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मेट्रो को बंदरों से मुक्त कराएंगे लंगूर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली मेट्रो के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने यात्रियों को उत्पाती बंदरों से दूर रखने के लिए एक बड़ा लंगूर तैनात किया है. दिल्ली के सबसे बड़े मेट्रो स्टेशनों में से एक कश्मीरी गेट इलाक़े में इस लंगूर को एक महीने तैनात किया जाएगा. लंगूर की सेवाओं के लिए इसके मालिक को लगभग सात हज़ार रुपए का भुगतान किया जाएगा. दरअसल जून में ऐसी कई घटनाएँ सामने आईं जिनमें बंदर मेट्रो में चढ़ गए और उन्होंने यात्रियों को घुड़की देना शुरू कर दिया. पुरानी दिल्ली के इलाक़े में हज़ारों बंदर छुट्टा घूमते हैं और लोगों के लिए एक बड़ा सरदर्द हैं. उत्पात दिल्ली मेट्रो के प्रवक्ता अनुज दयाल ने बताया कि कुछ दिन पहले एक बंदर चांदनी चौक से एक ट्रेन में चढ़ गया और उसने साढ़े तीन किलोमीटर का सफर किया और सिविल लाइंस स्टेशन पर जाकर उतरा. उनका कहना था,'' हालांकि वह एक कोने में बैठा था लेकिन लोग उससे डर रहे थे. इसको देखते हुए हमें वह डब्बा खाली करवाना पड़ा. लेकिन कुछ देर बाद वह चला गया.'' बंदर की धार्मिक मान्यता भी है और ये ज़्यादातर पर्यटकस्थलों के आसपास पाए जाते हैं. श्रद्धालु इन्हें केले और मूंगफली खिलाते हैं. लेकिन जब उन्हें खाने को नहीं दिया जाता है तो वे लोगों पर हमला करते हैं और खाने की वस्तु छीन ले जाते हैं. सरकार और दिल्ली की बड़ी कंपनियाँ बंदरों को इमारतों से दूर रखने के लिए लंगूर किराए पर लेती हैं. दिल्ली में बड़ी संख्या में बंदरों को पकड़ा गया है और उन्हें बड़े पिंजरों में शहर के बाहर रखा जा रहा है. लेकिन कोई अन्य राज्य इनको लेने के लिए तैयार नहीं है जिसके कारण इनका भविष्य अधर में लटका है. |
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