BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
गुरुवार, 29 जून, 2006 को 15:50 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
बाघों की घटती संख्या पर सरकारी सुस्ती

बाघ
पर्यावरणविदों का कहना है कि सरकार बाघों के संरक्षण पर संजीदा नहीं है
कभी भारत की शान कहे जाने वाले बाघों की संख्या तेजी से घट रही है और वे लुप्त होने के कगार पर हैं.

इसके मद्देनज़र टाइगर टास्क फोर्स ने बाघों के संरक्षण के लिए पुख़्ता सुरक्षा उपाय और वन्य जीव अपराध ब्यूरो के गठन की सिफ़ारिश की है.

बाघों की घटती संख्या का अंदाज़ा पिछले वर्ष फ़रवरी में बेहद नाटकीय ढंग से मिला जब राजस्थान के सरिस्का अभ्यारण्य में एक भी बाघ की निशानी नहीं मिली.

'सरिस्का शॉक' के सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई और मामले की गंभीरता को समझते हुए सरकार ने एक टाइगर टास्क फोर्स का गठन किया.

टास्क फ़ोर्स की प्रमुख सुनीता नारायण ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट में तीन बातों पर ज़ोर दिया है. पहला बाघों के संरक्षण के लिए जंगलों में सुरक्षा के ठोस इंतज़ाम किए जाएँ, वन्य जीव अपराध ब्यूरो का गठन किया जाए और बाघों के संक्षरण से स्थानीय लोगों को जोड़ा जाए.

प्रशासनिक सुस्ती

टास्क फ़ोर्स की रिपोर्ट पर इस महीने के शुरू में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में एक बैठक हुई.

बाघों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई फ़िल्में बना चुके वन्यजीव संरक्षक वाल्मिकी थापर कहते हैं "इस बैठक में सबने शिकायत की कि वन और पर्यावरण मंत्रालय बहुत सुस्ती से काम कर रहा है और रिपोर्ट पर अमल करने में ढुलमुल रवैया अपनाया जा रहा है."

 वाइल्ड लाइफ़ क्राइम ब्यूरो की फाइल वर्षों से मंत्रालयों के चक्कर काट रही है. इसी तरह प्रोजेक्ट टाइगर को क़ानूनी हैसियत देने संबंधी प्रस्ताव भी सरकारी महकमों में धूल चाट रहा है
वाल्मिकी थापर

थापर मिसाल देते हैं, "वाइल्ड लाइफ़ क्राइम ब्यूरो की फाइल वर्षों से मंत्रालयों के चक्कर काट रही है. इसी तरह प्रोजेक्ट टाइगर को क़ानूनी हैसियत देने संबंधी प्रस्ताव भी सरकारी महकमों में धूल चाट रहा है."

लेकिन भारत सरकार के पर्यावरण सचिव प्रदीप्तो घोष कहते हैं, "दरअसल स्थिति उतनी बुरी नहीं है जितना कुछ लोग मीडिया को बता रहे हैं. स्वतंत्र विशेषज्ञों ने सभी 28 अभ्यारण्यों का मुआएना करके अपनी रिपोर्ट दी है जिसमें सिर्फ़ दो को छोड़कर बाक़ी सभी अभ्यारण्यों की स्थिति पर संतोष प्रकट किया गया है."

वन्य जीव अपराध ब्यूरो के गठन के बारे में घोष का कहना है कि यह एक क़ानूनी प्रक्रिया है जिसमें समय तो लगता है लेकिन मंत्रिमंडल से इसकी मंज़ूरी मिलते ही ब्यूरो बना दिया जाएगा जिसके पास वन्य जीवों के संक्षरण के लिए विशेष अधिकार होंगे.

बचाए कौन

टास्क फ़ोर्स की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि स्थानीय लोगों को वन विभाग में नौकरियाँ दी जाएँ और उन्हें बाघों के संक्षरण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए.

 जब बाघों की गिनती के वास्तविक आँकड़े सामने आएँगे तो वे हमें रूला देंगे लेकिन जानना ज़रूरी है कि कहाँ और कितने बाघ हैं ताकि उन्हें बचाया जा सके
सुनीता नारायणन

वाल्मिक थापर एक गंभीर समस्या की ओर ध्यान दिलाते हैं जो कि बहुत गंभीर और पुरानी है. वे बताते हैं, "पिछले 18 वर्षों से फॉरेस्ट गार्ड के लगभग 25 हज़ार पद ख़ाली पड़े हैं. एक वनरक्षक की औसत उम्र अब 50 वर्ष से ऊपर है और वे एक जगह बैठे उँघते रहते हैं. यह बहुत ख़तरनाक स्थिति है इसलिए जल्द से जल्द स्थानीय नौजवानों को भर्ती किया जाना चाहिए."

पर्यावरण सचिव घोष भी मानते हैं कि बड़ी संख्या में पद ख़ाली हैं जो कि उनके विभाग के लिए चिंता का विषय है लेकिन उनका कहना है कि इसकी वजह राज्य सरकारों की ख़राब माली हालत है.

वे कहते हैं, "हम उम्मीद करते हैं कि आर्थिक सुधारों के बाद राज्य सरकारों की स्थिति सुधरेगी और वे गार्डों की नियुक्ति कर पाएँगे."

रहस्य

सबसे दिलचस्प बात ये है कि कोई नहीं जानता कि भारत में कितने बाघ हैं, कहाँ हैं, और किस हाल में हैं. टाइगर टास्क फ़ोर्स ने भी वैज्ञानिक तरीक़े से गिनती पर ज़ोर दिया है ताकि सरिस्का जैसी हालत न हो, जहाँ यह समझा जाता रहा कि बाघ हैं लेकिन उनका पूरी तरह सफाया हो चुका था.

 हम उम्मीद करते हैं कि आर्थिक सुधारों के बाद राज्य सरकारों की स्थिति सुधरेगी और वे गार्डों की नियुक्ति कर पाएँगे
प्रदीप्तो घोष

केंद्रीय पर्यावरण सचिव का कहना है कि वैज्ञानिक तरीक़े से गिनती हो रही है और इस वर्ष के अंत तक बाघों की गिनती का काम पूरा हो जाएगा. अब तक दावा किया जाता रहा है कि भारत में लगभग 3600 बाघ हैं.

लेकिन सुनीता नारायण और वाल्मिकी थापर दोनों मानते हैं कि बाघों की वास्तविक संख्या इससे बहुत कम हो सकती है. सुनीता नारायण कहती हैं, "जब बाघों की गिनती के वास्तविक आँकड़े सामने आएँगे तो वे हमें रूला देंगे लेकिन जानना ज़रूरी है कि कहाँ और कितने बाघ हैं ताकि उन्हें बचाया जा सके."

थापर आशंका व्यक्त करते हैं कि बाघों की वास्तविक संख्या 1200 तक हो सकती है और सरिस्का जैसी हालत कई और जगहों पर हो सकती है.

'सरिस्का शॉक' को सामने आए डेढ़ वर्ष हो चुके हैं और इस अवधि में सिर्फ़ इतना ही हुआ है कि एक समिति ने अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है लेकिन उस पर अमल के नाम पर अभी बैठकें ही हो रही हैं.

इससे जुड़ी ख़बरें
अब शेरों के लिए भी वृद्धाश्रम
05 जून, 2006 | भारत और पड़ोस
हाथियों को पेंशन
| भारत और पड़ोस
शिकार पर रोक की पहल
01 जुलाई, 2003 | पहला पन्ना
पहली बार जंगल गया पांडा
30 अप्रैल, 2006 | विज्ञान
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>