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भारतीय इंजीनियर सूर्यनारायण की हत्या | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत सरकार ने इस ख़बर की पुष्टि की है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान विद्रोहियों ने भारतीय इंजीनियर सूर्यनारायण को मार दिया है. नई दिल्ली में विदेश सचिव श्याम सरन ने पत्रकारों को बताया कि भारतीय दल के पहुँचने से पहले ही के सूर्यनारायण की हत्या की जा चुकी थी. सरन ने कहा कि इससे साफ ज़ाहिर है कि तालेबान सूर्यनारायण को जान से मारना ही चाहते थे और किसी बातचीत में उनकी दिलचस्पी नहीं थी. भारतीय विदेश सचिव ने कहा कि तालेबान के इस क़दम के बावजूद भारत अफ़ग़ानिस्तान में विभिन्न परियोजनाओं पर काम करता रहेगा. इससे पहले विदेश विभाग के एक बयान में कहा गया था कि सरकार को अफ़ग़ानिस्तान में क़लत और ग़ज़नी के बीच एक व्यक्ति का शव पाए जाने की जानकारी मिली है, और शव की पहचान के लिए वहाँ एक टीम भेजी गई है. के सूर्यनारायण का शुक्रवार को ज़ाबूल प्रांत में तालेबान ने अपहरण कर लिया था और रिहाई के लिए कुछ शर्तें रखी थीं. तालेबान प्रवक्ता का बयान पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत के पेशावर इलाक़े में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार रहीमुल्ला यूसुफ़ज़ई ने तालेबान के प्रवक्ता क़ारी यूसुफ़ के हवाले से बताया है कि सूर्यनारायण को रविवार सुबह मार दिया गया. तालेबान प्रवक्ता ने कहा है कि इंजीनियर सूर्यनारायण ने रिहासत से भागने की कोशिश करते हुए एक पहरेदार को अपने क़ब्ज़े में ले लिया. लेकिन साथ ही बाक़ी पहरेदार आ गए और उन्होंने सूर्यनारायण को भागने की कोशिश करते हुए देखकर उन्हें गोली मार दी. प्रवक्ता ने बताया कि सूर्यनारायण का शव पास के ही इलाक़े में सड़क पर छोड़ दिया गया है. इससे पहले तालेबान ने सूर्यनारायण को छोड़ने के लिए अपनी माँगों पर ज़ोर दिया था लेकिन समय सीमा में कोई फेरबदल नहीं की थी. ऐसी संभावना जताई गई थी कि भारत सरकार की सकारात्मक प्रतिक्रिया को देखते हुए समय सीमा बढ़ाई जा सकती है. माँगें तालेबान की माँगों में अफ़ग़ानिस्तान में सक्रिय भारतीय कंपनियों को वापिस बुलाने और भारतीय दूतावास को भी बंद करने की शर्तें शामिल हैं. ग़ौरतलब है कि भारत सरकार ने इंजीनियर सूर्यनारायण को रिहा कराने की कोशिशों के तहत एक दल अफ़ग़ानिस्तान रवाना किया था. अफ़ग़ानिस्तान सरकार भी सूर्यनारायण को रिहा कराने की पूरी कोशिश कर रही थी. वरिष्ठ पत्रकार रहीमुल्ला यूसुफ़ज़ई का कहना है कि ज़ाबुल प्रांत में क़बायली सरदारों का तालेबान पर काफ़ी प्रभाव है और क़बायली सरदारों के ज़रिए तालेबान से संपर्क की कोशिशें की जा रही थी. इससे पहले भी इस तरह के मामलों में क़बायली सरदारों का प्रभाव कारगर साबित हुआ था. | इससे जुड़ी ख़बरें भारतीय दल अफ़ग़ानिस्तान रवाना29 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस 'अमरीकी फ़ौजें हटें तब रुकेगा हमला'21 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान में फिर तालेबान से 'झड़पें'16 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस तालेबान लड़ाकों की तलाश15 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस भारत-अफ़ग़ानिस्तान में तीन समझौते10 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस कुट्टी का अंतिम संस्कार हुआ24 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'अफ़ग़ानिस्तान को सहायता जारी रहेगी'01 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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