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माओवादियों के नेटवर्क को झटका | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आंध्रप्रदेश के पुलिस प्रमुख का कहना है कि इस वर्ष एक के बाद एक कई माओवादी नेताओं के मारे जाने से विद्रोही संगठन के भूमिगत नेटवर्क को झटका लगा है. राज्य के पुलिस महानिदेशक स्वर्णजीत सेन ने कहा कि पिछले एक साल के दौरान वामपंथी विद्रोहियों के हमले में कमी आई है. स्वर्णजीत सेन रविवार को पद छोड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि पुलिस ने नई रणनीति के तहत माओवादियों के आला नेताओं को अपना निशाना बनाया जिससे इस वर्ष हिंसक वारदातों में 65 फ़ीसदी की कमी आई है. उन्होंने कहा, "माओवादियों को उपरी क्रम में काफ़ी झटका पहुँचा है. ये वही नेता हैं जो माओवादियों की युवा पीढ़ी को बरगलाने और समाज में दहशत कायम करने के लिए ज़िम्मेदार थे." नई रणनीति के बारे में स्वर्णजीत सिंह ने बताया कि पुलिसकर्मियों को गाँवों में जाकर विद्रोहियों के लिए काम करने वाले किसानों को पकड़ने के बज़ाए बड़े नेताओं को खोजने को कहा गया. इससे निजले स्तर के नेताओं ने पुलिस को सहयोग देना शुरू किया. उन्होंने बताया कि पिछले साल हिंसक वारदातों में 211 आम नागरिक और पुलिसकर्मी मारे गए थे. पुलिस मुठभेड़ में 163 माओवादी मारे गए थे. लेकिन इस साल तस्वीर उलट गई है. अब तक 134 माओवादी मारे जा चुके हैं जबकि सिर्फ़ 41 आम नागरिकों और 11 पुलिसकर्मियों की मौत हुई है. इस वर्ष 320 माओवादियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है. इनके अलावा चंद्रमौली या देवन्ना जैसे नेता पुलिस मुठभेड़ में मारे गए. पुलिस प्रमुख ने कहा कि इस साल माओवादियों के क़ब्जे से 875 रॉकेट, 27 रॉकेट लांचर और 25 मोर्टार बरामद किए गए. | इससे जुड़ी ख़बरें माओवादी कर रहे हैं जबरन भर्ती18 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस आंध्रप्रदेश में 13 को ज़िंदा जलाया10 जून, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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