BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शनिवार, 29 जुलाई, 2006 को 11:21 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
'काल कपाल..' के बाद अब बारी 'ख़ौफ़' की

टीवी कार्यक्रम
सुधीश पचौरी समाचार चैनलों में इस तरह के चलन को एक तरह का वैचारिक दिवालियापन मानते हैं
भारत में 24 घंटे के ख़बरिया चैनल दर्शकों को लुभाने की होड़ में नए-नए तरीके अपनाते रहते हैं.

पहले अपने कार्यक्रमों को रोचक बनाने के लिए ये चैनल अपराध और जादू-टोने की कहानियों का सहारा लेते थे लेकिन अब यह चलन कुछ बदला है और अब ज़ोर प्रेत आत्माओं की कहानियों पर है.

समाचार चैनलों पर नज़र डालें तो 'कौन है', 'ख़ौफ़' और 'ज़िंदा हूँ' जैसे कार्यक्रम प्रसारित होते दिख जाते हैं.

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या समाचार चैनलों पर वैचारिक तर्कों से परे ऐसे कार्यक्रम को दिखाना अपने चरित्र से भटकना नहीं है.

क्या आत्माओं या भूत बंगलों की बात कह रह ये समाचार चैनल इस तरह अंधविश्वास को फैला नहीं रहे हैं.

दलील

पर चैनलों में इस तरह के प्रयोगों के लिए जो ज़िम्मेदार व्यक्ति हैं, वो इसे एक सकारात्मक प्रयास के तौर पर देख रहे हैं.

 कई ऐसी हवेलियाँ हैं जिसका अपना भयावह इतिहास रहा है और वहाँ जाने या फिर उस तरफ देखने भर से भी लोग डरते है. अगर हम वहाँ जाकर उस घटना के बारे में रिपोर्ट करते हैं और सच्चाई बयां करते हैं तो हम एक सकारात्मक काम ही कर रहे हैं
अजीत अंजुम, बीएजी फ़िल्म्स के वरिष्ठ अधिकारी

समाचार चैनलों पर 'सनसनी', 'रेड अलर्ट', 'पोल-खोल' और अब 'कौन है' जैसे कार्यक्रम बना रहे अजीत अंजुम इस बाबत कहते हैं, "रामसे की फ़िल्में या अन्य हॉरर शो मनोरंजन चैनलों पर आते है. उसमें ये कहीं नहीं कहा जाता कि भूत नहीं होता. लोगों को ये कार्यक्रम डराते हैं इसलिए उनसे हमारे कार्यक्रमों की तुलना करना बेकार है."

वो कहते हैं, "कई ऐसी हवेलियाँ हैं जिसका अपना भयावह इतिहास रहा है और वहाँ जाने या फिर उस तरफ देखने भर से भी लोग डरते है. अगर हम वहाँ जाकर उस घटना के बारे में रिपोर्ट करते हैं और सच्चाई बयां करते हैं तो हम एक सकारात्मक काम ही कर रहे हैं."

'स्टार न्यूज़' के प्रवक्ता योगेश कहते हैं, "समाचारों का चैनल होने के नाते हमारा यह मक़सद है कि हम ऐसी चीज़ों की खोजबीन करें और लोगों के सामने जो असलियत है, वो रखें इसलिए हमारी टीम इस तरह की कहानियों की असलियत की खोजबीन करती है. मौके पर जाकर रहती है. हम अपनी राय दर्शकों तक पेश करते हैं."

इस तरह के कार्यक्रम में भय पैदा करने वाली आवाज़ों और संगीत का इस्तेमाल होता है जिसका मक़सद सिर्फ़ लोगों में डर और रोमांच पैदा करना होता है. साथ ही लोगों के अनुभवों का विस्तृत नाट्य रूपांतरण भी कार्यक्रम में होता है.

संवाददाता कहानी को रोचक बनाने के लिए सदियों से बंद पड़ी इमारतों का दौरा करते हैं और इमारत के पीछे छिपी कहानियाँ बयान करते हैं जो कि आमतौर पर सुनी-सुनाई बातों पर आधारित होता है.

दिवालियापन

मीडिया विश्लेषक सुधीश पचौरी मानते हैं कि इस तरह के कार्यक्रम भूतों जैसे अंधविश्वासों को स्थापित करने का काम कर रहे हैं.

 यह न्यूज़ रूम समाचार तैयार करने वालों का दिवालियापन है. विकसित समाज में ख़बरों की कमी हो सकती है लेकिन हमारे जैसे समाज में तो ख़बर देने के लिए आदमी तड़पता रहता है. न्यूज़ रूम में एक तरह की कमज़ोरी है जो कि ख़बरों में और गप्पों में और किस्से-कहानियों में फर्क नहीं करती
सुधीश पचौरी, मीडिया विश्लेषक

इससे इतर समाचार चैनल 'आज तक' के समाचार निदेशक क़मर वहीद नक़वी जनमानस में दबी-छुपी इन कहानियों को बयान करना पत्रकारिता का दायित्व समझते हैं.

सुधीश पचौरी इसे सीधे विचारों के दिवालियापन का नाम देते हैं.

वो कहते हैं, "यह न्यूज़ रूम समाचार तैयार करने वालों का दिवालियापन है. विकसित समाज में ख़बरों की कमी हो सकती है लेकिन हमारे जैसे समाज में तो ख़बर देने के लिए आदमी तड़पता रहता है. न्यूज़ रूम में एक तरह की कमज़ोरी है जो कि ख़बरों में और गप्पों में और किस्से-कहानियों में फर्क नहीं करती."

बहरहाल, कभी कादंबिनी जैसी पत्रिकाओँ की ओर से प्रकाशित होते रहे भूत विशेषांक आज डिस्कवरी जैसे चैनलों के लिए भी एक रोचक विषय हैं और हों भी क्यों न, देखने वाले जो हैं.

इससे जुड़ी ख़बरें
'भारतीय चैनल वापस लाओ'
| भारत और पड़ोस
जादू मंतर के चक्कर में चक्करघिन्नी
30 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस
हल नहीं है ऐसे अंधविश्वास का
14 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस
मध्य प्रदेश का भूतों का मेला
25 फ़रवरी, 2005 | भारत और पड़ोस
अँधविश्वास का एक और घिनौना रूप
24 अक्तूबर, 2003 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>