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सरहद पार सिक्कों पर चढ़ती सान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में अधिकारियों का कहना है कि लाखों की संख्या में सिक्कों की पड़ोसी देश बांग्लादेश में तस्करी की जा रही है. बांग्लादेश में इन सिक्कों से रेज़र ब्लेड बनाए जा रहे हैं. इस तस्करी के कारण भारत के कई हिस्सों में सिक्कों की कमी हो गई है. पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में पुलिस का कहना है कि हाल ही में एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया है जिससे पता चला कि समस्या कितनी गंभीर है. पुलिस के मुताबिक उन्होंने सिक्के पिघलाने वाली इकाई बरामद की है. पुलिस का कहना है कि इस व्यक्ति ने स्वीकार किया है कि वो हज़ारों सिक्कों को पिघलाता था और उससे दाढ़ी बनाने वाले रेज़र ब्लेड बनाता था. फिर इनकी बांग्लादेश में तस्करी की जाती थी. इस व्यक्ति ने कथित तौर पर पुलिस को बताया, "हमारे एक रुपए के सिक्के की कीमत दरअसल 35 रुपए जितनी है क्योंकि हम उस सिक्के से पाँच से लेकर सात ब्लेड बनाते हैं. बांग्लादेशी तस्कर हमसे नियमित रुप से ब्लेड लेते हैं." सिक्कों की किल्लत पुलिस के मुताबिक शुरु में तस्कर सिक्कों को बांग्लादेश ले जाते थे और वहाँ जाकर पिघलाते थे लेकिन अब तस्करी बड़े स्तर पर होने लगी है और ज़्यादातर अपराधी भारत में ही सिक्कों को पिघलाते हैं और फिर उन्हें ब्लेड के रुप में बेचते हैं. इससे हो रही सिक्कों की कमी से निपटने के लिए असम प्रदेश में चाय-बागान वाले अपने कर्मचारियों को कार्डबोर्ड या गत्ते से बनी सिक्कों की पर्चियाँ दे रहे हैं. इन पर्चियाँ पर लिखा रहता है कि ये पचास पैसे का सिक्का है,एक रुपए का या उससे ज़्यादा का. बागान के भीतर चीज़ें खरीदने या बेचने के लिए इन पर्चियों का इस्तेमाल किया जाता है. बागान के एक मैनेजर कहते हैं, “अगर ये पर्चियाँ बागान से बाहर चली गईं तो दिक्कत हो सकती है. लेकिन हमें इनका इस्तेमाल करना पड़ता है क्योंकि सिक्के है ही नहीं.” भारतीय ख़ुफ़िया अधिकारी कहते हैं कि लाखों सिक्कों की बांग्लादेश में तस्करी हो रही है. अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने भारत-बांग्लादेश सीमा पर तैनात सीमा सुरक्षा बल को इस बारे में सचेत कर दिया है. वरिष्ठ बीएसएफ़ अधिकारी एसके दत्ता ने बीबीसी को बताया, हमें सिक्कों की तस्करी के बारे में पता है और इसे रोकने की पूरी कोशिश करेंगे. परेशानी सिक्कों की तस्करी से पैदा हुई स्थिति से निपटने के लिए कई तरह के क़दम उठाए जा रहे हैं. कोलकाता में ही रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने सिक्के जारी किए हैं जिनकी कीमत करीब 60 लाख रुपए के आसपास है. कई लोग ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में सिक्के इकट्ठा करते हैं और फिर ऊंचे दाम पर उन्हें बेचते हैं. निताई बानिक पेशे से व्यापारी हैं. वे कहते हैं, “हम बैंक से सिक्के लेने के लिए लंबी कतारों में खड़े होते हैं लेकिन पता ही नहीं चलता सिक्के कब ख़त्म हो जाते है.” ऐसे में दुकानदार अपने ग्राहकों से कहते हैं कि वो ज़्यादा सामान खरीदें ताकि सिक्के या छुट्टे पैसे देने की ज़रुरत न पड़े. कई दुकानदारों ने सिक्कों के लिए भिखारियों की मदद ली है. व्यापारी तरुण जैन कहते हैं, "ये भिखारी हमसे अतिरिक्त पैसे लेते हैं लेकिन फिर भी उन लोगों से तो कम ही लेते हैं जो रिज़र्व बैंक के बाहर खड़े होकर बेचते हैं." सिक्कों की सबसे ज़्यादा कमी पूर्वोत्तर के शहर अगरतला में महसूस की जा रही है क्योंकि यहाँ से बांग्लादेश की सीमा काफ़ी नज़दीक है. पूर्वोत्तर राज्यों का व्यापारिक केंद्र माने जाने वाले गुवाहाटी शहर में भी 50 पैसे के सिक्के बिल्कुल उपलब्ध नहीं है. | इससे जुड़ी ख़बरें पूर्वोत्तर में हो रही है सिक्कों की किल्लत28 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस छत्तीसगढ़ में सिक्कों की कम होती खनक13 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस साधुओं के ख़िलाफ़ मुक़दमा | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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