठक के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य से मिलेंगे.

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