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'शहरी बंदरों' के तबादले पर चिंता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बंदरों की बंदरबाँट को लेकर मध्यप्रदेश और दिल्ली के बीच चल रही तनातनी अब और बढ़ गई है. बात यहाँ तक बढ़ गई है कि कि मध्यप्रदेश को अपनी फरियाद लेकर सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा है. दरअसल, दिल्ली निवासी 300 बंदरों को मध्यप्रदेश तड़ीपाड़ करने का आदेश दिल्ली सरकार की अर्ज़ी पर उच्चतम न्यायालय ने ही जारी किया था. मध्यप्रदेश के मुख्य वन संरक्षक पीवी गंगोपाध्याय का कहना है कि उन्होंने अपने वकील द्वारा अदालत से अपने आदेश पर पुनर्विचार करने की प्रार्थना की है. मुख्य वन संरक्षक का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के सामने बंदरों को स्थानांतरित करने की अर्ज़ी डालते समय दिल्ली सरकार ने इस सच को छिपाया है कि मध्यप्रदेश पहले ही दिल्ली के 250 बंदरों को अपने यहाँ पनाह दे चुका है. साथ ही राज्य का कहना है कि कोर्ट में बंदरों के स्थानांतरण पर हुए विचार-विमर्श में उसका पक्ष सामने ही नहीं आ पाया. अब राज्य सरकार ने दिल्ली से स्थानांतरित पिछले ग्रुप को ग्वालियर के समीप पालपुर कुनों के जंगल में छोड़े जाने और उससे पैदा हुई दिक्कतों को कोर्ट के सामने रखा है. वन विभाग इस बात से परेशान है कि शहर से लाए गए इन जानवरों को बीमारियाँ हो सकती है जो जंगल के दूसरे जानवरों में फैलकर पूरे पर्यावरण को नुकसान पहुँचा सकती है. 'सज़ा मध्यप्रदेश को क्यों?' पशु विशेषज्ञ कहते हैं कि हो सकता है इनमें बीमारी से लड़ने की ताकत पैदा हो गई हो लेकिन जंगली जानवरों में इस तरह की रोग प्रतिरोधी क्षमता का होना मुमकिन नहीं, क्योंकि उनका सामना इन बीमारियों से कभी हुआ ही नहीं. मध्यप्रदेश वन विभाग इसलिए भी अधिक सत्तर्क रहना चाहता है क्योंकि वह पालपुर कुनो को एशियाई शेरों के लिए विशेष पार्क के तौर पर विकसित करना चाहता है. एशियाई शेर भारत में फिलहाल सिर्फ़ गुजरात के गीर के जंगलों में पाए जाते हैं. दो साल पहले कुनो में छोड़े गए दिल्ली के बंदर आबादी में जाकर उत्पात मचाते हैं. कई बार इतना कि पुलिस को मामला अपने हाथ में लेना पड़ा है. विधानसभा में मुरैना और शिवपुरी में मचे इस 'बंदर आतंक' पर सवाल भी उठ चुके हैं कि दिल्ली में उत्पात समाप्त करने के लिए मध्यप्रदेश को क्यों सजा भुगतनी पड़ रही है? अधिकारी कहते हैं कि जब पहले लाए गए 250 बंदरों ने विश्व कुख्यात चम्बल इलाके में उत्पात मचा दिया है तो दिल्ली के छँटे 300 बंदर और आ गए तो न जाने क्या होगा. |
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