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'प्रधानमंत्री को ग़लत सलाह दी गई' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रक्षा सौदों में बिचौलियों की भूमिका को व्यवस्थित करने संबंधी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान पर नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल विष्णु भागवत ने कहा है कि उन्हें ग़लत सलाह दी गई है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विदेश दौरे से लौटते समय शनिवार को कहा था कि अगर रक्षा सौदों से मध्यस्थों को हटाना संभव नहीं है तो उनके पंजीकरण जैसे उपायों पर विचार करना चाहिए. एडमिरल भागवत ने उनकी टिप्पणी पर कहा कि रक्षा ख़रीद प्रक्रिया में दलालों की किसी भूमिका का ज़िक्र नहीं है. दूसरी ओर पूर्व विदेश राज्य मंत्री और जनता दल यूनाईटेड के नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि दुनिया के हर हथियार विक्रेता देश में बिचौलियों की भूमिका रही है, इसलिए उनकी भूमिका को स्वीकार कर लेना चाहिए. एडमिरल भागवत और दिग्विजय सिंह आपकी बात बीबीसी के साथ कार्यक्रम में श्रोताओं के सवालों का जवाब दे रहे थे. बिचौलियों की भूमिका एडमिरल भागवत ने साफ़ किया कि रक्षा सौदों में दलालों की भूमिका से सेना का नुकसान हो रहा है. उन्होंने कहा, "नियमों को ताक पर रख कर बिचौलियों की भूमिका को स्वीकार करने की बात करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. हम इसका परिणाम भुगत चुके हैं." एडमिरल विष्णु भागवत ने कहा कि बिचौलियों के कारण ही भारत ने ब्रिटेन से 35 साल पुरानी तकनीक वाले हॉक प्रशिक्षण विमान ख़रीदे और जिस स्कॉर्पीन पनडुब्बी को 100 करोड़ रुपए में ख़रीदा गया, वैसी ही पनडुब्बी 1998 में तीन करोड़ रुपए में ख़रीदी गई थी. दूसरी ओर दिग्विजय सिंह का कहना था, "बिचौलियों की भूमिका पर प्रधानमंत्री ने जो बात अब कही है, उस पर राजग सरकार ने ही पहल की थी. हमने बिचौलियों की भूमिका को व्यवस्थित करने का प्रस्ताव दिया था लेकिन तब कांग्रेस ने ही इसका विरोध किया. ख़ैर जब यह बात फ़िर उठी है तो इस पर सर्वसम्मति क़ायम करने की कोशिश होनी चाहिए." बराक सौदा दिग्विजय सिंह ने इसराइल से बराक मिसाइल सौदे के मामले में पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फ़र्नांडिस के ख़िलाफ़ केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) के आरोप पत्र को राजनीति से प्रेरित कहा. उन्होंने कहा, "इस मामले में वेंकटस्वामी और फूकन आयोग पहले ही फ़ैसला दे चुका है कि इसमें कोई गड़बड़ी नहीं हुई थी. अब फिर से उस मामले को उठाना कौन सी न्यायिक प्रक्रिया है."
दूसरी ओर एडमिरल भागवत ने आरोप लगाया कि इस सौदे में पूर्व एडमिरल नंदा और उनके बेटे की भूमिका थी. उन्होंने कहा, "एडमिरल नंदा और जॉर्ज साहब की दोस्ती पुरानी है. एक समय जॉर्ज फ़र्नांडिस मझगाँव डॉक वर्कर्स यूनियन के नेता थे और एडमिरल नंदा मंझगाँव डॉक के प्रबंध निदेशक. गोर्शकोव सौदे में भी एडमिरल नंदा की मदद से क़ीमत बढ़ाई गई थी." एडमिरल भागवत ने कहा कि राजग सरकार में एक लाख 20 हज़ार करोड़ रुपए मूल्य के रक्षा साजो-सामान ख़रीदने की अभूतपूर्व योजना बनी जिसमें कई तरह की अनियमितता हुई. उन्होंने नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि करगिल युद्ध के समय हथियारों की ख़रीद नियम-क़ानूनों को धता बता कर की गई और इसे लोक लेखा समिति तक पहुँचने नहीं दिया गया. | इससे जुड़ी ख़बरें 'रक्षा दलालों के लिए नई व्यवस्था हो'14 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस पूर्व रक्षा मंत्री के ख़िलाफ़ एफ़आईआर10 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस राष्ट्रीय सुरक्षा पर ज़ोर दिया राष्ट्रपति ने14 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस सरकार को बचाने सामने आई सीबीआई16 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस क्वात्रोची मामले पर राजनीति गहराई17 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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