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अफ़ग़ान धरोहर की वापसी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान की बेशक़ीमती सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर क़रीब एक दशक तक स्विट्ज़रलैंड के संग्रहालय में रखे जाने के बाद अब लौटाई जा रही है. ये सभी धरोहर अफ़ग़ानिस्तान में गृह युद्ध के दौरान नष्ट होने से बचाने के लिए स्विटज़रलैंड के संग्रहालय को दान कर दी गई थी. इस अनमोल धरोहर में सिकंदर के हाथों रखी गई एक आधारशिला भी शामिल है. इन धरोहरों के वापस मिलने को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद देश की सांस्कृतिक विरासत की सबसे बड़ी स्वदेश वापसी में से एक के रूप में देखा जा रहा है. लगभग एक हज़ार सामान अफ़ग़ानिस्तान को वापस मिलने वाले हैं. इनमें हाथ से बुने गए अत्यंत दुर्लभ क़िस्म की कालीन से लेकर दिन-प्रतिदिन के काम में आने वाले उपकरण शामिल हैं. इनमें सबसे बहुमूल्य सिंकदर द्वारा 300 वर्ष ईसा पूर्व में रखी गई अई खानूम शहर की आधारशिला है. इन सभी सांस्कृतिक धरोहरों को सुरक्षित रखने के लिए अफ़ग़ान शरणार्थियों और यूरोपीय पर्यटकों ने तालेबान शासनकाल में दान कर दिया था. ग़ौरतलब है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के शासनकाल में बामियान की बुद्ध की प्रतिमा समेत कई कलाकृतियाँ नष्ट हो गईं. ये सभी धरोहर वर्ष 1998 से स्विट्ज़रलैंड के बूबेनडोर्फ शहर में स्थित संग्रहालय में सुरक्षित रखे हुए थे. अब माना जा रहा है कि इन्हें अफ़गानिस्तान को वापस लौटाने में नष्ट होने का कोई ख़तरा नहीं है. सभी सामान अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रीय संग्रहालय की देख-रेख में जर्मन एयरफोर्स के विमान से काबुल पहुँचाए जाएंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें बामियान के पहाड़ों पर फिर दिखेंगे बुद्ध10 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान पर यूनेस्को सम्मेलन16 जून, 2003 | पहला पन्ना आठवें अजूबे की खोज? 07 सितंबर, 2002 | पहला पन्ना बामियान में मानव अवशेष मिले11 अप्रैल, 2002 | पहला पन्ना बामियान बुद्ध का पुनर्निर्माण10 अप्रैल, 2002 | पहला पन्ना अफ़ग़ानिस्तान में सामूहिक क़ब्रें मिलीं07 अप्रैल, 2002 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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