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मंगलवार, 10 जुलाई, 2007 को 13:43 GMT तक के समाचार
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लाल मस्जिद का आँखों देखा हाल
लाल मस्जिद
लाल मस्जिद में आठ दिनों से चल रही सैनिक कार्रवाई के बारे में सेना और मस्जिद के प्रबंधकों का पक्ष तो हम लगातार आप तक पहुँचा रहे हैं लेकिन इस्लामाबाद में लाल मस्जिद के इर्दगिर्द रहने वाले लोग इस बारे में क्या सोच रहे हैं?

बीबीसी उर्दू डॉट कॉम ने यही जानने की कोशिश की लाल मस्जिद के आसपास मौजूद आम लोगों से.

उजड़े गुलिस्ताँ की अब क्या दास्ताँ सुनाऊँ? सुपर मार्केट बंद हैं, पुलिस गश्त कर रही है, लाल मस्जिद के लिए हर कोई सोच रहा है कि ये क्या हो गया? रह रहकर गोलियों की आवाज़ें आ रही हैं, कभी भी ज़ोरदार धमाके भी सुनाई देते हैं. एंबुलेंसों की आवाजाही हो रही है, पुलिस के सायरन गूंज रहे हैं, आर्मी की गाड़ियाँ धड़धड़ाती हुई गुज़र रही हैं. हर जवान लगता है कि जल्दी में है. इस्लामाबाद का अमन सुकून ख़त्म हो गया है.

राजा सबूर, इस्लामाबाद

मेरे बच्चे मुझसे पूछ रहे हैं कि अब्बू ये इतनी फ़ायरिंग और धमाके की आवाज़ें आ रही हैं, इनसे मरने वाले लोग कौन हैं. अब मैं इन्हें क्या बताऊँ कि मरने वालों की क्या माँगें थीं और मारने वालों ने बुश भाई की ख़िदमत का बीड़ा क्यों उठाया हुआ है. फ़िलहाल मैं जुमे से दफ़्तर नहीं जा सका हूँ और इस वक़्त मेरे अपने घर में खाने की चीज़ें बिल्कुल ख़त्म होने के क़रीब हैं.

मुज़फ़्फ़र हुसैन, इस्लामाबाद

रावलपिंडी के तमाम अस्पताल इमरजेंसी पर हैं. मरीज परेशान हैं. आज हर आदमी परेशान है. ट्रैफ़िक न होने के बराबर है. सड़कें वीरान हैं. चार घंटे स्टॉप पर धक्के खाकर वापस घर आई हूँ. इस्लामाबाद का तो ख़ुदा ही जाने क्या होगा. इस्लामाबाद दोबारा आबाद हो, दुआ है मेरी. जो औरतें अंदर बंद हैं वे ख़ैरियत से बाहर निकल आएँ.

अनीला राजा, रावलपिंडी

इस वक़्त ख़ुद को पाकिस्तानी कहते हुए शर्म महसूस हो रही है. मैं इस वक़्त अपने घर के क़रीब धमाकों और फ़ायरिंग की आवाज़ सुन सकती हूँ. मेरे शौहर अभी-अभी वापस आए हैं. उन्होंने बताया कि सारे शहर में ख़ौफ़ फैला हुआ है. बलो एरिया में कोई ट्रैफ़िक नहीं है, बस रेंजर और फ़ौज हमारे इलाक़े में खड़ी है. हलाक होने वालों के लिए बहुत अफ़सोस हो रहा हे.

शाइस्ता बानो, इस्लामाबाद

मस्जिद की तबाही अपनी आँखों से देख रहा हूँ. एक अजीब सा धुआँ मस्जिद से उठ रहा है. पाकिस्तान जो एक ख़ूबसूरत ख्वाब था, टूट रहा है. मैं लाल मस्जिद से दो फ़र्लांग पर हूँ. मेरी बच्ची सवाल करती है कि मस्जिद में किसने अग लगाई...मैं रो रहा हूँ...

जौहर चगताई, इस्लामाबाद

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