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शुक्रवार, 16 मार्च, 2007 को 11:44 GMT तक के समाचार
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अफ़ग़ान धरोहर की वापसी
अफ़ग़ानी कला
वर्ष 1998 से ही कलाकृतियाँ स्विट्ज़रलैंड में रखी हुई थीं
अफ़ग़ानिस्तान की बेशक़ीमती सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर क़रीब एक दशक तक स्विट्ज़रलैंड के संग्रहालय में रखे जाने के बाद अब लौटाई जा रही है.

ये सभी धरोहर अफ़ग़ानिस्तान में गृह युद्ध के दौरान नष्ट होने से बचाने के लिए स्विटज़रलैंड के संग्रहालय को दान कर दी गई थी. इस अनमोल धरोहर में सिकंदर के हाथों रखी गई एक आधारशिला भी शामिल है.

इन धरोहरों के वापस मिलने को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद देश की सांस्कृतिक विरासत की सबसे बड़ी स्वदेश वापसी में से एक के रूप में देखा जा रहा है.

लगभग एक हज़ार सामान अफ़ग़ानिस्तान को वापस मिलने वाले हैं. इनमें हाथ से बुने गए अत्यंत दुर्लभ क़िस्म की कालीन से लेकर दिन-प्रतिदिन के काम में आने वाले उपकरण शामिल हैं.

इनमें सबसे बहुमूल्य सिंकदर द्वारा 300 वर्ष ईसा पूर्व में रखी गई अई खानूम शहर की आधारशिला है.

इन सभी सांस्कृतिक धरोहरों को सुरक्षित रखने के लिए अफ़ग़ान शरणार्थियों और यूरोपीय पर्यटकों ने तालेबान शासनकाल में दान कर दिया था.

ग़ौरतलब है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के शासनकाल में बामियान की बुद्ध की प्रतिमा समेत कई कलाकृतियाँ नष्ट हो गईं.

ये सभी धरोहर वर्ष 1998 से स्विट्ज़रलैंड के बूबेनडोर्फ शहर में स्थित संग्रहालय में सुरक्षित रखे हुए थे.

अब माना जा रहा है कि इन्हें अफ़गानिस्तान को वापस लौटाने में नष्ट होने का कोई ख़तरा नहीं है.

सभी सामान अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रीय संग्रहालय की देख-रेख में जर्मन एयरफोर्स के विमान से काबुल पहुँचाए जाएंगे.

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